सूचना देने वाले ही कर रहे फर्जीवाड़ा, RTI आवेदक को जवाब के बजाय भेजा कोरा कागज

News18 Madhya Pradesh
Updated: May 14, 2019, 8:55 PM IST
सूचना देने वाले ही कर रहे फर्जीवाड़ा, RTI आवेदक को जवाब के बजाय भेजा कोरा कागज
प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर

रीवा में सूचना का अधिकार कानून के तहत दाखिल अर्जी के जवाब में आवेदक को सूचना के बजाय कोरा कागज भेजने का मामला सामने आया है.

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सूचना के अधिकार के तहत फर्जीवाड़े की जाँच के लिए मांगे गए दस्तावेज में भी सरकारी अधिकारी फर्जीवाड़ा करने से बाज़ नहीं आते हैं. मध्य प्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ऐसे कई मामले पकड़े हैं, जिनमें लोक सूचना अधिकारी ने या तो आवेदक को कोरे कागज भेज दिए या फिर आवेदक के नकली हस्ताक्षर करके अपील ही ख़ारिज कर दी. एक मामले में तो सूचना आयुक्त ने रीवा के पुलिस अधीक्षक को जालसाजी की जांच के आदेश भी दिए हैं.

स्‍कूल के प्रिंसिपल ने भेजा कोरा कागज
आवेदक को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी न देने के लिए सरकारी अधिकारी कई तरह के हथकंडे अपनाते रहते हैं. रीवा में राज्‍य सूचना आयुक्‍त राहुल सिंह की अगुआई में आरटीआई आवेदनों पर सुनावाई के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं. एक मामला सिंगरौली के शासकीय विद्यालय, देवसर से जुड़ा है. आवेदक डॉक्‍टर आरके. झा ने इस स्‍कूल में कार्यरत एक टीचर की अंक सूची मांगी थी. मामले की गंभीरत को देखते हुए राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने आवेदक को दस्‍तावेज मुहैया कराने के आदेश दिए थे. बाद में सूचना आयुक्त ने ख़ुद फोन कर आवेदक से जानकारी ली तो पता चला की आवेदक को जानकारी के नाम पर जो लिफाफा भेजा गया था, उसमें कोरे कागज थे. आवेदक को यह लिफाफा स्‍कूल के प्रिंसिपल की ओर से भेजे गए थे.

इस मामले में राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने रीवा संभाग के अतिरिक्त संचालक (उच्च शिक्षा विभाग) डॉक्‍टर सत्येन्द्र शुक्ला को तत्काल प्रभाव से डीम्ड पीआईओ (जनसूचना अधिकारी) नियुक्त करते हुए आवेदक को 15 दिन में जानकारी देने का निर्देश दिया है. इसके अलावा आरोपी जनसूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया है.

आवेदक का ही कर दिया फर्जी हस्‍ताक्षर
एक और मामले में सुनवाई के दौरान सूचना आयोग को पता चला कि आवेदक के फ़र्ज़ी हस्ताक्षर बना कर रीवा के अधिकारियों ने अपील ही ख़ारिज कर दी. मामला रीवा के जनता कॉलेज से जुड़ा हुआ है. आरटीआई आवेदक टीपी. तिवारी (सेवानिवृत्त प्राध्यापक) ने कॉलेज के प्राचार्य की नियुक्ति से जुड़ी जानकारी मांगी थी. सुनवाई के दौरान अधिकारियो ने बताया की आवेदक ने खुद ही लिखित में जानकारी लेने से मना कर दिया था. बाद में पता चला कि आवेदक का हस्‍ताक्षर ही फर्जी था. सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने रीवा के पुलिस अधीक्षक आबिद खान को पत्र लिख कर मामले की जांच करने का आदेश दिया है.

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First published: May 14, 2019, 8:52 PM IST
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