RAISEN : इनसे मिलिए ये हैं भोजपुर के ट्री-मैन, अब तक लगा चुके हैं लाखों पेड़
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RAISEN : इनसे मिलिए ये हैं भोजपुर के ट्री-मैन, अब तक लगा चुके हैं लाखों पेड़
RAISEN :भोजपुर के ट्री-मैन, अब तक लगा चुके हैं लाखों पेड़

अरविंद सिंह का कहना है भोजपुर (bhojpur) के पास मंडीदीप इंडस्ट्रियल इलाका है. यहां से उठने वाले प्रदूषण (pollution) के कारण भोजपुर का मंदिर भी काला पड़ रहा है. हवा को शुद्ध करने के लिए हमने चारों ओर पहाड़ियों पर, सड़क किनारे, नदी के पास, गांव के श्मशान तक में पेड़ लगाए हैं.

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देवराज दुबे की रिपोर्ट

रायसेन.पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रहे कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो बड़ी खामोशी और शिद्दत से प्रकृति (nature) को नई जिंदगी देने में लगे हुए हैं. वो अपने खर्च पर पेड़ (tree) लगा रहे हैं. दावा है कि अब तक 5 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं. संख्या भले ही इतनी न हो लेकिन जो इलाका कल तक पथरीला नज़र आता था अब उसने हरियाली की चादर ओढ़ ली है.

हम बात कर रहे हैं रायसेन की. राजधानी भोपाल से मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित है विश्व प्रसिद्ध भोजपुर और शिव मंदिर. पत्थरों से बनाए गए विश्व प्रसिद्ध शिव मंदिर के आस पास औऱ दूर-दूर तक हरियाली का नाम-ओ-निशान नहीं था. सिर्फ और सिर्फ पथरीला इलाका. बड़ी-बड़ी चट्टानें और पत्थर.यही यहां की पहचान थी. लेकिन अब ऐसा नहीं है. निखिल धाम के पर्यावरण प्रेमी संत अरविंद कुमार सिंह ने यहां की तस्वीर बदल दी है. वो कहते हैं मैंने अपने बगीचे में करीब 80 हजार पेड़ लगाए हैं. बाकी आस पास लगभग 5 लाख पेड़ लगाए जा चुके हैं. इनमें औषधीय और फलों से लेकर सभी किस्म के पेड़ शामिल हैं. गांव के साथ-साथ यहां तक कि श्मसान और भोजपुर पहुंचने वाले मार्ग को भी हरा भरा बना दिया है.



नहीं ली किसी से मदद



अरविंद कुमार सिंह कहते हैं ये सब उन्होंने अपने खर्चे से किया. किसी की मदद नहीं ली. इन पेड़-पौधौं की देखभाल करने वाले नरेंद्र माली बताते हैं कि आस पास के पहाड़ों पर डंपर से काली मिट्टी डालकर उस में खाद डालकर पेड़ लगाए गए हैं. इनकी देखभाल के लिए 2 दर्जन लोग लगे हुए हैं. सभी पेड़ो को टेंकर से पानी दिया जाता है. संतजी ने कहा है हमें नाम का प्रचार नहीं करना है बल्कि पर्यावरण को बचना है. कटते जंगल और बढ़ते उधोगों के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है. हमें उसे बचाना है.

बरसों में बदली तस्वीर
ग्वालियर से भोपाल पहुंचे पर्यटक मुकेश शर्मा ने बताया कि वो विश्व प्रसिद्ध भोजपुर शिव मंदिर के दर्शन के लिए जा रहे थे. जब वो 23 साल पहले यहां आए थे तब पेड़ नहीं थे. लोगों से पूछा तो बताया निखिल धाम के गुरुजी ने यहां लाखों पेड़ लगा दिए हैं खुशी हुई कि गुरुजी ने पर्यावरण को बचाने के लिए पेड़ लगा रहे हैं.

ऐसे की जाती है देखभाल
पेड़ लगाने वाले राकेश कीर ने बताया कि यह पूरा क्षेत्र बंजर था. यहां सैकड़ों डंपर मिट्टी डाल कर इस में पेड़ लगाए जा रहे हैं. मिट्टी में गढ्ढा कर उसमें पेड़ लगाते हैं. फिर खाद डाली जाती है. जब तक पेड़ की ज़मीन में अच्छे से जड़ें जम नहीं जातीं तब तक देखभाल की जाती है. पौधों में टेंकरों से पानी डाला जाता है. खाद देकर देखभाल की जाती है.

वन विभाग ने की तारीफ
अरविंद सिंह के प्रयास से वन विभाग भी खुश है. औबेदुल्लागंज के डीएफओ विजय कुमार कहते हैं कि बहुत खुशी की बात है कि निखिल धाम के गुरुजी पर्यावरण संरक्षण में अपना इस तरह योगदान दे रहे हैं. वृक्ष लगा कर उनकी देखभाल कर रहे हैं. उन्होंने कई प्रकार के वृक्ष लगाए हैं. समाज को इनसे सीख लेना चाहिए.

पर्यावरण संरक्षक की बात
अरविंद सिंह का कहना है भोजपुर के पास मंडीदीप इंडस्ट्रियल इलाका है. यहां से उठने वाले प्रदूषण के कारण भोजपुर का मंदिर भी काला पड़ रहा है. हवा को शुद्ध करने के लिए हमने चारों ओर पहाड़ियों पर, सड़क किनारे, नदी के पास, गांव के श्मशान तक में पेड़ लगाए हैं. हमारा उद्देश्य पर्यावरण को बचाना है. आगे भी हम जगह जगह पेड़ लगाएंगे. जो लोग हमारे पास आते हैं हम उन्हें पेड़ देते हैं और उन्हें अधिक से अधिक पेड़ लगाने की सलाह देते है.
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