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शक्तिपीठ मैहर : आल्हा ऊदल ने खोजा था मां का मंदिर, आदि शंकराचार्य ने शुरू की थी पूजा

Satna ki Khabar. सतना जिले के मैहर में स्थित शारदा देवी का मंदिर देश में स्थापित 52 शक्तिपीठों में से एक है.

Satna ki Khabar. सतना जिले के मैहर में स्थित शारदा देवी का मंदिर देश में स्थापित 52 शक्तिपीठों में से एक है.

इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है. ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर आल्हा खंड के नायक आल्हा ऊदल दो सगे भाई मां शारदा के अनन्य ...अधिक पढ़ें

सतना. मध्यप्रदेश के सतना जिले में स्थित मैहर धाम विश्व प्रसिद्ध है. यह मां भवानी के 52 शक्तिपीठों में से एक है. आदि शक्ति मां शारदा देवी का मंदिर मैहर नगर के पास विंध्याचल पर्वत श्रेणियों के मध्य त्रिकूट पर्वत पर स्थित है. मान्यता है मां शारदा की पहली पूजा आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी. मैहर में हर वर्ष शारदेय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि में मेला लगता है. दूर दूर से देवी भक्त अपनी अपनी मुराद लेकर पहुचंते हैं.

मान्यता है मां शारद ने कलयुग में अपने भक्त की भक्ति से प्रसन्न होकर आल्हा को अमरता का वरदान दिया था. कहा जाता है कि आज भी मां शारदा की पहली पूजा आल्हा देव ही करते हैं. दूर दूर से देवी भक्त मां के दिव्य दर्शन करने यहां आते हैं.

मंदिर पहुंचने के रास्ते
मैहर पर्वत का नाम प्राचीन धर्म ग्रंथों में मिलता है. इसका उल्लेख पुराणों में भी आया है. मां शारदा देवी के दर्शन के लिए 1063 सीढ़िया चढ़कर पहुंचते हैं. यहां पर प्रतिदिन हजारों दर्शनार्थी दर्शन करने आते हैं. भक्त सड़क मार्ग से भी पहुंच सकते हैं. 2007 से रोपवे की सुविधा उपलब्ध है.

मंदिर का इतिहास
इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती भगवान शिव से विवाह करना चाहती थी. लेकिन उनकी इच्छा राजा दक्ष को मंजूर नहीं थी. फिर भी सती ने अपनी जिद से भगवान शिव से विवाह कर लिया. एक बार राजा दक्ष ने यज्ञ करवाया. उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु इंद्र और अन्य देवी देवताओं को आमंत्रित किया. लेकिन यज्ञ में भगवान शंकर को नहीं बुलाया. यज्ञ स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित ना करने का कारण पूछा. इस पर राजा दक्ष ने भगवान शंकर को अपशब्द कहे. अपमान से दुखी होकर माता सती ने यज्ञ अग्नि कुंड में कूद कर अपने प्राणों की आहुति दे दी.

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52 शक्तिपीठों की कहानी
भगवान शंकर को जब इस बारे में पता चला तो क्रोध से उनका तीसरा नेत्र खुल गया. ब्रह्मांड की भलाई के लिए भगवान विष्णु ने सती के शरीर को 52 भागों में विभाजित कर दिया. जहां भी सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठों का निर्माण हुआ. ऐसा माना जाता है यहां पर माता सती का हार और कंठ गिरा था. इसलिए इस जगह को माई का हार यानि मैहर कहा जाता है. 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ मैहर मां शारदा देवी के मंदिर को माना गया है.

राजपरिवार पुजारी
त्रिकूट पर्वत की चोटी पर ये मंदिर लोगों की आस्था का क्रेंद बन चुका है. देश विदेश से यहां माई के भक्त हर दिन पहुंचते है. यह मंदिर दसवीं सदीं में प्रकाश में आया और सबसे पहले आदि गुरू शंकराचार्य ने पूजा अर्चना शुरू की थी. बाद में ये मंदिर मैहर राजघराने के आधिपत्य में आया और फिर मैहर राजपरिवार के पुजारी को मंदिर के पूजा अर्चना का कार्य सौंपा गया. राज परिवार की पांचवी पीढ़ी आज पूजा अर्चना कर रही है. हालांकि मंदिर का संचालन सरकार के अधीन हो चुका है. इसके प्रशासक जिला कलेक्टर हैं. शारदा प्रबंध समित मंदिर का संचालन कर रही है और इस मंदिर में प्रधान पुजारी राज परिवार के बड़े पुत्र होते हैं. उनकी मंदिर की आय में 33 प्रतिशत की हिस्सेदारी रहती है.

आल्हा-ऊदल की खोज
इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी है. ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर आल्हा खंड के नायक आल्हा ऊदल दो सगे भाई मां शारदा के अनन्य उपासक थे. महोबा से आकर आल्हा ऊदल ने ही सबसे पहले जंगल के बीच मां शारदा देवी के इस मंदिर की खोज की थी. इसके बाद आल्हा ने इस मंदिर की तलहटी में 12 साल तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था. माता ने उन्हें प्रसन्न होकर अमर होने का आशीर्वाद दिया था.

आल्हा की कुलदेवी का मंदिर
मां शारदा मंदिर प्रांगण में स्थित फूलमती माता का मंदिर आल्हा की कुल देवी का है. विश्वास किया जाता है कि प्रति दिन ब्रम्ह मुहूर्त में स्वयं आल्हा यहां मां की पूजा करते हैं. मंदिर की तलहटी में आज भी आल्हा देव के अवशेष हैं. यहां आल्हा मंदिर है और आल्हा ऊदल का अखाड़ा भी. आल्हा मंदिर में उनकी तलवार और खड़ाऊ आम भक्तों के दर्शन के लिए आज भी रखी गई है. आल्हा तालाब भी है जिसे प्रशासन ने संरक्षित किया है. सूचना बोर्ड में भी इस तालाब के एतिहासिक और धार्मिक महत्व का वर्णन है. समय समय पर यहां आल्हा पाठ भी होता है.

साल में दो बार मेला
यहां साल में दो बार शारदेय नवरात्रि औऱ चैत्र नवरात्रि में नौ दिन का भव्य मेला लगता है. इस वर्ष चैत्र नवरात्रि मेला लगा और अब शारदेय नवरात्रि मेला शुरू हो गया है. प्रतिदिन एक लाख से ज्यादा देवी भक्त यहां पहुंचते हैं. भक्त मंदिर परिसर में अपनी मन्नतों का रक्षा सूत्र बांधते हैं. मन्नत पूरी होने पर धोक देने परिवार सहित आते हैं.

Tags: Madhya pradesh latest news, Navratri Celebration

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