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पाकिस्तान के 'हमलावर गैंग' का सतना में इस तरह किया सफाया, रातभर चला ऑपरेशन

टिड्डी दल का सतना में सफाया

टिड्डी दल का सतना में सफाया

ऑपरेशन में अधिकांश टिड्डियों (Grasshopper) की मौके पर मौत हो गयी. जो बचे वो गोविंदगढ़ के रास्ते रीवा की ओर भागे. दोपहर ये बचे खुचे टिड्डी दल रीवा (rewa) जिले के गूढ़ कस्बे के पास देखे गए

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सतना. पाकिस्तान (pakistan) से चले हमलावरों के गैंग (gang) का सतना में घेराबंदी कर सफाया कर दिया गया.हजारों किमी का सफर तय कर पहुंचे लाखों सदस्यों वाला ये गैंग तबाही मचाते हुए विंध्य में दाखिल तो हुआ लेकिन यहां उसका काम तमाम हो गया. सतना जिले के अमरपाटन के पास अहिरगांव में आराम फरमाने ठहरे गैंग के लिए आज का सूरज मौत का पैगाम ले कर आया.

सूरज उगते ही 6 फायर ब्रिगेड ने एक साथ इस गैंग पर हमला बोल दिया. किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाने वाले इस गैंग में अचानक हुए हमले ने भगदड़ मचा दी. लिहाजा कुछ तो गोविंदगढ़ के रास्ते भाग निकले लेकिन बड़ी संख्या में दल के सदस्यों को मार गिराया गया. यहां हम टिड्डी दल की बात कर रहे हैं. जिसने इन दिनों गुजरात और राजस्थान के बाद अब मध्य प्रदेश में धावा बोला हुआ है.गैंग के बाकी टिड्डों को रीवा जिले के गूढ़ के पास दड़बा गांव में देखा गया ,जिनकी घेराबंदी जारी है.

गैंग पर धावा
प्रशासन इनके हमले के प्रति पहले से ही चौकन्ना था. प्रशासन ने टिड्डियों के सफाए के लिए पूरी प्लांनिग की थी. टिड्डी गैंग के पन्ना जिले से सतना बार्डर में प्रवेश करते ही सही समय देख कर उस धावा बोल दिया गया. जिसके बाद टिड्डियों को जान से हाथ धोना पड़ा और गैंग में जो बचे वो भी जिले की सीमा को छोड़ भाग खड़े हुए.

नजर बनाए हुए थीं टीम– कलेक्टर
कलेक्टर अजय कटेसरिया ने पूरे ऑपरेशन के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि टिड्डी दल के मूवमेंट पर कृषि विभाग के अधिकारी और वैज्ञानिक नजर रखे हुए थे. उचित समय और स्थान देख कर ऑपरेशन शुरू किया गया और जिले के किसानों की फसल को नुकसान से बचा लिया गया.

रात भर चला रेस्क्यू
टिड्डियों को मौत के घाट उतारने के लिए कृषि विभाग की टीम माकूल जगह और समय की तलाश में थी. देर शाम टिड्डियों का एक दल अमरपाटन के अहिरगाव में रात्रि विश्राम के लिए ठहरा लेकिन उन्हें यहीं उन्हें मार दिया गया.

ऐसे हुआ मिशन पूरा
प्रशासन को अंदाज था कि पाकिस्तानी गैंग जिले की फसलें बर्बाद कर देगा. लिहाजा सतना जिले के बार्डर में प्रवेश करते ही अमला सक्रिय हो गया. पहले तो हवा का रुख भांपा गया. फिर इसी अनुसार नागौद से टिड्डियों के समूह का पीछा किया गया. कृषि वैज्ञानिकों को अंदाज था कि टिड्डी रात में विश्राम के लिए कहीं न कही रुकेंगी और हुआ भी यही. अमरपाटन के अहिरगांव में आम और यू केलिप्टिस के पेड़ों को अपना ठौर बनाया. इसके बाद रात में प्लानिंग की गई कि कैसे इन्हें ख़त्म करना है. इसके लिए सतना, रीवा और अमरपाटन से कुल 6 फायर बिग्रेड मंगाए गए. उसमें केमिकल को पानी में मिलाया गया. सुबह 4 बजे टीम मौके पर पहुँची. सुबह सवा 5 बजे ऑपरेशन टिड्डी शुरू किया गया. फायर बिग्रेड की तेज बौछारें और केमिकल की मदद से एक गैंग पर चौतरफा हमला कर दिया गया.

गोविंदगढ़ के रास्ते भागे
ऑपरेशन में अधिकांश टिड्डियों की मौके पर मौत हो गयी. जो बचे वो गोविंदगढ़ के रास्ते रीवा की ओर भागे. दोपहर ये बचे खुचे टिड्डी दल रीवा जिले के गूढ़ कस्बे के पास देखे गए.

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