यूरिया की किल्लत से किसान परेशान, ब्लैक में खाद खरीदने पर मजबूर

मार्कफेड का 33 करोड़ का बिल बकाया है, लेकिन कमजोर वित्तीय स्थिति के चलते सहकारी समिति यह भुगतान करने में सक्षम नहीं है. ऐसे में 45 समितियों को उधार में खाद नहीं दी जा रही. किसान या तो ब्लैक में खाद खरीद रहा है या फिर अन्य सोसायटियों में दो बोरी खाद के लिए लंबी कतार लगाए खड़ा है.

Shivendra Singh Baghel | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 19, 2019, 12:20 PM IST
यूरिया की किल्लत से किसान परेशान, ब्लैक में खाद खरीदने पर मजबूर
यूरिया में खाद के लिए कतार में लगे किसान
Shivendra Singh Baghel
Shivendra Singh Baghel | News18 Madhya Pradesh
Updated: January 19, 2019, 12:20 PM IST
मध्य प्रदेश के सतना में एक बार फिर किसानों के सामने यूरिया खाद की समस्या आ खड़ी हुई है. फसल की सिंचाई के बाद किसानों को खाद की आवश्यकता होती है, लेकिन सतना में किसान खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं. कहने को को सतना में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन सहकारी समिति और मार्कफेड के वित्तिय घालमेल के चलते जिले के किसान के आगे खाद संकट खड़ा हो गया है. मार्कफेड कंपनी ने सहकारी समितियों द्वारा पिछला भुगतान नहीं करने पर क्रेडिट पर खाद नहीं दे रही है, जिसके चलते खाद का पर्याप्त भंडारण नहीं होने के बावजूद खाद के लिए किसान संघर्ष कर रहा है.

सतना जिले के किसानों का हाल कुछ ऐसा है कि ’करे कोई और भरे कोई’. किसानों को सहकारी समितियों की मनमानी का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. सहकारी समिति द्वारा खाद का भुगतान न होने के चलते अब मार्कफेड ने समितियों को खाद देना बंद कर दिया है. नतीजा किसानों को कालाबजारी कर खाद खरीदना पड़ रहा है. मार्कफेड का 33 करोड़ का बिल बकाया है, लेकिन कमजोर वित्तीय स्थिति के चलते सहकारी समिति यह भुगतान करने में सक्षम नहीं है. ऐसे में 45 समितियों को उधार में खाद नहीं दी जा रही. किसान या तो ब्लैक में खाद खरीद रहा है या फिर अन्य सोसायटियों में दो बोरी खाद के लिए लंबी कतार लगाए खड़ा है.



सतना के किसान खाद के लिए सहकारी समितियों पर ही निर्भर है, लेकिन सहकारी समिति और मार्कफेड के लेन-देन में खाद का वितरण न के बराबर है. सतना कलेक्टर सतेंद्र सिंह की माने तो जिले के किसानों के लिए खाद का पर्याप्त भंडारण है. ऐसे में किसानों के खाद की कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि किसानों को धैर्य से काम लेना होगा. जिले में लक्ष्य से ज्यादा खाद किसानों को दिया जा चुका है और वर्तमान में खाद का पर्याप्त भंडारण भी प्रशासन के पास मौजूद है. किसानों को गेहूं सहित अन्य फसलों के लिए खाद की आवश्यकता है, लेकिन एक आधार कार्ड से दो बोरी खाद मिलने से किसानों में काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है.

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