सतना लोकसभा सीट: हारे विंध्य में जीत तलाश रही कांग्रेस

कांग्रेस ने अब यहां दोबारा कब्जा जमाने के प्लान पर काम तेज कर दिया है. कभी देश के दिग्गज अर्जुन सिंह के कब्जे वाली इस सीट पर बीते डेढ़ दशक से बीजेपी का भगवा लहरा रहा है

News18Hindi
Updated: February 12, 2019, 6:39 PM IST
सतना लोकसभा सीट: हारे विंध्य में जीत तलाश रही कांग्रेस
सतना
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Updated: February 12, 2019, 6:39 PM IST
लोकसभा चुनावों की तैयारी तेज है. मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के बाद सरकार भले ही कांग्रेस ने बनाई थी लेकिन विंध्य इलाके में बीजेपी ने उसे करारी मात दी थी. कांग्रेस ने अब यहां दोबारा कब्जा जमाने के प्लान पर काम तेज कर दिया है. कभी देश के दिग्गज अर्जुन सिंह के कब्जे वाली इस सीट पर बीते डेढ़ दशक से बीजेपी का भगवा लहरा रहा है.

विंध्य इलाके की सबसे अहम सीट सतना, जो सीमेंट हब के लिए मशहूर है. लेकिन यहां की सियासी हललच हमेशा से प्रदेश और देश के लिए चर्चित रही है. कभी यहां कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह ने जीत का परचम लहराया था लेकिन अब यहां के सियासी समीकरण कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के अनुकूल है और बीजेपी यहां से लगातार तीन पर बार कब्जा जमाए हुए है.



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बीजेपी के सांसद गणेश सिंह यहां भगवा का झंडा बुलंद किए हुए है. सांसद गणेश सिंह अब अपनी लोकसभा को विकसित बता रहे है. सांसद की मानें तो बिजली, पानी, सड़क से लेकर औद्योगिक विकास में उनकी लोकसभा में अभूतपूर्व काम हुए हैं और जहां कमी है उसे भी जल्द दूर कर लिया जाएगा.

सतना की सियासी तस्वीर पर नजर डालें तो..
-सतना में पहला लोकसभा चुनाव साल 1967 में हुआ
-पहले चुनाव में कांग्रेस के डीवी सिंह को जीत मिली
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-अगले चुनाव में जनसंघ के नरेंद्र सिंह जीते
-1977 में के चुनाव में भारतीय लोकदल ने बाजी मारी
-1980 में कांग्रेस ने यहां पर वापसी की और गुलशेर अहमद जीते
-1984 में कांग्रेस के अजीज कुरैशी जीते
-1989 में बीजेपी के सुखेंद्र सिंह सांसद बने
-1991 में अर्जुन सिंह ने जीत का परचम लहराया
-1996 में बसपा के सुखलाल कुशवाहा यहां से जीते
-1998 में बीजेपी ने वापिसी की और अब ये सीट बीजेपी के कब्जे में है

बीजेपी का इस सीट पर खासा प्रभाव है और यहीं कारण है कि बीएसपी ने बीजेपी और कांग्रेस के पहले यहां से अपना प्रत्याशी अच्छे लाल कुशवाहा को घोषित कर दिया है. वहीं विधानसभा चुनाव की तरह सांसद के खिलाफ भी इस बार स्थानीय नाराजगी साफ दिख रही है.

सतना लोकसभा सीट पर 6 बार बीजेपी, 4 बार कांग्रेस, 1 बार बसपा और 1 बार भारतीय जनसंघ ने जीत दर्ज की है. सतना लोकसभा में आने वाली सात विधानसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी और दो पर कांग्रेस का कब्जा है. 2014 के चुनाव में बीजेपी के गणेश सिंह ने अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह को हराया था. इस चुनाव में गणेश सिंह को 3,75,288 वोट मिले थे तो वहीं कांग्रेस के अजय सिंह को 3,66,600 वोट मिले थे. यानि की अजय सिंह की 8,688 वोटों से हार हुई थी.

इस बार भी अजय सिंह इस सीट से दावेदार हैं हालांकि विधानसभा चुनाव में हार झेल चुके अजय सिंह का कहना है पार्टी जहां से टिकट देगी वो चुनाव लड़ेंगे. सतना लोकसभा में जातिगत समीकरण खासे असरदार होते है.

सतना सीट के जातीय समीकरण पर नजर डालें तो
- सतना की मतदाता संख्या संख्या 14,47,395 है
-पुरुष मतदाता संख्या 8,06175 और महिला मतदाता 6,41220 मतदाता है
-इसमें ब्राहम्णों की संख्या 3 लाख 24 हजार
-क्षत्रिय 1 लाख 11 हजार
-पटेल 1 लाख 23 हजार पटेल
-कुशवाहा 1 लाख 13 हजार
-वैश्य 65 हजार
-अनुसूचित जाति के 1 लाख 47 हजार
-अनुसूचित जन जाति के 1 लाख 37 हजार
-मुस्लिम मतदाता 37 हजार है...
यानि कि 47 प्रतिशत सवर्ण, 38 फीसदी ओबीसी और 13 फीसदी मतदाता एससी, एसटी के हैं.

सीमेंट उद्दोग के हब के रुप में देश में पहचान ऱखने वाले सतना में बेरोजगारी और पिछड़ापन बड़ी समस्या है. सतना का पश्चिमी इलाका पानी की समस्या से जूझ रहा है. स्वास्थ्य सेवाओं में कोई बडा़ विस्तार नही हुआ है. कुपोषण अब भी समस्या बना है. मेडिल कालेज का ऐलान हो चुका है लेकिन ये सिर्फ भूमिपूजन तक सीमित हो कर रह गया है. मजदूरों की समस्या पीएम आवास योजना में हुई बंदरबाट बड़ा चुनावी मुद्दा है. इस बार सतना किसका होगा. ये देखना दिलचस्प होगा.
(इनपुट- सतना से शिवेंद्र बघेल और भोपाल से अनुराग श्रीवास्तव)

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