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अस्पताल के बाहर प्रसवपीड़ा से तड़पती रही महिला, हंगामे के बाद किया भर्ती, जानें क्या बोले अधीक्षक

अस्पताल के बाहर प्रसवपीड़ा से तड़पती रही महिला, हंगामे के बाद किया भर्ती, जानें क्या बोले अधीक्षक

बताया जा रहा है कि अगर महिला को भर्ती करने में जरा सी भी देरी के जाती तो जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी.

बताया जा रहा है कि अगर महिला को भर्ती करने में जरा सी भी देरी के जाती तो जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी.

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से सिस्टम की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. यहां अस्पताल के बाहर एक महिला प्रसव पीड़ा से तड़पती रही लेकिन किसी ने भी उसकी सुध नहीं ली. हालांकि बाद में लोगों के दबाव में आकर अस्पताल प्रबंधन ने महिला को भर्ती कराया और अच्छी तरह से डिलेवरी कराई. अब जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ्य बताए जा रहे हैं.

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अर्पित पांडे, रीवा. शासकीय गांधी मेमोरियल अस्पताल से सिस्टम को शर्मशार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है. जहां पर आज तड़के एक गर्भवती महिला को डीलेवरी के लिए अस्पताल लाया गया था. लेकिन धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टरों ने महिला को अस्पताल में भर्ती करें से इनकार कर दिया. जिसके बाद घंटो दर्द कराहती हुई महिला अस्पताल गेट के बाहर ही जमीन पर लेटी रही. हालाकि स्थानीय लोगों के द्वारा हंगामा करने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने महिला को भर्ती कराया जिसके कुछ देर बाद ही महिला ने बच्चे को जन्म दिया. महिला को भर्ती करने में जरा सी और देर की जाती तो एक बड़ी अनहोनी हो सकती थी.

रीवा गुढ़ तहसील क्षेत्र स्थित ग्राम अमिलिया निवासी राजू कुशवाहा अपनी गर्भवती पत्नी रामवती कुशवाहा को डिलीवरी के लिए आज तड़के 3:00 बजे एंबुलेंस के माध्यम से गांधी मेमोरियल अस्पताल लेकर पहुंचे थे. लेकिन दर्द से कराहती महिला को देख धरती के भगवानों का दिल नहीं पसीजा और उन्होंने पीड़िता को अस्पताल में भर्ती करने से इनकार कर दिया. जिसके बाद दर्द से कराहती गर्भवती महिला अस्पताल गेट के बाहर ही घंटो जमीन पर पड़ी रही.

तभी आस-पास मौजूद लोगों ने मामले पर हस्तक्षेप किया जिसके बाद डाक्टरों ने महिला को अस्पताल में भर्ती किया. महिला को अस्पताल में भर्ती करते ही कुछ देर बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया. बताया जा रहा है कि अगर महिला को भर्ती करने में जरा सी भी देरी के जाती तो जच्चा और बच्चा दोनों की जान खतरे में पड़ सकती थी. फिलहाल डिलीवरी के बाद अब मां और बच्चे दोनो ही सुरक्षित है.

अस्पताल अधीक्षक ने दिया बेतुका बयान

मामले को लेकर अस्पताल के अधीक्षक अवतार सिंह ने बेतुका बयान दिया है. डाक्टरों की लापरवाही को छुपाते हुए अधीक्षक ने कहा कि हमारे द्वारा मामले की जांच पड़ताल की गई थी. महिला लगभग सुबह 3:00 बजे अस्पताल डिलेवरी के लिए पहुंची थी. अस्पताल में इन दिनों बड़ी मात्रा में मरीज है लेवर रूम में क्षमता से अधिक मरीज भर्ती है. एक बिस्तर में दो दो मरीज लेटे हुए हैं एक भी बिस्तर अस्पताल में खाली नहीं है. प्रतिदिन 60 से 70 डिलेवरी की जा रही हैं. बिस्तर उपलब्ध ना होने के कारण ड्यूटी में तैनात चिकित्सकों ने महिला से कहा कि जैसे ही बेड खाली होगा उसे भर्ती कर लिया जाएगा. बाद में डाक्टरों ने महिला की सुरक्षित डिलेवरी करवाई.

मां और बच्चा दोनों ही अब स्वस्थ हैं. इसके अलावा अस्पताल अधीक्षक अवतार सिंह ने लोगों से अपील की है कि जिनकी प्राइमरी डिलेवरी होते है वह जीएमएच अस्पताल आ जाएं लेकिन जिनकी दूसरी या तीसरी डिलेवरी है वह जिले के अन्य जितने भी शासकीय अस्पताल हैं वहां चले जाएं. जहां पर आसानी से उनकी डिलेवरी हो सकती है. इस तरह की घटनाओं से यह साफ होता दिखाई दे रहा है की स्वास्थ महकमा अपनी सेवाए देने में नाकाम साबित हो रहा है. जिसका खामियाजा मासूम जनता को भुगतना पड़ता है. अब देखना यह होगा की मामले पर लापरवाही करने वाले डाक्टरों के खिलाफ प्रशासन क्या कार्यवाही करता है या फिर इसी तरह से सिस्टम को शर्मशार करती तस्वीरें सामने आती रहेगी.

Tags: Madhya pradesh news, Rewa News

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