राजगढ़ लोकसभा सीट: दिग्विजय के गढ़ में जीत पाएंगी कांग्रेसी मोना सुस्तानी?

मध्य प्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट राज्य की वीआईपी सीटों में से एक है. यह क्षेत्र कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के दबदबे वाला क्षेत्र है.

News18 Madhya Pradesh
Updated: May 10, 2019, 4:23 PM IST
राजगढ़ लोकसभा सीट: दिग्विजय के गढ़ में जीत पाएंगी कांग्रेसी मोना सुस्तानी?
राजगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी मोना सुस्तानी
News18 Madhya Pradesh
Updated: May 10, 2019, 4:23 PM IST
मध्य प्रदेश की राजगढ़ लोकसभा सीट राज्य की वीआईपी सीटों में से एक है. यह क्षेत्र कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के दबदबे वाला क्षेत्र है. राजगढ़ जिला राज्य का अहम शहर है. यहां नेवज नदी बहती है. यहां नरसिंहगढ़ का किला है, जिसे कश्मीर ए मालवा कहा जाता है. ये जिला मालवा पठार के उत्तरी छोर पर पार्वती नदी के पश्चिमी तट पर स्थित है. राजगढ़ 'भैसवा माता' के मंदिर के लिए काफी लोकप्रिय है, जहां हर साल माघ मेला लगता है.

कौन हैं प्रत्याशी



बीजेपी ने पिछली बार के जीते उम्मीदवार रोडमल नागर को टिकट दिया है. वह कृषि मंत्रालय की सलाहकार समिति के सदस्य हैं. इसके अलावा वह ओबीसी कल्याण समिति और स्थाई संसदीय समिति रक्षा के भी सदस्य हैं. कांग्रेस ने इस बार मोना सुस्तानी को उम्मीदवार बनाया है. उन्हें दिग्विजय सिंह खेमे का माना जाता है. कांग्रेस ने पहली बार इस सीट पर किसी महिला उम्मीदवार को उतारा है. वो जिला पंचायत सदस्य हैं. पूर्व विधायक गुलाब सिंह सुस्तानी की बहू हैं मोना सुस्तानी, जो दो बार विधायक रह चुके हैं. इस सीट पर ओबीसी वोटर्स की तादाद काफी ज्यादा है. मोना सुस्तानी धाकड़ समाज से हैं. उन्हें टिकट दिए जाने का यह बड़ा कारण माना जा रहा है, क्योंकि धाकड़ समाज बीजेपी के साथ माना रहा था. उन्हें लाकर वोट बैंक तोड़ने की कोशिश की गई है.

rodmal nagar
बीजेपी प्रत्याशी रोडमल नागर यहां से 2014 में भी जीतकर संसद पहुंचे थे.


पिछले चुनाव का हाल

मध्यप्रदेश की इस सीट से मौजूदा सांसद बीजेपी के रोडमल नागर हैं. 2014 में उन्होंने कांग्रेस के कद्दावर नेता नारायण सिंह आमलाबे को 2 लाख 28 हजार 737 वोटों से हराया था. रोडमल नाहर को सबसे ज्यादा 5 लाख 96 हजार 727 वोट मिले थे. दूसरे स्थान पर कांग्रेस पार्टी के नारायण सिंह रहे, जिन्होंने 3 लाख 67 हजार 990 वोट हासिल किए. बीएसपी तीसरे नंबर पर रही थी. उनकी पार्टी के शिवनारायण वर्मा को 13 हजार 864 वोट मिले. नोटा 10 हजार 292 वोट पाकर चौथें स्थान पर रहा.

राजगढ़ लोकसभा सीट में विधानसभा की आठ सीटें आती हैं. 1984 में यहां से पहली बार कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह निर्वाचित हुए. हालांकि 1989 के चुनाव में यहां भारतीय जनता पार्टी ने जीत के साथ खाता खोला. तब प्यारेलाल खंडेलवाल ने दिग्विजय को हराया था. लेकिन 1991 में एक बार फिर से यहां दिग्विजय सिंह जीते. उन्होंने प्यारेलाल खंडेलवाल को ही हराया.
Loading...

लक्ष्मण सिंह


इसके बाद 1994 में यहां उपचुनाव हुए जिसमें कांग्रेस विजयी हुई और दिग्विजय सिंह के भाई लक्ष्मण सिंह सांसद चुने गए. 1996, 1998, 1999 और 2004 के चुनाव में भी यहां लक्ष्मण सिंह जीते. यह अलग बात है कि 2004 में लक्ष्मण सिंह कांग्रेस नहीं, बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे. 2009 के चुनाव में इस सीट को जीतकर कांग्रेस नेता आमलाबे नारायण सिंह लोकसभा पहुंचे. इस बार उन्होंने लक्ष्मण सिंह को हराया. 2014 के चुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ और बीजेपी यहां जीत गई और रोडमल नागर यहां से सांसद बने.

सामाजिक समीकरण

राजगढ़ की कुल आबादी 24 लाख 89 हजार 435 है. यहां की 92 प्रतिशत आबादी हिंदू और छह फीसदी मुस्लिम है. इस क्षेत्र में गुर्जर, यादव और महाजन वोटर्स की संख्या अच्छी खासी है. चुनाव में किसी भी उम्मीदवार की जीत में ये वोटर्स अहम भूमिका निभाते हैं.

चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के चुनाव में इस सीट पर 15,78,748 मतदाता थे. इनमें से 7,51,747 महिला मतदाता और 8,27,001 पुरुष मतदाता थे.  राजगढ़ लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की आठ सीटें आती हैं- चचौड़ा, ब्यावरा, सारंगपुर, राघोगढ़, राजगढ़, सुसनेर, नरसिंहगढ़ और खिलचीपुर. इनमें पांच पर कांग्रेस, दो पर बीजेपी और एक सीट पर निर्दलीय विधायक है.

ये भी पढ़ें:

सागर लोकसभा सीट: इस बार राजबहादुर सिंह बनाम प्रभु सिंह होगा मुकाबला

खजुराहो लोकसभा सीट: इस बार कविता सिंह बनाम बीडी शर्मा होगा मुकाबला

ऐसा है इस सीट का इतिहास, यहां से चुने गए सांसद बाद में विधायक बन गए
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...