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Bina : गंभीर अपराधों का गढ़ है यह इलाका, सिर्फ 3 जवानों के भरोसे 19 गांवों के 25000 लोग!

भानगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाली कंजिया चौकी स्टाफ की कमी से बेहाल.

भानगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाली कंजिया चौकी स्टाफ की कमी से बेहाल.

मध्य प्रदेश के सागर ज़िले में भानगढ़ थाना क्षेत्र में एक पुलिस चौकी ऐसी भी है, जहां 19 गांवों की 25 हजार आबादी के लिए स ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट – हेमंत अहिरवार

बीना. मध्यप्रदेश के पुलिस थानों में पर्याप्त स्टाफ न होने की बात तो जगजाहिर है, लेकिन कई चौकियों की तो हालत इतनी खराब है कि वहां नाम मात्र के स्टाफ से काम चल रहा है. बीना की कंजिया चौकी भी उनमें से एक है. यहां तीन पुलिसकर्मी 19 गांवों की सुरक्षा में लगे हैं. स्थिति गंभीर इसलिए भी है कि यह चौकी उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में होने के कारण इलाके में अपराध भी ज्यादा होते हैं. कंजिया चौकी में एक उप निरीक्षक, एक सहायक उप निरीक्षक और एक आरक्षक पदस्थ है.

मैनपावर की बात छोड़ भी दी जाए तो भी सुविधा के नाम पर भी यहां कुछ नहीं है. सुदूर गांवों में यदि घटना, दुर्घटना या कोई विवाद हो जाता है तो विभाग की ओर से दी गई एक मार्शल गाड़ी के जरिए पुलिसकर्मी पहुंचते हैं. गाड़ी भी ऐसी कंडम हालत में है कि 50 से ज्यादा की स्पीड में चले तो पुर्जा-पुर्जा हिल जाए. स्टाफ के लिए आवास न होने के कारण चौकी के एक कमरे में ही ये जवान आराम करते हैं. पुलिसकर्मियों को पानी पीने के लिए स्वयं के खर्चे पर टैंकर बुलाना पड़ता है.

हत्या, बलात्कार के लिए संवेदनशील क्षेत्र

जानकारी के अनुसार कंजिया चौकी में हर साल औसतन 75 जघन्य अपराध पंजीबद्ध होते हैं. अभी तक की स्थिति में देखें तो यहां इस साल अक्टूबर माह तक 55 अपराध पंजीबद्ध हो चुके हैं. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, बलवा, दो गुटों में संघर्ष, बलात्कार, पॉक्सो एक्ट, आदिवासियों के साथ मारपीट और आगजनी जैसे गंभीर मामले शामिल हैं. इसके अलावा 28 मामले गुमशुदगी के भी दर्ज हैं.

भानगढ़ थाना क्षेत्र की बात करें तो यहां एक थाना व दो चौकियों में अभी तक 294 आपराधिक मामले पंजीबद्ध किए गए हैं. कंजिया चौकी में कुल 9 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से केवल तीन लोगों का स्टाफ यहां है. एसडीओपी प्रशांत सुमन का कहना है ये बात सही है कि चौकियों में पर्याप्त बल नहीं है. थाने और चौकियों पर जो भी पोस्टिंग होती है, वह पुलिस अधीक्षक करते हैं. जितना भी बल है, उस हिसाब से तैनाती की जाती है. थाने व चौकियों में बल की कमी की जानकारी समय-समय पर उच्च अधिकारियों को दी जाती है.

Tags: MP Police, Sagar news

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