बच्चों को 15 दिन से नहीं मिल रहा मिड-डे मील

ऐसे कच्चे-पक्के भोजन से हुई15 दिन बाद मिड-डे मील की शुरुआत
ऐसे कच्चे-पक्के भोजन से हुई15 दिन बाद मिड-डे मील की शुरुआत

रतलाम शहर की पास बंजली गांव की प्राइमरी स्कूल में जब मिड-डे मील की पड़ताल की गई तो पता चला कि स्कूल खुलने की 15 दिनों की बाद पहली बार खाना बंटा है वो भी पानी वाली दाल और कच्ची रोटी.

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सरकार भले ही स्कूलों में दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है लेकिन आलम यह है कि स्कूल खुलने के 15 दिनों के बाद भी बच्चों को स्कूलों में मिड-डे मील नहीं मिल रहा है. रतलाम शहर की पास बंजली गांव की प्राइमरी स्कूल में जब मिड-डे मील की पड़ताल की गई तो पता चला कि स्कूल खुलने की 15 दिनों की बाद पहली बार खाना बंटा है वो भी पानी वाली दाल और कच्ची रोटी. जब इस मामले में स्कूल के शिक्षकों से बात की तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए पूरा दोष खाना बनाने वाले समूह पर मढ़ दिया. समूह चलाने वालों का कहना है की बैंक की पासबुक और चैक मेडम के पास हैं. पैसा ही नहीं तो खाने का सामान कहां से लाऊं. वहीं इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी समूह को हटाने की बात कह रहे हैं.

दरअसल रतलाम जिले के लगभग सभी सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील के यही हाल है.नौनिहालों को ना ही मीनू के हिसाब से खाना मिल रहा है और ना ही वह पौष्टिक आहार है.यहां खाना बनाने वाले समूह दाल की जगह दाल का पानी परोस रहे हैं जिसे बच्चे मजबूरन निगल रहे हैं. बहरहाल रतलाम जिले में भी जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते बच्चों के मुंह का निवाला उनसे दूर है. जिन लोगों की इसके निरीक्षण की जिम्मेदारी है,उनको शायद अपनी ड्यूटी का एहसास ही नहीं है.
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