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विश्व स्तरीय खिलाड़ी का दर्द, सुविधाओं की कमी से हो रहा टैलेंट का नुकसान

News18 Madhya Pradesh
Updated: October 11, 2019, 2:26 PM IST
विश्व स्तरीय खिलाड़ी का दर्द, सुविधाओं की कमी से हो रहा टैलेंट का नुकसान
सतना की विशेषता सिंह का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दो बार दर्ज हो चुका है

गिनीज बुक (Guinness Book of World Record) में दर्ज सतना (Satna) की खिलाड़ी विशेषता सिंह का कहना है कि सुविधाओं (Facilities) की कमी से राज्य का टैलेंट हतोत्साहित हो रहा है. उनके कोच का भी मानना है कि नेता खिलाड़िय़ों की तारीफ करते हैं, सुविधाओं के लिए वादे भी करते हैं वो वादे अब तक सियासी साबित हो रहे हैं.

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सतना. आधुनिक युग में लिंग भेद को लेकर चली आ रही धारणा खत्म होती नजर आ रही है. लड़कियां (Girls) किसी भी मायने में लड़कों से कम नहीं हैं. लड़कियां न केवल माता पिता का सहारा बन रही हैं बल्कि परिवार और देश का नाम भी रोशन कर रही हैं. 'नेशनल गर्ल चाइल्ड डे' (National girl Child Day) के मौके पर सतना की विशेषता सिंह (Visheshta singh) के संघर्ष और जज़्बे को उनके कोच और सतना के लोग याद कर रहे हैं. विशेषता सिंह ने न केवल स्केटिंग (Skating) में दो बार गिनीज बुक (Guinness Book) में नाम दर्ज कराया है बल्कि स्केटिंग प्रतियोगिताओं में कई मेडल हासिल कर प्रदेश और देश का नाम भी रोशन कर चुकी हैं. नाम मात्र सुविधाओं के साथ स्केटिंग सीखकर विशेषता आज लोगों की प्रेरणास्त्रोत हैं. हालांकि उन्हें लगता है कि सुविधाओं की कमी नए टैलेंट को सामने आने से रोक रही है

नए स्केटर्स तैयार करने में परेशानी
सतना की विशेषता सिंह के नाम 96 घण्टे लगातार स्केटिंग करने का एकल रिकार्ड गिनीज बुक में दर्ज है. उपलब्धियों की बात करते हुए उन्होंने सुविधाओं की कमी का भी ज़िक्र किया. विशेषता ने कहा कि सतना में स्केटिंग ट्रैक न होने के बावजूद जान जोखिम में डाल कर उन्होंने गड्ढों से भरी सतना की सड़कों पर स्केटिंग की और आज इस मुकाम तक पहुंचीं हैं. हालांकि उनका कहना है कि सुविधाओं की कमी से नए स्केटर्स तैयार करने में उन्हें परेशानी आ रही है. विशेषता ने बताया कि उनकी अगुवाई में दर्जनों लड़के लड़कियां स्केटिंग का हुनर सीख रहे हैं.

सुविधाओं की कमी

परिजन और कोच बच्चों की उपलब्धियों से खुश हैं. उन्होंने बताया कि विशेषता ने कई बार वर्ल्ड रिकार्ड की बराबरी की है. हालांकि उन्हें लगता है कि एक दिन संसाधनों की कमी उनके मार्ग में बाधक बन सकती है. कोच ने बताया कि स्केटिंग के लिए सतना में एक स्केटिंग ट्रैक भी नहीं है. क्लास खत्म होने के बाद बच्चे एक निजी कॉलेज ग्राउंड पर प्रैक्टिस करते हैं. अकसर जान जोखिम में डालकर विशेषता और बच्चे सतना की सड़कों पर भी लॉंग स्केटिंग की प्रैक्टिस करते हैं जो कि जोखिम भरा है. उन्होंने बताया कि बड़े नेता, मंत्री इन प्रतिभाओं के हुनर का लोहा तो मानते हैं, सुविधाएं मुहैया कराने का आश्वासन भी देते हैं लेकिन हर बार उनका वादा सियासी ही साबित होता है.

(सतना से शिवेंद्र सिंह)

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First published: October 11, 2019, 2:24 PM IST
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