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Navratri Festival: जब धरती में समा गई थी कन्या! जानें राजगढ़ के माता भैंसवा मंदिर का रहस्य

Rajgarh News: भैंसवा माता का यह मंदिर क्षेत्र में बिजासन माता के मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है.

Rajgarh News: भैंसवा माता का यह मंदिर क्षेत्र में बिजासन माता के मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है.

Rajgarh Temple News: यहां पर किन्नरों के द्वारा नृत्य किया जाता है. वर्तमान समय में 21 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर का न ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- शुभम जायसवाल

राजगढ़ (एमपी). मध्य प्रदेश में कई विश्व प्रसिद्ध देवी मंदिर है, जहां पर देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन और पूजन करने के लिए आते हैं. नवरात्रि के अवसर पर इन मंदिरों में भक्तों का जमावड़ा लगा हुआ है और वह देवी से अपने कष्टों के निवारण के साथ मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं. ऐसा ही एक प्रसिद्ध और चमत्कारी मंदिर राजगढ़ जिले की सारंगपुर तहसील के एक गांव भैंसवा में स्थित है.

भैंसवा माता मंदिर का इतिहास
भैंसवा माता का यह मंदिर क्षेत्र में बिजासन माता के मंदिर के नाम से भी प्रसिद्ध है. यह मंदिर 200 एकड़ में फैली एक पहाड़ी पर स्थित है और मान्यता है कि देवी प्रतिमा करीब 2600 साल से ज्यादा प्राचीन है. इस मंदिर में स्थापित देवी प्रतिमा के संबंध में क्षेत्र में एक लोककथा प्रचलित है, जिसके अनुसार बहुत समय पहले राजस्थान का लाखा बंजारा नाम का एक व्यक्ति अपने पशुओं को चराने भैंसवा की 1200 एकड़ में फैली पहाड़ी पर आया करता था. एक दिन उस बंजारे को एक रोती हुए कन्या दिखाई दी, जो बिजासन मां का ही बाल स्वरुप थी.

लाखा बंजारे ने कन्या से पूछताछ की तो पता चला कि उसका कोई नहीं है. तब लाखा उस कन्या को अपने साथ ले गया और बेटी कि तरह उसका पालन-पोषन करने लगा, क्योंकि उसकी कोई संतान नहीं थी. अब यह कन्या पशुओं को चराने भैंसवा कि पहाड़ी पर जाने लगी. कन्या अन्य ग्वाल साथियों के साथ अपने पशुओं को चराया करती थी. सारे ग्वाले अपने पशुओं को पानी पिलाने दूर किसी तालाब में जाते थे, लेकिन यह कन्या अपने पशुओं को पानी पिलाने उनके साथ नहीं जाती थी. तब ग्वालों ने इसकी शिकायत उसके पिता से की तो लाखा बंजारे ने इन ग्वालों कि बात का विश्वास तो नहीं किया कि यदि पशुओं को पानी नहीं पिलाती तो वह इतने चुस्त-दुरुस्त कैसे हैं?

तालाब में कन्या करती थी स्नान
फिर भी लाखा बंजारा उसको देखने के लिए जंगल गया. जब सारे ग्वाले अपने पशुओं को पानी पिलाने गए और वह कन्या नहीं गई और निर्वस्त्र होकर ओम का उच्चारण करती रही, जिससे पानी का तालाब भर गया और कन्या वहां पर स्नान करती रही और सभी पशु पक्षी और जंगल के अन्य जानवर जैसे शेर, हाथी भी पानी पीते रहे. सारा दृश्य बंजारा एक झाड़ी के पीछे से देखता रहा. तब कन्या की नजर और उसके पिता (बंजारे) कि नजर आपस में मिली, तो माता लज्जा कि वजह से ओम का उच्चारण करती रही और धरती में समा गई. लाखा बंजारा जब वहां आता है और अन्य ग्वाले भी आते है तब बंजारा उनको सारी बात बताता है और विलाप करता है.

बड़ी गादी के नाम से प्रसिद्ध
वर्तमान समय में जहां माता समाई थी उसी जगह दूध तलाई नामक विख्यात स्थान है जहां आज भी कई भक्त श्रद्धालु आते है. मान्यता है कि यहां की मिट्टी और जल मात्र से रोगियों के रोग दूर हो जाते है. कुछ समय पश्चात जब बंजारों का डेरा वहां से चला जाता है तब माता ने अपना दाहिना हाथ उसी पहाड़ी पर निकाला था, जो वर्तमान समय में बड़ी गादी के नाम से प्रसिद्ध है. कुछ समय पश्चात् माता ने सम्पूर्ण शरीर बाहर निकाल लिया जो वर्तमान में मुख्य मंदिर में विराजमान है.

21 करोड़ की लागत से बन रहा है मंदिर
भैसवा माता के यहां वर्ष में 2 बार मेले का आयोजन होता है. माघ पूर्णिमा एवं वैशाख पूर्णिमा को यहां माता जी की पालकी निकाली जाती है. जिसमे बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते है। पालकी (माता की डोली) पहाड़ी पर स्थित मंदिर से शुरू होकर पुरे नगर में भ्रमण करते हुए डीजे, ढोल, कीर्तन एवं नृत्य के साथ मंदिर तक जाती है. यहां पर किन्नरों के द्वारा नृत्य किया जाता है.

वर्तमान समय में 21 करोड़ रुपए की लागत से मंदिर का निर्माण किया जा रहा है जो भक्तों के पैसों से किया जा रहा है.

Tags: Durga Puja festival, Hindu Temples, Mp news, Navratri festival, Rajgarh News

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