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पंचायत ने कर दिया 'मुर्दा' घोषित, अब खुद के जिंदा होने की जंग लड़ रही 62 बुजुर्ग महिला, जानिए- पूरा मामला

Shivendra Singh Baghel | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 14, 2019, 5:46 PM IST
पंचायत ने कर दिया 'मुर्दा' घोषित, अब खुद के जिंदा होने की जंग लड़ रही 62 बुजुर्ग महिला, जानिए- पूरा मामला
पिछले 3 सालों से खुद को ज़िंदा साबित करने की लड़ाई लड़ रही हैं सतना की तिरसिया बाई

सतना (Satna) की तिरसिया बाई पिछले 3 सालों से खुद को ज़िंदा दिखाने का संघर्ष कर रही है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत ने उन्हें 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PM Housing scheme) से वंचित रखने कागज़ों में उन्हें मृत घोषित करा दिया है. अब उनकी निराश्रित पेंशन और राशन भी बंद हो गया है.

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सतना. मध्य प्रदेश के सतना ज़िले की ग्राम पंचायत करहीकला ने वृद्ध महिला तिरसिया बाई का नाम सरकार की 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PM Housing scheme) से हटाने के लिए उन्हें कागज़ों में मृत (Dead) घोषित कर दिया. पीड़ित महिला पिछले करीब 3 सालों से खुद को ज़िंदा बताने का हरसंभव प्रयास कर रही है. उन्होंने कितने ही सरकारी विभागों (Government Departments) के चक्कर काटे लेकिन सब कुछ बेनतीजा रहा. अब उन्हें बिना निराश्रित पेंशन (Destitute pension) और सरकारी राशन के गुज़ारा करना पड़ रहा है.

खुद को ज़िंदा साबित करने का संघर्ष 
सतना जिले के उचेहरा जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत करहीकला में इन दिनों एक वृद्ध विधवा महिला अपने आपको जिंदा साबित करने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं. सरकारी रिकॉर्ड में इन्हें करीब 3 साल पहले ही मृत घोषित कर दिया गया है. उन्हें अपनी मौत का पता उस वक्त लगा जब उनकी पेंशन बैंक में आना बंद हो गई, सरकारी दुकान में राशन मिलना बंद हो गया. 62 वर्षीय वृद्ध महिला तिरसिया बाई को पहले तो बैंककर्मी भी कहते रहे कि पेंशन रुकी हुई है तो आ जाएगी. लेकिन जब गांव के लोगों ने उनकी परेशानी देख पेंशन रुकने का कारण पता किया तो जानकारी मिली कि पंचायत सचिव ने रिकॉर्ड में इस महिला को मृत घोषित करते हुए उनकी पेंशन और राशन बंद करा दिया है.

जब ये बात महिला को पता चली तो उन्होंने सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना शुरू कर दिए, हालांकि अभी तक इसका कोई नतीजा नहीं निकल सका है. पीड़ित महिला का कहना है कि, 'मैं जिंदा हूं लेकिन कब तक ये पता नहीं. मेरे पास अब कोई चारा नहीं बचा है. पेंशन में जो रुपए मिलते थे, जिससे आटा और दाल खरीद अपना जीवनयापन कर लेती थी. पता नहीं अब क्या होगा. सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना में घर स्वीकृत गया मगर स्थानीय जनप्रतिनिधि ने साजिश रच कर नाम काट दिया.'

सरकारी योजना से नाम हटाने की साजिश
महिला का आरोप है कि ये सब सरपंच सचिव और रोजगार सहायक का किया धरा है. महिला जिंदा होने का प्रमाण लेकर भटक रही है. वो दफ्तरों में जाती हैं, सरकारी अधिकारियों को अपने जिंदा होने का प्रमाण दिखाती हैं, लेकिन नतीजा सिफर. हालांकि अब इस मामले में जिला पंचायत सीईओ रीतू बाफना ने कहा है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जा रही है. बहरहाल मामला बेहद गंभीर है. प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ से नाम हटाने के लिए इतनी बड़ी साजिश रची गई.

सूत्रों के मुताबिक, ऐसे करीब 18 लोग और हैं जिनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना से नाम काटा गया है. इन्हें गांव का निवासी होने के बावजूद बाहरी बता दिया गया और तिरसिया बाई को मृत. ज़िला पंचायत सीईओ के आश्वासन के बाद इन तमाम लोगों को भी उम्मीद है कि तिरसिया के साथ साथ उन्हे भी न्याय मिलेगा.
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First published: October 14, 2019, 4:52 PM IST
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