10 साल की बच्ची बोली- कलेक्टर मैडम! मुझे बचा लो, चाचा ने मेरा सौदा कर दिया है

मध्य प्रदेश के राजगढ़ में सामाजिक कुरीतियों से परेशान महिलाओं के संगठन लाल चुनर की रैली में शामिल 10 साल की बच्ची ने कहा- चाचा ने मेरा सौदा किया है, कलेक्टर मैडम बचा लो .

News18 Madhya Pradesh
Updated: July 5, 2019, 9:06 PM IST
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Updated: July 5, 2019, 9:06 PM IST
परिवार से त्याग दी गईं या अन्य समस्याओं से परेशान महिलाओं ने लाल चुनर नाम से एक संगठन बनाया है. इस संगठन की ओर से राजगढ़ में शुक्रवार को रैली निकाली गई और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया. इनमें फूलखेड़ी गांव की 10 साल की एक बच्ची भी थी. वह कलेक्टर से यह गुहार लगा रही थी - 'मेरे पिता की मौत हो चुकी है. मैं अपने नाना- मामा के यहां रहती हूं. मेरे चाचा ने पैसे लेकर मेरा सौदा कर दिया है और अब वे शादी के लिए दबाव बना रहे हैं, उठा ले जाने की धमकी दे रहे हैं. मैं पढ़ना चाहती हूं. मुझे बचा लो कलेक्टर मैडम.'

राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
राजस्थान की सीमा से लगे राजगढ़ जिले में नातरा और झगड़ा नाम की कुप्रथा का दंश महिलाएं झेलती आ रहीं है. इसके नाम पर सीधे तौर पर कहें तो महिलाओं की तस्करी व बोली लगाने जैसे पंचायती फरमान जारी कर निर्णय लिए जाते हैं. इसके खिलाफ समाज सेविका मोना सुस्तानी की अगुवाई में लाल चुनर संगठन के बैनर तले महिलाओं ने गुरुवार को रैली निकाली. राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा. इसी में वह दस साल की बच्ची भी थी.

ज्ञापन में मुख्य रूप से इस प्रथा को बढ़ा देने के लिए सक्रिय दलालों पर अंकुश लगाने, दोषियों पर कार्रवाई के साथ परिवार से त्याग दी गई महिलाओं के लिए एक ऐसे आश्रम की मांग की गई है. जिसमें उन्हें स्कील डेवलपमेंट जैसी योजना का लाभ देकर अपने पैर खड़ा होने के लायक बनाया जा सके. इस दौरान ब्यावरा विधायक गोरर्धन दांगी, राजगढ़ के पूर्व विधायक हेमराज कल्पोनी और कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे.

लाल चुनर संगठन की रैली में महिलाएं


क्या है नातरा प्रथा

किसी भी लड़की की सगाई या फिर विवाह टूटने के बाद चाहे लड़का उसे छोड़े या फिर लड़की अपने मन से लड़के को छोड़े दोनों ही परिस्थितियों में लड़का पक्ष लड़की के परिवार वालों या फिर लड़की यदि किसी अन्य जगह विवाह करती है तो ससुराल पक्ष से इस नातरा (दूसरे विवाह) के बदले में झगड़ा लिया जाता है. जो जेवरातों के साथ ही मोटी रकम के रूप में होता है. यह राशि कोई और नहीं बल्कि समाज के ही प्रबुद्ध लोग पंच के रूप में तय करते है. जिले की यदि बात करे, तो यह पहले बड़ी जातियों में चलता था. लेकिन अब एक दो समाज को छोड़ दे तो लगभग सभी में यह प्रथा प्रचलित होती जा रही है.
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(रिपोर्ट- मनीष)

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First published: July 5, 2019, 8:30 PM IST
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