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जब व्हाइट टाइगर ने रोका पर्यटकों का रास्ता

जब व्हाइट टाइगर ने रोका पर्यटकों का रास्ता

सतना जिले के मुकुंदपुर स्थित टाइगर सफारी में अब बाघ-बाघिन उन्मुक्त होकर तफरीह करते नजर आ रहे हैं.

सतना जिले के मुकुंदपुर स्थित टाइगर सफारी में अब बाघ-बाघिन उन्मुक्त होकर तफरीह करते नजर आ रहे हैं.

सतना जिले के मुकुंदपुर स्थित टाइगर सफारी में अब बाघ-बाघिन उन्मुक्त होकर तफरीह करते नजर आ रहे हैं.

  • Pradesh18
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    सतना जिले के मुकुंदपुर स्थित टाइगर सफारी में पर्यटकों का जत्था उस वक्त पूरी तरह रोमांचित हो गया, जब सफेद बाघिन विन्ध्या पर्यटकों से भरी बस के सामने सड़क पर आराम फरमाती नजर आई.

    जंगल की रानी विन्ध्या काफी देर तक बस के सामने बैठी रही. जिसे पर्यटक बस के अंदर से एकटक निहारते रहे. हालांकि, कुछ देर पश्चात वह सफारी में उन्मुक्त विचरण करने के लिए वहां से चली गई.

    उल्लेखनीय है कि सफेद बाघ-बाघिन के लिए मुकुन्दपुर का प्राकृतिक वातावरण अनुकूल रहा है. मुकुन्दपुर व्हाइट टाइगर सफारी विश्व का ऐसा प्रथम केन्द्र होगा जहां जू, सफारी, रेस्क्यू केन्द्र तथा ब्रीडिंग सेन्टर एक ही स्थान पर होगा.

    रीवा के महाराज पाले थे 'राधा' और 'मोहन'
    विदित हो कि सफेद बाघ की वापसी प्रदेश के विंध्य इलाके के लिए भावनात्मक विषय है. इसकी वजह है कि वर्ष 1951 में विंध्य क्षेत्र में रीवा के महाराज मार्तण्ड सिंह ने एक सफेद बाघ शावक पकड़ा गया था, जिसका नाम मोहन रखा गया.

    इसी सफेद बाघ से बंदी अवस्था में प्रजनन शुरू हुआ. आज जितने भी सफेद बाघ जीवित हैं, वे सभी सफेद बाघ 'मोहन'' और बाघिन ''राधा'' की संतानें हैं.

    मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी में दिखेंगे
    मध्यप्रदेश के लिये यह गौरव की बात है कि केन्द्र एवं मध्यप्रदेश सरकार की पहल के बाद सफेद बाघ एक बार फिर अपने मूल पर्यावास में आबाद हुआ है. रीवा के नजदीक सतना जिले के मुकुंदपुर में विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी बनकर तैयार है.

    इसी सफारी से सफेद बाघ की वापसी हुई है. मुकुंदपुर में विश्व की पहली व्हाइट टाइगर सफारी तथा जू एण्ड रेस्क्यू सेंटर का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है. सफारी के 100 हेक्टेयर क्षेत्रफल में से मुकुंदपुर चिड़िया-घर 75 हेक्टेयर में तथा 25 हेक्टेयर में व्हाइट टाइगर सफारी का निर्माण किया गया है.

    कहां से आया सफेद बाघ
    सफेद बाघ सामान्य बाघ की ही संतान है, लेकिन इसे विलक्षण सफेद रंग मिला है जीन्स के म्यूटेशन से. इसकी कोई अलग प्रजाति नहीं. यह शुद्ध भारतीय बाघ है. सफेद और पीले बाघ एक ही मां की संतान हैं. आदतें, रहवास और व्यवहार एक जैसा होता है और एक जैसी जिन्दगी जीता है. इनकी उम्र 16 से 21 वर्ष तक की होती है.

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