दावा : सीहोर जिले में अनूठी अदालत लगाकर किया जाता है सर्पदंश का इलाज

अनूठी अदालत में पीड़ित को पकड़कर बैठे हैं लोग और कांसे की थाली बजाकर किया जा रहा मंत्रोचार.
अनूठी अदालत में पीड़ित को पकड़कर बैठे हैं लोग और कांसे की थाली बजाकर किया जा रहा मंत्रोचार.

पंडा नन्नू गिरी के मुताबिक, प्राचीनकाल से ही इस स्थल पर मंगलबाबा नाम के संत यह पेशी लगाते आए हैं. उन्होंने ही यह विद्या फिर ग्रामीणों को सिखलाई. यहां वैसे महिला-पुरुष आते हैं जिन्हें कभी सांप ने काटा हो.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 15, 2020, 7:52 PM IST
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सीहोर. सीहोर (Sehore) जिला मुख्यालय से महज 6 किलोमीटर की दूरी पर भोपाल-इंदौर बाइपास रोड पर ग्राम लसूड़िया परिहार में दीपावली (Diwali) के दूसरे दिन यानी पड़वा को सांपों की अनूठी अदालत लगती है. गांव में बने हनुमान जी की मढ़िया में यह अदालत लगती है. गांव के पंडा नन्नू गिरी के मुताबिक, प्राचीनकाल से ही इस स्थल पर मंगलबाबा नाम के संत यह पेशी लगाते आए हैं. उन्होंने ही यह विद्या फिर ग्रामीणों को सिखलाई. यहां वैसे महिला-पुरुष आते हैं जिन्हें कभी सांप ने काटा (snakebite) हो. इस अनूठी अदालत में जिले और प्रदेशभर से सर्पदंश पीड़ित लोग सम्मिलित होते हैं.

सरजू बाई की जुबानी, अदालत की कहानी

इस अदालत में पहुचीं ग्राम नवाब खजुरी से आए सर्पदेंश पीड़ित सरजू बाई बताती हैं कि यह मेला वर्ष में एक बार लगता है. यहां पीड़ितों का निःशुल्क इलाज किया जाता है. सर्पदंश पीड़ितों को मंत्रोच्चार के इलाज के बाद एक धागा बांधा जाता है, जिसे बंधेज कहते हैं. दीपावली की पड़वा पर बंधेजधारी महिला-पुरुष को सांपों की इस अनूठी पेशी में आना पड़ता है. यहां के पंडे कांसे की उल्टी थाली को विशेष प्रकार के मंत्रोच्चार के साथ बजाते हैं. ऐसा करने से सर्पदंश पीड़ित महिला-पुरुष के शरीर में सिहरन होने लगती है उनके शरीर में सर्प की आत्मा का प्रवेश होने लगता है. फिर इस अदालत में उनसे सवाल-जबाब होने लगते हैं. शरीर में आए सांप से फिर न काटने का और परेशान न करने का वचन लिया जाता है. तब कहीं जाकर सांप को और सर्पदंश पीड़ित को राहत मिलती है.



फिलहाल इलाज की जिम्मेवारी पंडा नन्नूगिरी गोस्वामी पर
सांपों से इलाज का यह काम फिलहाल नन्नूगिरी गोस्वामी कर रहे हैं. दीपावली की पड़वा को कांसे की उल्टी थाली रखकर चंग बजाई जाती है. मंत्रोच्चार किए जाते हैं. नीम की पत्ती के साथ सरसों के दाने सर्पदंश पीड़िता पर फेंके जाते हैं. नन्नूगिरी स्वामी का मानना है कि ऐसा करने से सर्प इनके शरीर में प्रवेश कर जाता है. हाथ की हथेली में अगूठे और अंगुली के बीच का हिस्सा एक सड़सी से दबाया जाता है. फिर सर्प से वचन लिए जाते हैं और फिर मिलती है उसे मुक्ति.
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