एमपी का काला सच, सतना में 70 प्रतिशत प्रेग्नेंट महिलाएं एनीमिया का शिकार
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एमपी का काला सच, सतना में 70 प्रतिशत प्रेग्नेंट महिलाएं एनीमिया का शिकार
कुपोषण का कलंक झेल रहा सतना जिला अब महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद आए आकड़ो में उलझ गया है

कुपोषण का कलंक झेल रहा सतना जिला अब महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद आए आकड़ो में उलझ गया है

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कुपोषण का कलंक झेल रहा मध्य प्रदेश का सतना जिला अब महिलाओं और किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य परीक्षण के बाद आए आकड़ो में उलझ गया है. ताजे आंकड़े के तहत जिले के आंगनबाड़ियों में दर्ज हुई गर्भवती महिलाओ में से 70 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं.

दरअसल, महिला बाल विकास विभाग ने जिले में गर्भवती और किशोरी बालिकाओं का स्वस्थ परीक्षण कराया. जिले के 3034 आंगनवाड़ी केंद्रों में 45 हजार गर्भवती और धात्री महिलाएं पंजीबद्ध हुई इन महिलाओं में से 70 प्रतिशत महिलाएं रक्त अल्पता से पीड़ित मिलीं.

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति आदिवासी परिवारों की स्थिति बेहद खराब है. यही स्थिति किशोरी बालिकाओं में जांच के बाद सामने आई हैं. रक्त अल्पता की वजह से जिले में बच्चों में कुपोषण हो रहा है. धात्री महिलाएं बच्चो को पौष्टिक आहार में दूध नही पिला पा रही तो गर्भवती महिलाएं कुपोषित बच्चों को जन्म दे रही हैं.
इस समस्या के निदान के लिए सतना जिले में भी लालिमा अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही हैं.



महिला बाल विकास के मानें तो आंगनवाड़ियों में समय-समय पर बच्चों के साथ-साथ महिलाओं और किशोरी बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और हरी सब्जी के साथ-साथ विटामिन सी से भरपूर पोषण आहार खाने के लिए जागरूक किया जा रहा है.
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