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सतना के बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 12 दोषी करार, पांच बरी

सतना की भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 12 आरोपियों को दोषी करार दिया. अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, जबकि सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई. वर्ष 1998 के इस बहुचर्चित घोटाले में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया था.

सतना की भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 12 आरोपियों को दोषी करार दिया. अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, जबकि सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई. वर्ष 1998 के इस बहुचर्चित घोटाले में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया था.

सतना की भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 12 आरोपियों को दोषी करार दिया. अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, जबकि सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई. वर्ष 1998 के इस बहुचर्चित घोटाले में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया था.

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    सतना की भ्रष्टाचार निवारण अदालत ने बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में 12 आरोपियों को दोषी करार दिया. अदालत ने पांच आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, जबकि सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो गई. वर्ष 1998 के इस बहुचर्चित घोटाले में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया था.

    अदलात ने दोष सिद्ध आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. आरोपियों के दंड को लेकर फैसला सुरक्षित रखा गया है, जो कल सुनाया जाएगा.

    बहुचर्चित शिक्षाकर्मी  वर्ग दो और तीन में हुए घोटाले का आज 19 साल बाद फैसला आया. अदालत ने 20 आरोपियों में से 12 को जालसाजी, दस्तावेजों में कूटरचना, साक्ष्य नष्ट करने और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में दोषी माना, जिसमे पूर्व सांसद रामानंद सिंह की बहू एवं तत्कालीन मझगवां जनपद पंचायत अध्यक्षा बेला रानी सिंह पटेल, तत्कालीन जनपद सीईओ, सीपीएस चौहान और बीएओ सहित 12 अरोपियों पर जुर्म साबित हुआ है.

    पांच अरोपी जिनमें जनपद पंचायत सदस्य और निचले कर्मचारी शामिल हैं को दोषमुक्त करार दिया गया है. अदालत सजा को सुरक्षित रखते हुये सभी 12 आरोपियों को जेल भेज दिया है.

    दरअसल, 23-09-1995 में लोकायुक्त रीवा ने सतना जिले के मझगवाँ, रामपुर बघेलान अमरपाटन और रामनगर जनपद पंचायत में हुये शिक्षाकर्मी भर्ती में व्यापक भ्रष्टाचार होने पर स्वयं संज्ञान लेते हुये छापा मारा था. मझिगवां जनपद में शिक्षाकर्मी भर्ती हेतु 295 पदों के लिये करीब 1095 आवेदन मागये गये थे, जबकि नियमतः 985 से ज्यादा आवेदन नहीं मागये जा सकते थे. शिक्षाकर्मी भर्ती में अपात्र को पात्र बनाकर खुलेआम पैसों के लेनदेन के आरोप लगे थे.

    छापे के दौरान लोकायुक्त को शिक्षाकर्मी भर्ती में पैसों के लेनदेन के सुबूत मिले थे. मैराथन जांच पड़ताल के बाद लोकायुक्त ने शासकीय और ग़ैरशासकीय 20 अरोपियों के विरुद्ध मामला कायम कर सतना की विशेष अदालत में 25.01.2005 को चालान पेश किया था.

    अदालत में मुकदमा चलने के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिस कारण उनके खिलाफ आगे की सुनवाई में नहीं हुई. लंबे इंतजार के बाद आज इस बहुचर्चित शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले का फैसला आया है.

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