होम /न्यूज /मध्य प्रदेश /Shardiya Navratra: इस मंदिर में सूर्य की दिशा के साथ बदलता है मां का स्वरूप

Shardiya Navratra: इस मंदिर में सूर्य की दिशा के साथ बदलता है मां का स्वरूप

Satna News: मां कालका देवी की महिमा अपरंपार है, हमारी सभी मनोकामनाएं मां पूर्ण करती हैं.

Satna News: मां कालका देवी की महिमा अपरंपार है, हमारी सभी मनोकामनाएं मां पूर्ण करती हैं.

Satna News: एमपी के सतना जिले में दशकों पुराना एक ऐसा प्रसिद्ध मंदिर जहां मां कालका देवी की अद्भुत प्रतिमा है. मां के म ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- प्रदीप कश्यप

सतना. मध्य प्रदेश के सतना जिले में दशकों पुराना एक ऐसा प्रसिद्ध मंदिर जहां मां कालका देवी की अद्भुत प्रतिमा है. इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां विराजमान मां कालका देवी के सूर्य की दिशा के अनुरूप नेत्र का स्वरूप बदलता है, यहां साल के दोनों नवरात्रि में भक्तों का मेला लगता है. यहां जो भी भक्त अपनी मन्नत लेकर आता है, मां कालका उसकी मन्नतें पूरी करती है. जानिए क्या है देवी की महिमा.

बता दें कि सतना जिला मुख्यालय से महज 13 किलोमीटर दूर अमरपाटन रोड स्थित भटनवारा ग्राम में मां कालका देवी का एक ऐसा अद्भुत प्रसिद्ध मंदिर जहां सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, वैसे तो आपने कई माता मंदिर देखे होंगे लेकिन इस मंदिर की खासियत जानकर आप दंग रह जाएंगे, जी हां इस मंदिर की खासियत यह है कि मां कालका देवी प्रतिमा करीब 700 से 800 साल पुरानी है, यहां भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है, मां कालका देवी अद्भुत प्रतिमा में सूर्य की दिशा के अनुरूप उनके नेत्रों का स्वरूप बदलता है.

मां कालका देवी प्रतिमा की खासियत
अपने वैष्णो देवी, मैहर, मां शारदा देवी के श्रंगार और स्वरूप को देखा होगा, ऐसे ही एक मां कालका देवी की अनोखी प्रतिमा जो अपने आप में प्रसिद्ध प्रतिमा मानी जाती है. मां की तस्वीरों को देखिए जो करीब 700 से 800 वर्ष पुरानी है. ग्राम भटनवारा में स्थित मंदिर में मां कालका देवी विराजमान है, इन्हें कोलकाता में विराजमान देवी की बहन कालका का स्वरूप माना जाता है. बताया गया की यह प्रतिमा गांव में करारी नदी के पास थी, ऐसा माना जाता है कि इस गांव के राजा मनन सिंह को यह प्रतिमा करारी नदी के किनारे मिली थी.

नवरात्रि पर श्रद्धालुओं की उमड़ती है भीड़
तब उन्होंने नदी के किनारे एक छोटा सा मंदिर बना कर मां की प्रतिमा को स्थापित करने का प्रयास किया था, लेकिन ऐसी मान्यता है कि मां ने उस मंदिर में प्रवेश नहीं किया. अंत में बिना मंदिर के ही मां की प्रतिमा नदी के किनारे रखी रही. करीब 70 दशक में मां की प्रतिमा नदी के पास बनी मंदिर में लाई गई, और मां कालका तब से यहां पर विराजमान हो गई, तब से लेकर आज तक मां कालका देवी की पूजा-अर्चना के लिए भक्त यहां आने लगे. और शनैः शनैः मंदिर का उन्नयन होता गया और यहां साल के चैत्र और शारदीय दोनों नवरात्रि में श्रद्धालुओं का मेला लगने लगा.

श्रद्धालुओं की मान्यता
मां के मंदिर की महिमा के बारे में जब भक्त सोनल अरोरा ने बताया कि यह मां का बहुत पुराना प्रसिद्ध मंदिर है. यहां हम लोग हर साल नवरात्रि के समय आते हैं, माता सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. उन्होंने कहा कि यहां माता के नेत्रों का स्वरूप सूर्य की दिशा के जैसे बदलता रहता है, मां कालका देवी की महिमा अपरंपार है, हमारी सभी मनोकामनाएं मां पूर्ण करती हैं.

क्या हैं इस मंदिर की किवदंती
लोगों की मानें तो यह मूर्ति मौर्य- शुंग वंश कालीन है. कई बार पुरातत्व विभाग के अधिकारी लोग यहां आए हैं, उन्होंने बताया था कि यह मूर्ति यक्षिणी है. यहां के पुजारी का कहना है कि देवी मां के नेत्र सूर्य की दिशा के अनुरूप बदलते हैं. जो अपने आप में अद्भुत स्वरूप है.

यह परिवर्तन पूर्व से पश्चिम की ओर होता है, जिससे मां के चेहरे के भाव में भी परिवर्तन देखने को मिलता है, मां कभी वात्सल्य, कभी रौद्र तो कभी एकदम शांत भाव में दिखती हैं.

Tags: Durga Puja festival, Hindu Temples, Mp news, Navratri festival, Satna news

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें