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STF ने कसा शिकंजा, हथियार माफियाओं के खिलाफ 75 FIR दर्ज
Satna News in Hindi

Puja Mathur | News18Hindi
Updated: February 22, 2020, 11:23 PM IST
STF ने कसा शिकंजा, हथियार माफियाओं के खिलाफ 75 FIR दर्ज
ये मामले साल 2004 से 2016 तक के हैं. मामलों की जांच एसटीएफ कर रही है. (Demo Pic)

एसटीएफ की स्पेशल टीम ने सतना जिले में कैंप लगाकर लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड जांचे तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. लंबे समय से प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस का दुरुपयोग कर कारतूस की कालाबाजारी कर अवैध कार्रवाइयों को अंजाम देने की आशंका व्यक्त की जाती रही है.

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  • Last Updated: February 22, 2020, 11:23 PM IST
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भोपाल. मध्यप्रदेश में अब हथियार माफियाओं पर एसटीएफ ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सतना जिले में हथियार माफियों के खिलाफ अब तक कुल 75 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं. चरणबद्ध हुई एसटीएफ की इस कार्यवाही में पहले चरण में 25 एफआईआर दर्ज की गईं. दूसरे चरण में 50 और मामले दर्ज किए गए. एसटीएफ एडीजी अशोक अवस्थी ने बताया कि सतना जिले में शस्त्र लाइसेंस की कालाबाजारी और उनके फर्जीवाड़े का मामला विधानसभा में उठा था. इस मामले में सरकार ने जांच के निर्देश दिए थे.

गंभीर अपराधिक अनियमितताएं आईं सामने
एसटीएफ की स्पेशल टीम ने सतना जिले में कैंप लगाकर लाइसेंस से जुड़े रिकॉर्ड जांचे तो चौंकाने वाले खुलासे हुए. लंबे समय से प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस का दुरुपयोग कर कारतूस की कालाबाजारी कर अवैध कार्रवाइयों को अंजाम देने की आशंका व्यक्त की जाती रही है. जांच में जो मिला वो इस प्रकार है-




  • शासन की अनुमति के बिना विधि विरुद्ध सीमा क्षेत्र का बढ़ाना

  • बिना शासन के आदेश के कारतूसों की संख्या में वृद्धि

  • दीगर प्रदेश के व्यक्तियों को लाइसेंस जारी किया जाना

  • दीगर प्रदेश के शस्त्र लाइसेंस का पंजीयन और नवीनीकरण जिला सतना में किया जाना

  • बिना अनुमति शस्त्र लाइसेंस की द्वितीय प्रति तैयार किया जाना


दूसरे चरण की कार्यवाही में अवैध तरीके से शस्त्र लाइसेंस देने के मामले में एसटीएफ ने 50 और मामले दर्ज किए हैं, ये सभी सतना जिले के हैं. सतना के शस्त्र शाखा के तत्कालीन सहायक ग्रैड 2 के प्रभारी युगल किशोर मामले के मुख्य आरोपी हैं. युगल ने 50 लोगों को अवैध तरीके से लाइसेंस जारी किया था. इससे पहले एसटीएफ ने 25 मामलों में पहले भी एफआईआर दर्ज की थी.

कारतूस की कालाबाजारी और जारी हुए कारतूस से अपराध होने की भी आशंका है. ये मामले साल 2004 से 2016 तक के हैं. मामलों की जांच एसटीएफ कर रही है. इन मामलों की जांच पहले भी कराई जा रही थी. साल 2016 में टेक्निकल कारण बताकर कमिश्नर के कहने पर ये जांच रोक दी गई थी.एसटीएफ के एडीजी अशोक अवस्थी ने बताया की कई हिस्ट्रीशीटर को भी लाइसेंस जारी हुए हैं. एसटीएफ हर एंगल से मामले की तहकीकात कर रही है. मामले का मुख्य आरोपी युगल किशोर फिलहाल फरार है.

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First published: February 22, 2020, 11:23 PM IST
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