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स्कूल में सावरकर के कवर वाली कॉपियां बांटने पर विवाद, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्राचार्य पर गिरी गाज

Sudhir Jain | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 15, 2020, 4:23 PM IST
स्कूल में सावरकर के कवर वाली कॉपियां बांटने पर विवाद, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित प्राचार्य पर गिरी गाज
सरकारी स्कूल में वीर सावरकर के कवर वाली कॉपियां बांटने से खफा हुए अधिकारी. (फाइल फोटो).

रतलाम (Ratlam) के एक सरकारी स्कूल में वीर सावरकर (Veer Savarkar) के कवर वाली कॉपियां बांटने के कारण विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में उज्जैन कमिश्नर अजीत कुमार ने स्कूल के प्राचार्य आरएन केरावत (RN Kerawat) को निलंबित कर दिया गया है.

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रतलाम. मध्‍य प्रदेश के रतलाम जिले (Ratlam District) के एक सरकारी स्कूल में वीर सावरकर (Veer Savarkar) के कवर वाली कॉपियां बांटने पर विवाद खड़ा हो गया है. इस मामले में स्कूल के प्राचार्य आरएन केरावत (RN Kerawat) को निलंबित कर दिया गया है. हालांकि अब इस कार्रवाई का भी विरोध शुरू हो गया है. स्कूल के बच्चों ने प्राचार्य को हटाए जाने का विरोध जताया और नारेबाजी की. आपको बता दें कि केरावत वही प्राचार्य हैं जिन्हें 2011 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था.

जांच दोषी पाए गए प्राचार्य केरावत
मामला मलवासा के सरकारी स्कूल का है. यहां बीते साल 4 नवंबर को भाजपा के एनजीओ प्रकोष्ठ ने बच्चों को वीर सावरकर के कवर वाली कॉपी बांटी थीं. इस मामले को लेकर किसी ने शिक्षा विभाग में शिकायत कर दी. मामले की जांच के आदेश दिए गए और जांच में केरावत दोषी पाए गए. इसके बाद उज्जैन कमिश्नर अजीत कुमार ने प्राचार्य को निलंबित कर दिया.

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मामला मलवासा के सरकारी स्कूल का है और जांच में प्राचार्य दोषी पाए गए हैं.


बच्चों ने किया कार्रवाई का विरोध
प्राचार्य पर कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है. स्कूल के बच्चे भी कार्रवाई के विरोध में उतर गए हैं. बच्चों ने स्कूल में इकट्ठा होकर कार्रवाई के विरोध में नारेबाजी की और फैसला वापस लेने की मांग की. जबकि बीजेपी के एनजीओ प्रकोष्ठ ने भी निलंबन वापस लेने की मांग की है. पदाधिकारियों का कहना है कि 7 दिन में निलंबन वापस नहीं लिया गया तो शहर में चरणबद्ध रुप से आंदोलन करेंगे.

 प्राचार्य ने मानी गलती
इस मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि बिना अनुमति के यह कॉपियां बांटी गई थीं. प्राचार्य ने शिक्षा विभाग से इसे बंटवाने से पहले कोई अनुमति नहीं ली थी. यह बात खुद प्राचार्य ने स्वीकार की है.

 

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First published: January 15, 2020, 4:18 PM IST
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