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अब आंख पर पट्टी बांध कर बच्‍चे पढ़ेंगे अखबार

अब आंख पर पट्टी बांध कर बच्‍चे पढ़ेंगे अखबार

आपकी आंखो में अगर पट्टी बंधी हो और कोई आपसे ये कहे कि अखबार पढ़ो तो चौंकना स्‍वाभाविक है, लेकिन ऐसा हो रहा है रीवा शहर में. यहां पर कई ऐसे बच्चे हैं जो खास तकनीक से आखों को बंदकर वो सब चीजे देख लेते हैं जो हम खुली आंख से देख पाते हैं.

आपकी आंखो में अगर पट्टी बंधी हो और कोई आपसे ये कहे कि अखबार पढ़ो तो चौंकना स्‍वाभाविक है, लेकिन ऐसा हो रहा है रीवा शहर में. यहां पर कई ऐसे बच्चे हैं जो खास तकनीक से आखों को बंदकर वो सब चीजे देख लेते हैं जो हम खुली आंख से देख पाते हैं.

आपकी आंखो में अगर पट्टी बंधी हो और कोई आपसे ये कहे कि अखबार पढ़ो तो चौंकना स्‍वाभाविक है, लेकिन ऐसा हो रहा है रीवा शहर में. यहां पर कई ऐसे बच्चे हैं जो खास तकनीक से आखों को बंदकर वो सब चीजे देख लेते हैं जो हम खुली आंख से देख पाते हैं.

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आपकी आंखो में अगर पट्टी बंधी हो और कोई आपसे ये कहे कि अखबार पढ़ो तो चौंकना स्‍वाभाविक है, लेकिन ऐसा हो रहा है रीवा शहर में. यहां पर कई ऐसे बच्चे हैं जो खास तकनीक से आखों को बंदकर वो सब चीजे देख लेते हैं जो हम खुली आंख से देख पाते हैं.

बच्चों के इस अनोखे ज्ञान के बारे में सुनकर भले ही हैरानी हो रही है पर जब आप भी इन्हें देखेंगे तो आप भी देखकर दंग रह जाएंगे. दरअसल, ब्रेन डेवलमेंट प्रोग्राम के तहत बच्चों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है.

रीवा के एलेनटाउन स्कूल में प्रकाश दि्ववेदी इन बच्चों को ट्रेनिंग दे रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह कोई जादू नहीं है, यह जापानी तकनीक है. विदेश में यह काफी लोकप्रिय है. अब भारत में भी महानगरों में इसका काफी क्रेज है.

मध्य प्रदेश में रीवा से इसकी शुरुआत हुई है. इस तकनीक से बच्चों की बुद्धि को इस तरह विकसित किया जाता है की वो आंख बंद होने के बावजूद भी अपने ज्ञान से सामान्य की तरह ही सब कुछ देख सकते हैं.

मेडिटेशन और कसरत से बच्चों को इस तरह तैयार किया जाता है की वो आंख में पट्टी लगाकर भी सब कुछ पढ़ सकते हैं. इस तकनीक में देखने, सूंघने व त्वचा से छुकर पहचानने की ट्रेनिंग दी जाती है. ट्रेनिंग के बाद बच्चों की सामान्य बच्चों से कई हजार गुना विकास होता है.

ये ट्रेनिंग सिर्फ 5 साल से 15 साल के बच्चों को ही दिया जाता है. चार से पांच दिन की ट्रेनिंग में बच्चा पूरी तरह प्रशिक्षित हो जाता है. स्कूल के प्रबंधन बताते हैं कि जब ये हमारे पास आए इन्होंने मुझे इस तकनीक के बारे में बताया तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ.

जब कुछ बच्चों को आजमाया गया को एक-दो दिन में बच्चे पूरी तरह प्रशिक्षित हो गए. आंख बंद होने के बाद भी पढ़ने लगे, जिसके बाद आज स्कूल के कई बच्चे ट्रेनिंग ले रहे हैं और उनमें काफी विकास हो रहा है. जो बच्चे शांत रहते थे, वही बच्चे अब हर चीज का जबाब फटाफट देते हैं.

एलेनटाउन स्कूल में शुरू हुए इस विशेष ट्रेनिंग को लेकर बच्चों में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. छात्र बताते हैं कि आंखों पर पट्टी बंध जाने के बाद उन्हें कुछ दिखाई नहीं देते, लेकिन उन्हे ऐसा लगता है कि जैसे उनके मस्तिष्‍क में एक तीसरी आंख सी बन जाती है. जिससे उन्हें एकदम साफ दिखाई देने लगता है. इस तकनीक से उन्हें पढ़ाई में काफी फायदा हो रहा है.

इस तकनीक को बच्चे बड़ी आसानी से सीख रहे हैं. खेल-खेल में ही वो इसे सीख जाते हैं. उनका आत्मविस्वास भी बढ़ रहा है. जो छात्र पढ़ाई में पीछे रहते थे, उन्हें इससे बहुत फायदा हो रहा है. कठिन पाठ भी उन्हें आसानी से याद हो जाते हैं और उन्हें कोई परेशानी भी नहीं होती.

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