VIDEO: महिला सशक्तिकरण के नाम पर राजगढ़ में आजीविका मिशन ने किया बड़ा घोटाला !

राजगढ़ के कालीपीठ और दाता ग्राम में छात्रों तक या तो स्कूल ड्रेस पहुंची नहीं और पहुंची भी है तो छात्र हाफपैंट होने की वजह से इसे नहीं पहन पा रहे हैं. जिन स्कूलों में एक जोड़ी स्कूल यूनिफॉर्म पहुंची है वहां अधिकांश पर तो आजीविका मिशन के टेग ही नहीं है या फिर पर अन्य निजी प्रतिष्ठानों के नाम लिखे हुए हैं.

Manish Kumar | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 24, 2019, 3:40 PM IST
Manish Kumar | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 24, 2019, 3:40 PM IST
मध्यप्रदेश के राजगढ़ में महिलाओं को सशक्त बनाने के नाम पर आजीविका मिशन के प्रबंधन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. मामला 13 जुलाई 2018 को राज्य शिक्षा केंद्र से जारी पत्र के निर्देश पर इस साल कक्षा 1 से 8 तक के शासकीय स्कूलों के बच्चों को यूनिफॉर्म वितरण के लिए पहली बार स्वंय सहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से कराने का आदेश दिए थे. यह स्कूल यूनिफॉर्म तय मापदंड के अनुसार आजीविका मिशन के टेग लगातर सितंबर माह तक जिले के ढाई लाख छात्रों को 5 लाख यूनिफॉर्म दी जानी चाहिए थे, लकिन हकिकत यह है कि कई स्कूलों में चार माह बीतने के बाद दो में से एक यूनिफॉर्म पहुंच पाई.

राजगढ़ के कालीपीठ और दाता ग्राम में छात्रों तक या तो स्कूल ड्रेस पहुंची नहीं और पहुंची भी है तो छात्र हाफपैंट होने की वजह से इसे नहीं पहन पा रहे हैं. जिन स्कूलों में एक जोड़ी स्कूल यूनिफॉर्म पहुंची है वहां अधिकांश पर तो आजीविका मिशन के टेग ही नहीं है या फिर पर अन्य निजी प्रतिष्ठानों के नाम लिखे हुए हैं. वैसे तो समूहों द्वारा खुद कपड़ा खदीकर इन ड्रेसों को बनाकर देना था, लेकिन स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की माने तो उन्हें 60 रुपये प्रति यूनिफॉर्म दिया जा रहा है.



जिला कलेक्टर निधि निवेदिता की पहल पर जब मामले की जांच करने सीईओ जिला पंचायत पहुंचे तो करेड़ी के सेकूल में उन्हें निजी ब्रांड की यूनिफॉर्म मिली. काफी तलाश के बाद मिशन संचालक ने बताया कि वह यूनिफॉर्म बखेड़ गांव के महिला समूह द्वारा बनाई गई  है. सीईओ जब मौके पर पहुंचे तो गांव के तीन टेलर्स दुकानों पर इन यूनिफॉर्स को बना रहे थे. इन दुकानों पर पुरुषों द्वारा ये ड्रेस बनाई जा रही थी, जिसे जब्त करने के बजाए सीईओ ब्रांड के निर्माता को ढूंढते रहे. मामले में आखिर वहां काम कर रहे टेलर्स ने उसे रेडीमेड बताकर सच्चाई सामने ला दी.

दरअसल, यह मामला इतने पर ही नहीं रुका. इसमें परा खेल ऐसे हुआ कि 13 जुलाई को जारी किए गए पत्र के पहले साल 2017 एक ओर पत्र के हवाले से यूनिफॉर्म के कपड़े और पूरी सामग्री पावर लूम बुनकर सहकारी संघ बुरहानपुर से खरीदने के लिए शासन ने सभी आयुक्त और कलेक्टर को आदेशित किया गया था. इसपर राजगढ़ जिले के आजीविका मिशन संचालकों ने आजीविका मिशन के समूहों के साथ पांच लाख यूनिफॉर्म का कपड़ा और सामग्री बल्क में बिना टेंडर प्रक्रिया के कर ली और महिलाओं को समृद्ध बनाने के नाम पर लिए गए काम में महिलाओं को मजदूर बनाकर 60 रुपये प्रति यूनिफॉर्म से मजदूरी दी. इसके साथ ही गांवों में भी इस फर्जीवाड़े के लोगों को कमाई करने का जरिए मिल गया था. अब मामले की शिकायत आटीआई कार्यकर्ता ने सीएम, शिक्षामंत्री सहित आयुक्त से कर दी है,  जिसके बाद एसआईटी गठित कर इसकी जांच की मांग की गई है.

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