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आरक्षण पर छलका एसपी का दर्द, मैं IPS और मुझसे कम रैंक वाला IAS

मध्य प्रदेश के रतलाम में एसपी अमित सिंह ने अब आरक्षण के मुद्दे पर बयान देकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. एसपी ने कहा कि मुझसे कम रैंक वाला दोस्त आईएएस बन गया, जबकि 144 रैंक होने के बावजूद उन्हें आईपीएस कैडर मिला.
मध्य प्रदेश के रतलाम में एसपी अमित सिंह ने अब आरक्षण के मुद्दे पर बयान देकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. एसपी ने कहा कि मुझसे कम रैंक वाला दोस्त आईएएस बन गया, जबकि 144 रैंक होने के बावजूद उन्हें आईपीएस कैडर मिला.

मध्य प्रदेश के रतलाम में एसपी अमित सिंह ने अब आरक्षण के मुद्दे पर बयान देकर नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है. एसपी ने कहा कि मुझसे कम रैंक वाला दोस्त आईएएस बन गया, जबकि 144 रैंक होने के बावजूद उन्हें आईपीएस कैडर मिला.

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मध्य प्रदेश के रतलाम में एसपी अमित सिंह ने अब आरक्षण के मुद्दे पर बयान देकर नयी बहस छेड़ दी है. एसपी ने कहा कि मुझसे कम रैंक वाला दोस्त आईएएस बन गया, जबकि 144 रैंक होने के बावजूद उन्हें आईपीएस कैडर मिला.

एसपी अमित सिंह रविवार को राजपूत समाज के दशहरा मिलन कार्यक्रम में शमिल होने पहुंचे थे. जहां आरक्षण को लेकर उनका ये दर्द सामने आया है. उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात कही.

उन्होंने अपने से 456 रैंक पीछे रहने वाले साथी के आईएएस में सिलेक्शन होने और खुद की 144वीं रैंक के बावजूद आईपीएस में सिलेक्शन होने का दर्द बयां किया.



एसपी अमित सिंह ने कहा कि मेरे हिमाचल कैडर का साथी जिसके माता-पिता आईएएस अफसर थे, जिसकी शिक्षा आईआईएम अहमदाबाद सहित ऊंचे संस्थानों में हुई. लेकिन ऑल इंडिया रैंक में मुझसे काफी पीछे होने के बावजूद उसे आरक्षण की वजह से आईएएस कैडर मिल गया.
रतलाम एसपी के इस बयान के बाद अब आरक्षण के मुद्दे पर नई बहस छिड़ गई है. हालांकि, इस बयान के सामने आने के बाद रतलाम एसपी ने इस मुद्दे पर सफाई भी दी. उनका कहना है कि माता-पिता के सक्षम होने के बावजूद कुछ लोगो को आरक्षण मिल रहा है, जबकि आरक्षण एक निश्चित समय के लिए होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण कि समीक्षा होनी चाहिए. एक ही परिवार को बार-बार आरक्षण का लाभ देना ठीक नहीं है.
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