गोडसे वाले विवादित बयान के बाद साध्वी प्रज्ञा ने खुद को दी ये सज़ा

साध्‍वी प्रज्ञा ने कहा था कि नाथूराम गोडसे देशभक्‍त थे, देशभक्‍त हैं और देशभक्‍त रहेंगे. इस बयान पर मोदी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वो साध्वी को कभी माफ़ नहीं कर पाएंगे.

News18Hindi
Updated: May 20, 2019, 1:43 PM IST
गोडसे वाले विवादित बयान के बाद साध्वी प्रज्ञा ने खुद को दी ये सज़ा
साध्वी प्रज्ञा की फाइल फोटो
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Updated: May 20, 2019, 1:43 PM IST
राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी की गोली मार कर हत्‍या करने वाले नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाली साध्वी प्रज्ञा ने माफ़ी मांग ली थी. साध्‍वी प्रज्ञा ने कहा था कि नाथूराम गोडसे देशभक्‍त थे, देशभक्‍त हैं और देशभक्‍त रहेंगे. इसके बाद प्रज्ञा ठाकुर ने सोमवार को ट्वीट कर कहा कि मेरे शब्दों से समस्त देशभक्तों को यदि ठेस पहुंची है तो मैं इसके लिए माफी मांगती हूं और अब वह 21 प्रहर का मौन रखेंगी.

पीएम मोदी ने कहा था कभी माफ़ नहीं कर पाऊंगा


बता दें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर दिए गए विवादित बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया था. एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा था कि वह साध्वी प्रज्ञा को कभी मन से माफ नहीं कर पाएंगे. मोदी ने कहा कि ऐसे सभी बयान पूरी तरह गलत हैं. उन्होंने कहा कि गांधी जी या गोडसे के बारे में बयानबाजी गलत है. उन्होंने कहा कि मैं चाहूं भी तो साध्वी को मन से कभी माफ नहीं कर पाऊंगा.

साध्वी प्रज्ञा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट


नीतीश कुमार ने भी जताया एतराज
बिहार एक सीएम और एनडीए के महत्वपूर्ण पार्टनर नीतीश कुमार ने भी साध्वी के बयान पर कड़ा एतराज जताया था. पटना में वोट डालने के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा के बयान के लिए बीजेपी को उन्हें पार्टी से बाहर करने पर विचार करना चाहिए. नीतीश ने कहा कि महात्मा गांधी को लेकर इस तरह के बयानों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. हालांकि साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ये बीजेपी का अंदरूनी मामला है, लेकिन उनके इस तरह के बयान को लेकर उन्हें पार्टी से निकालने के लिए विचार करना चाहिए. नीतीश ने कहा कि चुनाव में जिस तरह की भाषा का उपयोग किया गया वो लोकतंत्र के लिए ठीक नही है. चुनावी भाषा में मर्यादा होनी चाहिए.

कैलाश सत्यार्थी ने भी पार्टी से निकलने की मांग की थी
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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रेंस फाउंडेशन के संस्थापक कैलाश सत्यार्थी ने भी पिछले दिनों ट्वीट कर कहा था कि नाथूराम गोडसे ने गांधी के शरीर की हत्या की थी, लेकिन साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर जैसे लोग उनकी आत्मा की हत्या के साथ, अहिंसा, शांति, सहिष्णुता और भारत की आत्मा की हत्या कर रहे हैं. गांधी हर सत्ता और राजनीति से ऊपर हैं. बीजेपी नेतृत्व छोटे से फायदे का मोह छोड़कर उन्हें तत्काल पार्टी से निकालकर राजधर्म निभाए.

