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20 साल पहले मर चुके किसानों के नाम पर कर्ज बांटने का मामला, जांच के लिए पहुंची टीम

दुरेहा सहकारी बैंक में करोड़ो के भ्रष्टाचार का मामला न्यूज़ 18 में प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी किए हैं.

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कमलनाथ सरकार के किसान कर्जमाफी में एक के बाद एक बड़े भ्रष्टाचार उजागर हो रहे हैं. कुछ दिन पहले सतना जिले की दुरेहा सहकारी बैंक में करोड़ो के भ्रष्टाचार का मामला न्यूज़ 18 में प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार ने जांच के आदेश जारी किए हैं. शुक्रवार को जिला प्रशासन की पांच सदस्यीय जांच टीम दुरेहा पहुंची और प्राथमिक जांच पड़ताल शुरू की. प्रारंभिक जांच में करोड़ो के घोटाले के प्रमाण मिले हैं, जिसमें बीस वर्ष पहले मृत किसानों के नाम पर जालसाजी करके कर्ज निकाले गए थे. प्रशासन ने रविवार शाम तक जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को भेजने का दावा कर रही है.

सतना के दुरेहा सेवा सहकारी बैंक में 1686 किसान कर्जदार हैं. इन कर्जदार किसानों का नाम पंचायत में सार्वजनिक किया गया है. नाम सार्वजनिक होने पर कई किसानों के पैर से जमीन खिसक गई. कर्जदार किसानों की सूची में करीब 100 किसान ऐसे थे जो इस दुनिया मे ही नहीं हैं, फिर भी वे कर्जदार हैं. 1686 किसानों में 850 ऐसे किसान मिले जिन्होंने कर्ज बहुत कम लिया लेकिन उनके नाम पर लाख रुपए से ऊपर कर्ज दर्ज किया गया है. कुछ किसान भूमिहीन हैं, मगर यहां वो भी कर्जदार की सूची में है शामिल हैं.

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दुरेहा सहकारी बैंक में हुए घोटाले की खबर न्यूज़ 18 में प्रकाशित व प्रसारित हुई तो राज्य सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए. जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर किसानों के बयान कलमबंद किए हैं. किसान परेशान है कि सोसाइटी में भारी भरकम ऋण उनके नाम से निकाला गया. सरकार की घोषणा सिर्फ 2 लाख तक कर्जमाफी की है, ऐसे में उनका कर्ज राशि ज्यादा होने पर उन्हें इस योजना का लाभ नही मिल पायेगा.

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मामले में समित प्रवन्धक मुलायम सिंह का तर्क है कि उनकी अनुपस्तिथि में ये सूची बनाई गई, जो लिपकीय त्रुटि की वजह से गलत हो गई है. ये सूची एकाउंटेंट अभिषेक सिंह ने बनाई जबकि जांच टीम के सामने एकाउंटेंट ने कहा कि वे कभी समित में आए ही नहीं और न ही प्रबंधक ने उन्हें कोई काम ही दिया था. पूरे घोटाले का दोष उनके सर लादा जा रहा जो गलत है.

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