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लेडी डॉक्टर ने गरीब परिवार के सामने रख दी ये मांग, तड़पते हुए मासूम की हुई मौत

News18 Madhya Pradesh
Updated: February 10, 2019, 3:23 PM IST

ब्रिजेंद्र कुमार अहिरवार ने कहा कि मेरी भाभी (अंशिका की मां) पूरे समय ऑक्सीजन मास्क पकड़कर बैठी रही, लेकिन प्रबंधन ने एक नर्स तक नहीं दी.

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मध्य प्रदेश का सागर संभाग का सबसे बड़ा बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) एक बार फिर सुर्खियों में है. इस बार यहां इलाज कराने पहुंचे मरीज के परिजनों के सामने शिशु रोग विभाग में ड्यूटी में तैनात‌ डॉक्टर ज्योती राउत ने कुछ ऐसी मांग रख दी, जिसे पूरा करना शायद उस गरीब परिवार के बस में नहीं था. डॉक्टर ने पीड़ित के परिजनों से कहा कि एक करोड़ रुपए की वेंटिलेटर मशीन आप के बच्चे के इलाज के लिए चाहिए, आप ला देंगे? डॉक्टरों की लापरवाही और अस्पताल प्रंबधन के पास इलाज के पर्याप्त संसाधन नहीं होने ‌के चलते बच्ची की मौत हो गई. बच्ची को मौत पर लोगों में आक्रोश दिखाई दिया. उन्होंने मामले में दोषी डॉक्टर और जिम्मेदार मेडीकल प्रशासन को बच्ची की मौत का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

दरअसल कर्रापुर निवासी एक साल की आंशिक अहिरवार 8 फरवरी की सुबह घर में खेलते हुए खौलते पानी में जा गिरी. खौलते पानी में गिरने की वजह से बच्ची बुरी तरह से जल गई. बच्ची को परिजनों ने इलाज के लिए बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के बर्न वार्ड में भर्ती कराया. लेकिन यहां इलाज के अभाव में करीब चार घंटे तक मासूम आंशिक दर्द से तड़पती रही. परिजनों ने इस मामले में डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि बच्ची की स्थिति को देखते हुए अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों ने उसे निजी अस्पताल में ले जाने का जोर दिया. लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के चलते बच्ची का वहीं इलाज करने को कहा.

अंशिका के चाचा ब्रिजेंद्र कुमार अहिरवार ने जानकारी देते हुए बताया कि जब हम इलाज के लिए अंशिका को बीएमसी लेकर पहुंचे तो यहां डॉक्टर मौजूद नहीं थी, करीब एक घंटे के इंतजार के बाद जो डॉक्टर आए उन्होंने अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध न होने की बात कहकर शहर के प्राइवेट अस्पताल में जाने को कहा. लेकिन हमारे पास प्राइवेट में इलाज कराने के पैसे नहीं थे. इस पर जब हमने डीन से बात की तो उन्होंने सुविधाएं होने और डॉक्टर उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. लेकिन डीन से शिकायत करने पर डॉक्टर व स्टाफ चिड़ गया और उन्होंने इलाज में लापरवाही बरतना शुरू कर दी.

ब्रिजेंद्र कुमार अहिरवार ने कहा कि मेरी भाभी (अंशिका की मां) पूरे समय ऑक्सीजन मास्क पकड़कर बैठी रही, लेकिन प्रबंधन ने एक नर्स तक नहीं दी. वहीं जब इलाज में लापरवाही की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंचे तो उन्होंने 1 करोड़ का वेंटीलेटर लाने की शर्त रख दी. जिस पर हम खामोश हो गए, क्योंकि अगर हमारे पास इतना ही पैसा होता तो सरकारी अस्पताल में इलाज कराने क्यों आते. मेरी भतीजी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसके साथ जो लापरवाही हुई है, हम उसकी आवाज उठाएंगे.

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First published: February 10, 2019, 3:09 PM IST
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