साध्वी ने बताया था गोडसे को 'देशभक्त'
बता दें भोपाल से बीजेपी  की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ने पहले राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को 'देशभक्त' बताया और विवाद के बाद माफी भी मांग ली.  गुरुवार को प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्‍त बताया था. प्रज्ञा ने कहा था कि 'नाथूराम गोडसे देशभक्‍त थे, देशभक्‍त हैं और देशभक्‍त रहेंगे.' प्रज्ञा ने कहा था कि' नाथूराम गोडसे को आतंकवादी कहने वाले लोग अपने गिरेबां में झांक कर देखें. ऐसे लोगों को इस चुनाव में जवाब दे दिया जाएगा.'

हालांकि देर रात उन्होंने अपने इस बयान पर माफी मांग ली. प्रज्ञा ने ट्वीट किया- 'मैं नाथूराम गोडसे के बारे में दिये गए मेरे बयान के लिये देश की जनता से माफ़ी माँगती हूँ . मेरा बयान बिलकुल ग़लत था. मैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का बहुत सम्मान करती हूं.'

कौन हैं साध्वी प्रज्ञा?
साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड में हुआ था. उनके पिता डॉ. चंद्रपाल सिंह आयुर्वेदिक डॉक्टर थे और प्राकृतिक जड़ी बूटियों से मरीजों का इलाज करते थे. पिता के संघ से जुड़े होने के कारण उनका भी झुकाव संघ और विहिप की ओर हो गया. संघ से जुड़ने के बाद उन्होंने संन्यास ले लिया. इसके अलावा वह भोपाल में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ी रहीं. प्रज्ञा ठाकुर ने इतिहास में एमए किया है. वह विश्व हिन्दू परिषद की महिला शाखा दुर्गा वाहिनी से भी जुड़ी थीं.

गौरतलब है कि 2002 में उन्होंने 'जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति' बनाई. बाद में वह स्वामी अवधेशानंद गिरि के संपर्क में आईं. इसके बाद उन्होंने एक 'राष्ट्रीय जागरण मंच' बनाया. साल 2019 में प्रयागराज कुंभ के अवसर पर उन्हें 'भारत भक्ति अखाड़े' का आचार्य महामंडलेश्वर घोषित किया गया था. अब वह 'महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णचेतनानन्द गिरि' के नाम से जानी जाती हैं. राजनीतिक बयानों के अलावा गोमूत्र के सेवन से कैंसर ठीक करने वाले बयान को लेकर भी उनकी काफी आलोचना की गई थी. 17 अप्रैल 2019 को उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली. पार्टी ने उन्हें लोकसभा चुनाव 2019 में भोपाल से टिकट दिया.

मालेगांव धमाके में आरोपी
29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के मालेगांव में एक बाइक में धमाका हुआ था. एटीएस ने इस ब्लास्ट केस की जांच शुरू की. सबसे पहले जांच की गई कि आखिर बाइक किसकी है? जांच में नाम सामने आया साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का. हालांकि, साध्वी ने दावा किया कि इस बाइक को उन्होंने 2004 में ही बेच दिया था. 24 अक्टूबर 2008 को साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी हुई. 4 नवंबर 2008 को एटीएस ने लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को गिरफ्तार किया. आरोप था कि वह उस अभिनव भारत संगठन से जुड़े थे, जिसने हथियार और गोला बारूद खरीदे, जिसका इस्तेमाल मालेगांव ब्लास्ट में किया गया था.

जुलाई 2009 में स्पेशल कोर्ट ने साध्वी पर मकोका लगाया. 2010 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मकोका जारी रखा, लेकिन 15 अप्रैल 2015 को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को पलटकर मकोका हटा दिया. 25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाईकोर्ट से साध्वी प्रज्ञा को जमानत मिल गई. वह 9 साल तक जेल में रहीं. वह फिलहाल जमानत पर हैं. बाहर आने के बाद साध्वी ने कहा था कि उन्हें लगातार यातनाएं दी गई थीं. उन्होंने 26/11 में शहीद हुए हेमंत करकरे पर भी आरोप लगाए थे कि उन्होंने काफी टॉर्चर किया, जिसकी वजह से उन्होंने श्राप दे दिया था.

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