नियति का फैसला या किस्मत का क्रूर मजाक, शादी से पहले हो गई दूल्हे की मौत

मध्‍य प्रदेश के रतलाम के रानीगांव से दू्ल्हे कि बारात की जगह उसकी अर्थी निकली

मध्‍य प्रदेश के रतलाम के रानीगांव से दू्ल्हे कि बारात की जगह उसकी अर्थी निकली

Madhya Pradesh News: मध्‍य प्रदेश के रतलाम में 24 वर्षीय दूल्हे अजय सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए जावरा के अस्पताल लेकर गए, लेकिन उपचार के दौरान ही दूल्हे ने दम तोड़ दिया.

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रतलाम. इसे नियती का फैसला कहे या फिर किस्मत का क्रूर मज़ाक कि कैसे सात फेरे लेने वाले एक दूल्हे की बारात की जगह उसकी शवयात्रा निकली. घर मे शादी की तैयार‍ियों की शुरुआत हो चुकी थी. मंडप सज चुका था और दो दिन बाद बारात जानी थी, लेकिन इस घर से उठी दू्ल्हे कि अर्थी. ये दर्दनाक घटना सामने आई है मध्‍य प्रदेश के रतलाम के रानीगांव से, जहां एक परिवार में शादी की खुशियां रातों रात मातम में बदल गई.

दरअसल, रानीगांव के डोडीया परिवार के दूल्हे अजय सिंह की बारात 7 मई को पास के ही आंबा गांव में जाने वाली थी, लेकिन शादी के 2 दिन पहले ही 24 वर्षीय दूल्हे अजय सिंह की अचानक तबीयत बिगड़ गई. परिजन उसे तत्काल इलाज के लिए जावरा के अस्पताल लेकर गए, लेकिन उपचार के दौरान ही दूल्हे ने दम तोड़ दिया.

डोडीया परिवार के अजय सिंह की शादी पिपलोदा तहसील के आंबा गांव में तय हुई थी. लॉकडाउन की वजह से केवल घरवालों की उपस्थिति में ही शादी का आयोजन किया जा रहा था. जहां बुधवार शाम अजय सिंह का विवाह मंडप सजाया गया था, लेकिन देर रात अचानक से अजय की तबीयत खराब हो गई. उल्टी और घबराहट की शिकायत के बाद अजय को उसके परिजन जावरा लेकर गए, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया.

अजय अपने परिवार का इकलौता बेटा था. इस बेटे कि शादी के अरमान उसके माता-पिता ने वर्षों से सजा रखे थे, लेकिन बेटे के घोड़ी चढ़ने के पहले ही पिता को अपने बेटे की अर्थी को कांधा देना पड़ा. मृतक अजय के चचेरे भाई वीरपाल सिंह बताया कि अजय सिंह विद्युत विभाग में अस्थाई श्रमिक के तौर पर काम करता था. लॉकडाउन की वजह से परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ही उसकी शादी का मंडप सजाया गया था. घर के सभी लोग अजय की शादी से बेहद खुश थे, लेकिन रात में अचानक से अजय की तबीयत खराब हो गई और जावरा में उपचार के दौरान ही उसने दम तोड़ दिया.
बहरहाल, अजय कि असमय मौत कि वेदना ना केवल अजय का परिवार भोग रहा है बल्कि उस बेटी के परिवार पर भी यह दु:ख का पहाड़ टूटा है जिस घर बारात आने वाली थी. उस बेटी के हाथ की मेंहदी भी नहीं सूखी थी, जिसने अजय के नाम कि मेहंदी अपने रचाई थी, लेकिन नियती के इस फैसले के आगे सब बेबस नज़र आ रहे है. दोनों गांवों के लोग इस हादसे से गमज़दा है और ईश्वर से यही प्रार्थना कर रहे है कि हे प्रभु ऐसा दु:ख कभी किसी को ना दें.

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