मेडिकल सांइस पर भारी है अंधविश्‍वास, झाड़-फूंक के लिए बच्‍चे का शव कब्र से निकाला

Shivendra Singh Baghel | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 2, 2019, 8:13 PM IST
मेडिकल सांइस पर भारी है अंधविश्‍वास, झाड़-फूंक के लिए बच्‍चे का शव कब्र से निकाला
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन खमोश है. (सांकेतिक फोटो)

मध्‍य प्रदेश के सतना जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पवैया गांव में अंधविश्‍वास का खेल चल रहा. 31 अगस्‍त को नवजात को डॉक्‍टर्स द्वारा मृत घोषित करने के बाद दफना दिया गया था और अब उसे वहां से निकाल कर ओझाओं से इजाल कराया जा रहा है.

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मध्‍य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सतना (Satna) में अंधविश्‍वास (Superstition) का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. जी हां, यहां मेडिकल साइंस के दावे को दरकिनार कर एक आदिवासी परिवार (Tribal Families) ईश्वरीय चमत्कार की आश में भटक रहा.

दरअसल, मामला सतना जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पवैया गांव का है. जहां अंधविश्‍वास और ओझाओं के चक्कर में फंसकर कर दो दिन पूर्व मृत नवजात के शव को कब्र से निकाला और अब पूरा परिवार मृत नवजात को जीवित मान कर झाड़ फूंक करा रहा. नवजात की लाश को सीने से लगाए मां पिछले की काफी समय से भटक रही है और उसे अभी भी विश्वास है कि उसका बच्चा जीवित है. हैरानी की बात है कि पूरा गांव इस घटना को चमत्कार मान रहा. जबकि असलियत है कि बच्चे में जान नहीं है और उसकी लाश सड़ रही है.

जिला प्रशासन है खमोश
इस पूरे मामले में जिला प्रशासन खमोश है. जबकि प्रशासन को इस मामले में हस्तक्षेप कर अंधविश्‍वास के इस खेल पर लगाम लगाना चाहिए. झाड़ फूंक का खेल अभी भी जारी है और परिवार नवजात के शव को लिए चमत्कार की प्रतीक्षा कर रहा.

सतना जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पवैया गांव में अंधविश्‍वास का खेल चल रहा. लोकेश की पत्नी शीला को 29 अगस्त को कोटर सामूदायिक स्वास्थ क्रेंद में प्रशव हुआ. नवजात प्रीमैच्योर था और हालात गंभीर होने पर नवजात को सतना जिला अस्पताल लाया गया जहां 31 अगस्त को डॉक्‍टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिवार वालों ने नवजात के शव को ले जाकर दफना दिया, लेकिन दो दिन बाद शव को फिर कब्र से बाहर निकाल लिया गया. मृतक नवजात की मां ने दवाब बनाया कि उसका बच्चा जीवित है और झाड़ फूंक कराने से पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा. बच्‍चे की मां सपने में देखी बात को सच मान बैठी और झाड़ फूंक कराने लगी. इस दौरान तमाशबीनों की भीड़ लगी और सब के सब इसे चमत्कार मान बैठे.

ओझाओं से करा रहे हैं झाड़ फूंक
अंधविश्वास के चंगुल में फंसे परिजन लाश कब्र से निकाल कर ओझाओं से झाड़ फूंक करा रहे. वह कभी मोबाइल से तो कभी घर ले जाकर ऐसा कर रहे हैं. जबकि तेज बरसात में नवजात का शव लेकर भटक इस परिवार को रोकने वाला कोई नहीं है. सब लोग चमत्कार पर भरोसा कर रहें और विज्ञान की बात को नकार रहे हैं. यही नहीं, तीन दिन पुरानी नवजात की लाश सफेद पड़ रही और अभी भी तंत्र मंत्र जारी है, तो तमाशबीनों का हुजूम लगा हुआ. हालांकि अब कुछ लोग दबी जुबान में नवजात की मौत के सच का स्‍वीकार करने लगे हैं.
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जांच के बाद जारी हुआ था मृत्यु प्रमाण
इस पूरे मामले में जांच के बाद ही नवजात को 31 अगस्त को मृत माना गया और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया गया. इसके बाबजूद अंधविश्वास के चलते दो दिन बाद नवजात को जिंदा बताकर पिछले काफी समय से अंधविश्‍वास का खेल चल रहा है. इस दौरान ना तो कोई समाज का व्‍यक्ति सामने आया है और ना ही प्रशासन कोई दखल देने को तैयार है.

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First published: September 2, 2019, 8:08 PM IST
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