लोकसभा चुनाव 2019: विंध्य की इस सीट पर सबकी नजर, किसके खाते में जाएगा रीवा?

Sonia Rana | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 16, 2019, 2:49 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019: विंध्य की इस सीट पर सबकी नजर, किसके खाते में जाएगा रीवा?
रीवा

विंध्य की 4 संसदीय सीटों में से एक रीवा पूरे जिले को कवर करती है और इसकी खासियत ये है कि कभी इस सीट ने किसी एक पार्टी को समर्थन नहीं दिया.

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मध्य प्रदेश की अधिकतर सीटों पर भले ही कांग्रेस का विश्वास बढ़ा हो लेकिन विंध्य में कांग्रेस की कमजोर हुई पकड़ ने कई सीटों पर कांग्रेस की टेंशन बढ़ा दी है. विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भले कांग्रेस ने बढ़त बनाई हो लेकिन रीवा लोकसभा सीट में आने वाली सभी आठ सीटों पर कांग्रेस ने मुंह की खाई है. पिछली बार जहां 2 सीटें कांग्रेस और 1 बीएसपी के पास थी, इस बार कांग्रेस उन दो सीटों से भी हाथ धो बैठी और रीवा लोकसभा में आने वाली सभी 8 सीटें बीजेपी के खाते में गई. ऐसे में बीजेपी जहां इस सीट पर अपनी जीत को दोहराने की तैयारी में है तो कांग्रेस ने इस सीट को लेकर खास रणनीति बनाई है.

विंध्य की राजनीति का केंद्र रीवा संसदीय सीट पर पहला चुनाव 1957 में हुआ. विंध्य की 4 संसदीय सीटों में एक रीवा पूरे जिले को कवर करती है और इसकी खासियत ये है कि कभी इस सीट ने किसी एक पार्टी को समर्थन नहीं दिया. यहां बीजेपी कांग्रेस के अलावा बहुजन समाज पार्टी का भी उतना ही दबदबा रहा है, जो इस सीट के इतिहास से भी साफ होता है.

- रीवा लोकसभा सीट पर कांग्रेस 6 बार जीती
- बसपा और बीजेपी पर 3-3 बार रीवा ने जताया भरोसा

ब्राहम्णों के वर्चस्व वाली इस सीट पर अकसर सभी पार्टियों ने ब्राह्मण उम्मीद्वार पर ही दांव लगाया. तीन बार का चुनाव भी बीजेपी ब्राह्मण उम्मीदवार के बल ही जीती


ब्राह्मण उम्मीदवार पर ही दांव लगाने का कारण ये भी है कि यहां आने वाले आठों विधानसभाओं में 40 प्रतिशत ब्राह्मण हैं, जो विधानसभा के साथ ही लोकसभा में भी निर्णायक साबित होते हैं. जिसके बाद क्षत्रिय एससी एसटी पटेल कुशवाहा मुस्लिम और वैश्य समुदाय के लोग आते हैं.

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जनार्दन मिश्र (File Phto)

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अगर पिछली बार के रिजल्ट पर नजर डालें तो मोदी लहर में बीजेपी के जनार्दन मिश्र ने करीब 1 लाख 68 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी. हालांकि उनको ज्यादा लोकप्रियता तब मिली जब स्वच्छ भारत अभियान में उन्होंने न सिर्फ कचरे की गाड़ी चलाई बल्कि खुद स्कूल का जाम टॉयलेट साफ करते नजर आए.

सांसद के रिपोर्ट कार्ड
- 2014 में 168726 मतों से जीते थे बीजेपी के जनार्दन मिश्र
- कांग्रेस के दिग्गज नेता सुंदर लाल तिवारी को हराया, इसके पहले 1999 में सासंद रह चुके हैं सुंदर लाल तिवारी
- समाजवादी पृष्ठभूमि से आने वाले जनार्दन मीसाबंदी भी रहे
- लेकिन लोकसभा में युवाओं को रोजगार की समस्या को हल करने में नाकाम रहे
- 16वीं लोकसभा में सासंद चुनकर गए जनार्दन सदन में नहीं बन पाए जनता की आवाज पूछे सिर्फ 149 सवाल, 37 डिबेट में हिस्सा लिया.

Congress symbol
सांकेतिक तस्वीर


रीवा लोकसभा सीट के इतिहास से साफ है ही रीवा में ब्राह्मण उम्मीद्वार का वर्चस्व भले रहा हो लेकिन यहां कि जनता किसी पार्टी पर भरोसा कायम नहीं रखती. यहां की जनता की पसंद हर पांच साल में बदली है. लेकिन इस बार के विधानसभा रिजल्ट ने यहां बीजेपी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. वहीं कांग्रेस के दिग्गज इस बात को नकार रहें हैं. उनका कहना है कि यहां के सांसद पिछले वक्त में कुछ कमाल नहीं कर पाए ऐसे में जनता कांग्रेस का साथ देगी.

मौजूदा सांसद जनार्दन मिश्र अपनी सादगी का परिचय देने में पीछे नहीं रहे हैं. पीएम मोदी के स्वच्छता अभियान के तहत सांसद महोदय ने बंद शौचालय को शुरु करने के लिए खुद शौचालय को साफ करने का वीडियो सोशल मीडिया पर खासा चर्चा में था


अब रीवा लोकसभा बीजेपी के मजबूत गढ़ के रुप में तब्दील हो चुका है और हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए लोकसभा जीतना बड़ी चुनौती बना दिया है.

यही कारण है कि इस बार रीवा लोकसभा पर कब्जा जमाने के लिए कांग्रेस फूंक फूंक कर कदम रख रही है और हाल ही में सीएम कमलनाथ ने रीवा लोकसभा को लेकर लंबा मंथन कर इस सीट को बीजेपी से छीनने का गुरु मंत्र भी दिया है. अब देखना दिलचस्प होगा कि इस बार रीवा लोकसभा की सवारी कौन कर पाता है.
(रीवा से अंचल शुक्ला के साथ भोपाल से सोनिया राणा)

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First published: March 18, 2019, 1:55 PM IST
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