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मार्शल आर्ट्स में सीहोर कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर को मिला येलो बेल्ट, 8 साल की बेटी भी कर रही ट्रेनिंग

Sehore News: सीहोर कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर अपनी 8 साल की बेटी को मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग करवा रहे हैं.

Sehore News: सीहोर कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर अपनी 8 साल की बेटी को मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग करवा रहे हैं.

Sehore News: सीहोर कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर (Collector Chandramohan Thakur) का मानना है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती. उन्हें मार्शल आर्ट्स में यलो बेल्ट मिला है. इतना ही नहीं कलेक्टर अपनी 8 साल की बेटी अभिलाषा को भी आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग करवा रहे हैं.

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Pradeep Chouhan 

सीहोर. कहते है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है. मगर सीहोर के कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने अपनी तमाम व्यस्तताओं के बीच मार्शल आर्ट का न केवल प्रशिक्षण ले रहे हैं, बल्कि एक विद्यार्थी की तरह अपने जीवन की  मार्शल आर्ट्स की पहली यलो बेल्ट प्राप्त की. बात यही नहीं खत्म हो जाती है. कलेक्टर अपनी 8 साल की बेटी अभिलाषा को भी आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग करवा रहे हैं. दरअसल सीहोर के कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर भारतीय प्रशासनिक सेवा के साल 2012 के तेजतर्रार अधिकारी के रूप में अपने नवाचार को लेकर लगातार सुर्खियों में रहे हैं. ऐसे में उन्होंने मार्शल आर्ट्स के प्रति लगाव के चलते यह चाहा कि वह अपनी 6 साल की बेटी अक्षरा को इसका प्रशिक्षण दिलवाए.

जब वह अपनी बेटी को लेकर नगर में चलने वाली मार्शल आर्ट्स की अकेडमी पहुंचे तो उन्होंने निर्णय लिया कि वह भी इसमें भाग लेंगे और ब्लैक बेल्ट की परीक्षा उत्तीर्ण करेंगे. बस फिर क्या था, उन्होंने मार्शल आर्ट्स की अकेडमी में एक विद्यार्थी के रूप में अपनी नन्ही बेटी के साथ हर रोज दो घण्टे पसीना बहाना शुरू कर दिया.

कलेक्टर और उनकी बेटी करते हैं प्रैक्टिस 

कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर का मानना है कि मार्शल आर्ट्स एक ऐसा खेल है जिसमें मेहनत के साथ हम किसी भी विपरीत परिस्थिति में आई मुश्किलों में अपनी आत्मरक्षा कर सकते है. उनका सोच है कि जिस तरह से महिलाओं के प्रति अपराध में बढ़ोतरी हो रही है. उसे कम करने का एक ही तरीका है कि महिलाओं को छोटी उम्र से ही मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग दिलवाई जाए. कलेक्टर वह एक स्टूडेंट बनकर दो घण्टे कठोर शरीर पिघलाने वाली ट्रेनिंग करते है फिर खुद इन स्टूडेंट को मोटिवेशन बढ़ाने के लिए उनसे चर्चा करते है.

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देश की सबसे कठिन और हाई प्रोफाइल भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास करके सीहोर में कलेक्टर बनकर सेवा दे रहे साल 2012 बैच के चंद्रमोहन ठाकुर का मानना है कि उन्हें लगा कि मुझे मार्शल आर्ट्स में ब्लैक बेल्ट  प्राप्त करनी है. यह स्वप्न को जब सीहोर में ही पूरा करने का मौका मिल तो इस विधा से तत्काल जुड़ गए. आज अपने जीवन की पहली यलो बेल्ट की परीक्षा उत्तीर्ण करके मन प्रसन्न है, मार्शल आर्ट्स अकेडमी के संचालक भी कहते है कि इतने बड़े पद पर बैठकर, .इतनी व्यस्तताओं के बीच भी मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग लेकर कलेक्टर का यह संदेश है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती है.

Tags: Mixed martial arts, Mp news, Sehore news

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