रतलाम में 21 नगरीय निकायों के कचरे से बनेगी बिजली

योजना के बारे में जानकारी देते हुए रतलाम नगर निगम आयुक्‍त एसके सिंह.
योजना के बारे में जानकारी देते हुए रतलाम नगर निगम आयुक्‍त एसके सिंह.

रतलाम नगर निगम आसपास के पांच जिलों के 21 नगरीय निकायों के कचरे से बिजली बनाने जा रहा है. इसके लिए निजी कंपनी इन शहरों के कोने-कोने से ढूंढ-ढूंढकर कचरा इकट्ठा करेगी.

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कहते हैं कि घूरे (कचरे का ढेर) के भी दिन बदलते हैं. यह कहावत अब रतलाम, मंदसौर, नीमच, झाबुआ और अलीराजपुर जिलों में चरितार्थ होने जा रही है. आने वाले दिनों में इन जिलों में आपको ढूंढने से भी कचरा नहीं मिलेगा, क्योंकि रतलाम नगर निगम अब इन जिलों के 21 नगरीय निकायों के कचरे से बिजली बनाने जा रहा है.

इसके लिए निजी कंपनी इन शहरों के कोने-कोने से ढूंढ-ढूंढकर कचरा इकट्ठा करेगी. किलो के हिसाब से कचरे को तौला जाएगा और इसी कचरे से बिजली बनाई जाएगी. पीपीपी मोड पर 156 करोड़ के इस सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट क्लस्टर की भोपाल स्तर पर कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी है और यह प्रोजेक्ट अब आकार लेने की तैयारी में है. कचरे से बनने वाली 5 से 6 मेगावाट बिजली भी सरकार ही खरीदेगी, वहीं निजी कंपनी भी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकेगी, क्योंकि 21 सालों तक क्लस्टर का संचालन और मेंटेनेंस कंपनी के जिम्मे ही रहेगा.

रतलाम से लगे इन पांचों जिलों के 21 नगरीय निकायों से कचरा रतलाम के ट्रेंचिंग ग्राउंड में ही डंप किया जाएगा. जिससे इन निकायों में कचरे के स्थान खत्‍म हो जाएंगे. डोर टू डोर कचरा कलेक्शन की जिम्मेदारी निजी कंपनी को दी जाएगी जो ढूंढ- ढूंढकर घरों से कचरा इकट्ठा करेगी. फायदा ये कि छोटे निकाय अब कचरा मुक्त नजर आएंगे.
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