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रैगांव उपचुनाव : बगावत से शुरू हुई चुनावी जंग जातिगत आंकड़ों में उलझी, कौन किस पर पड़ेगा भारी!

रैगांव उपचुनाव : बगावत से शुरू हुई चुनावी जंग जातिगत आंकड़ों में उलझी, कौन किस पर पड़ेगा भारी!

रैगांव विधानसभा उप चुनाव अभियान  बागरी परिवार की बगावत के माहौल में शुरू हुआ था.

रैगांव विधानसभा उप चुनाव अभियान बागरी परिवार की बगावत के माहौल में शुरू हुआ था.

MP by Election : रैगांव के रण के आखिरी समय में मुद्दे गायब हो गए. जातिगत समीकरण साधने हर दल राजनीतिक गोटियां बैठाता नजर आया. भाजपा (BJP) की तरफ से तीन दर्जन विधायक (MLA) अलग अलग समाज में के लोगों के घर घर दस्तक देते रहे. यहां छह मंत्री कमान संभाले रहे. कांग्रेस भी पीछे नहीं रही.

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सतना. रैगांव विधानसभा उपचुनाव (MP by Election) का चुनाव प्रचार खत्म होते होते कई रंग दे गया. अपने अपने प्रत्याशी के समर्थन में दोनों दलों के स्टार प्रचारक प्रचार करने आए. निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी पूरी ताकत झोंक दी. लेकिन बगावत के माहौल से शुरू हुआ चुनाव अभियान जातिगत समीकरण पर आ कर थम गया. मुद्दे हवा हो गए. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी की प्रतिमा बागरी और कांग्रेस की कल्पना वर्मा के बीच है.

रैगांव विधानसभा सीट के लिए धुआंधार प्रचार हुआ. इस दौरान पार्टियों ने अपने प्रचार अभियान में जातीय समीकरणों पर फोकस रखा. दलों ने जो जातीय समीकरण तैयार किये हैं उसके अनुसार रैगांव विधानसभा क्षेत्र के 70 फीसदी मतदाता जाति गत समीकरण में बंटे हुए हैं. विधानसभा में सर्वाधिक मतदाता ब्राह्मण और चौधरी वर्ग के हैं. उन्हें साधने के लिए दोनों दल एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं.

मुद्दे हवा, जाति हावी
रैगांव के रण के आखिरी समय में मुद्दे गायब हो गए. जातिगत समीकरण साधने हर दल राजनीतिक गोटियां बैठाता नजर आया. भाजपा की तरफ से तीन दर्जन विधायक अलग अलग समाज में के लोगों के घर घर दस्तक देते रहे. यहां छह मंत्री कमान संभाले रहे. कांग्रेस भी पीछे नहीं रही. पूरे प्रदेश से नेता रैंगाव की गलियों में चहल कदमी करते रहे और अपने अपने सजातीय मतदाता को लुभाने के प्रयास में रहे.

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ऐसा है समीकरण
बात जातिगत समीकरण की करें तो यहां सबसे ज्यादा ब्राह्मण वोटर हैं. इनकी संख्या 38 हजार है. इसके बाद चौधरी मतदाताओं की संख्या 26 हजार है. जिन जातियों के मतदाता पांच अंक को छू रहे हैं उनमें क्षत्रिय 24 हजार, कुशवाहा 20 हजार, कोल 15 हजार, बागरी 7 हजार, दाहिया साढ़े 5 हजार, विश्वकर्मा 54 सौ, लोधी 4800, प्रजापति 4200, डोहर 4100, कोरी 4100, सेन 3500, साहू 3500, यादव 3300, बंगाली 2900, रजक 2500, पाल 2200, गुप्ता 2200, मुस्लिम 2100, गौड़ 1900, ढीमर 1700, केवट 1700, सोनी 1700, पटेल 1400, नामदेव 1300 शामिल हैं. कुल मिलाकर रैगांव में 70 जातियों के मतदाता हैं जो अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे.

जातिवाद हावी
सतना वो इलाका है जहां यूपी की सीमा होने के कारण जातिवाद हावी रहता है. इसलिए बसपा का यहां असर रहता है. लेकिन इस बार बीएसपी चुनाव में नहीं उतरी है. इसलिए पार्टियों ने जाति वर्ग के अनुसार जो संख्या तैयार की है वह उनके अपने सर्वे के आधार पर है. हालांकि सर्वे की इस संख्या से वास्तविक संख्या में कुछ अंतर हो सकता है. माना जा रहा है कि इस चुनाव में यह आंकड़े काफी मायने रखेंगे. अब इन मतदाताओं के वोट अपने खाते में डलवाने का प्रयास अगले दो दिन ये राजनीतिक दल करेंगे.

Tags: BJP Campaign, Madhya pradesh by election news, Madhya Pradesh Congress, Satna news

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