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अपराधियों के सहयोगी शातिर पुलिस कॉन्स्टेबल की हो रही पूरे MP में चर्चा, एक चूक ने कराया बर्खास्त

अपराधियों के सहयोगी शातिर पुलिस कॉन्स्टेबल की हो रही पूरे MP में चर्चा, एक चूक ने कराया बर्खास्त

पुलिस आरक्षक धमेन्द्र गिरी को एसपी ने बर्खास्त कर दिया है.

पुलिस आरक्षक धमेन्द्र गिरी को एसपी ने बर्खास्त कर दिया है.

Ratlam News: मध्य प्रदेश के रतलाम में पदस्थ एक पुलिस कॉन्स्टेबल धमेन्द्र गिरी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है. अपराधियों के सहयोग के मामले में कॉन्स्टेबल की भूमिका की जांच की गई, जिसके बाद रतलाम एसपी गौरव तिवारी ने उसे बर्खाश्त कर दिया है. इस प्रकरण की चर्चा पूरे मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग व अन्य जगहों पर हो रही है.

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    रतलाम. रतलाम (Ratlam) में पुलिस (Police) कप्तान द्वारा एक आरक्षक (Constable) को बर्खास्त करने की चर्चा पूरे मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में हो रही है. शातिराना तरीके से आरक्षक अपराधियों का सहयोग करता था, लेकिन उसकी एक चूक पर रतलाम एसपी गौरव तिवारी (SP Gaurav Tiwari) की नजर पड़ गई और उन्होंने गंभीरता से उसकी जांच कराई. जांच में कॉन्सटेबल धर्मेंद्र गिरी (Dharmendra Giri) को दोषी पाया गया, कई अपराधों में उसकी भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद कॉन्स्टेबल धमेन्द्र गिरी को बर्खास्त कर दिया है. बताया जा रहा है कि नौकरी के शुरुआती दिनों से ही धमेन्द्र गिरी का नाम अपराधियों के साथ जुड़ता रहा है, लेकिन कोई ठोस सबूत पुलिस को नहीं मिल रहा था.

    पुलिस के मुताबिक मामला चाहे मादक पदार्थों की तस्करी का हो या फिर जानवरों की खाल का प्रकरण हो. हर मामले में धमेन्द्र गिरी की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं. लेकिन उज्जैन में जानवारों की खाल तस्करी के मामले में शातिर आरक्षक ने एक भूल कर दी, जिसपर रतलाम एसपी की नजर पड़ गई. इसके बाद विभागीय कार्रवाई के बाद आरक्षक को बर्खास्त कर दिया गया है. आरक्षक के पुलिस सेवा के दौरान थाना क्षेत्रों में अपराध के दूसरे मामलों में भी उसकी भूमिका की जांच की जा रही है.

    उज्जैन में तस्करी मामले में कार्रवाई
    दरअसल उज्जैन के चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र में जानवरों की खाल की तस्करी का एक मामला पिछले साल दर्ज हुआ था. इस मामले में चिमनगंज पुलिस ने तौसीफ और उसके साथियों को गिरफ्तार किया. प्रकरण में रतलाम के जावरा थाने में पदस्थ कॉन्स्टेबल धर्मेंद्र गिरी का नाम भी संदिग्ध के रूप में सामने आया. लेकिन पुलिस शुरुआती जांच में धर्मेंद्र गिरी से अपराधियों के तार नहीं जोड़ पाई. ऐसे में तब धमेन्द्र गिरी पर कार्रवाई नहीं की गई. हालांकि उज्जैन पुलिस ने इस मामले की सूचना रतलाम एसपी गौरव तिवारी को दे दी. इसके बाद एसपी ने मामले में गंभीरता से जांच कराया तो पता चला की प्रकरण के दौरान धर्मेंद्र गिरी मेडिकल लीव पर था.

    डॉक्टरी पर्ची में उसे बेड रेस्ट की सलाह दी गई थी. एसपी ने मेडिकल लीव के दौरान आरक्षक का मोबाइल लोकेशन का पता लगवाया तो लोकेशन भोपाल का मिला. इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाया गया तो पता चला कि खाल प्रकरण में उसकी भी मुख्य भूमिका थी. धर्मेंद्र गिरी ने मेडिकल लीव को हथियार बनाकर पुलिस विभाग को गुमराह किया. मामले को गंभीरता से लेते हुए रतलाम एसपी गौरव तिवारी ने धर्मेंद्र गिरी को बर्खास्त कर दिया है.

    Tags: Madhya pradesh news, Ratlam news

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