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MP : सीहोर की गोशालाओं में चारा घोटाला! ग्रामीणों ने की नसरुल्लागंज के सीईओ से शिकायत

जब खुल चुकी हैं गोशालाएं तो शहर की सड़कों पर क्यों भटक रहे हैं आवारा पशु.

जब खुल चुकी हैं गोशालाएं तो शहर की सड़कों पर क्यों भटक रहे हैं आवारा पशु.

जांच इस बात की हो रही है कि कहीं बंद पड़ी इन गोशालाओं में चारे के नाम पर आवंटित राशि में कोई गोलमाल तो नहीं किया गया है. इन गोशाला में कई महीने से कोई गोवंश नहीं है. ग्रामीणों का आरोप है कि जब वह अपनी बूढ़ी गाय वहां छोड़ने जाते हैं, तो उन्हें बहाने बनाकर भगा दिया जाता है.

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सीहोर. एक बार फिर चारा घोटाले का जिन्न बाहर निकला है. लेकिन इस बार मामला मध्य प्रदेश का है. मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के नसरुल्लागंज ब्लॉक में संचालित 18 गोशालाओं में चारा घोटाले की शिकायत सामने आई है. इस शिकायत के बाद जिला पंचायत विभाग सक्रिय होकर इन गोशालाओं में चारा घोटाले की जांच में लग गया है.

दरअसल, मध्य प्रदेश गो-संवर्धन बोर्ड की पहल पर प्रदेश के अन्य जिलों की तरह सीहोर के भी अलग-अलग ब्लॉक में गोशालाएं खोली गईं. ऐसे में जिले के नसरुल्लागंज ब्लॉक में संचालित 18 गोशालाओं में से फिलहाल 3 गोशाले में पशुओं की सेवा हो रही पा रही है, जबकि लगभग आधे से ज्यादा आज भी निर्माणाधीन हैं. ऐसे में ग्रामीणों द्वारा भेजी गई गड़बड़ी की शिकायत के बाद जनपद पंचायत विभाग सक्रिय होकर इन शिकायतों की जांच करने में जुट गया है.

जांच इस बात की हो रही है कि कहीं बंद पड़ी इन गोशालाओं में चारे के नाम पर आवंटित राशि में कोई गोलमाल तो नहीं किया गया है. इन गोशाला में कई महीने से कोई गोवंश नहीं है. ऐसे में ग्रामीणों का आरोप है कि जब वह अपनी बूढ़ी गाय को वहां छोड़ने जाते हैं, तो उन्हें रटे-रटाये बहाने बनाकर भगा दिया जाता है.

निमोटा गांव के रहनेवाले रामदीन के साथ साथ इन गोशालाओं में काम पर रखे गए कर्मचारी भी आरोप लगाते दिखे कि उन्हें हर महीने मानदेय नहीं दिया जाता है. अगर दिया जाता है तो राशि टुकड़ों में दी जाती है. वहीं चौकीदार तके सिंह ने बताया कि उन्हें दो माह से मानदेय नहीं मिला है.

ग्रामीणों की शिकायतों के बाद भी जिम्मेदार प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. कार्रवाई न किया जाना अपने आप में एक गंभीर मामला है. जब सरकार के द्वारा गोरक्षा को लेकर लाखों रुपयों की लागत से गोशालाओं का निर्माण करवाया गया है और गोवंश के चारे के लिए प्रशासन द्वारा गायों की संख्या के आधार पर राशि प्रदान की जाती है, तो फिर भी ग्रामीण अंचलों में बूढी और बीमार गोवंश की सड़कों पर उपस्थिति इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार को नए सिरे से इन गोशालाओं की भूमिका को लेकर ठोस रणनीति बनानी होगी. नसरुल्लागंज के सीईओ वृदावन सिंह मीना यह कहते दिखे कि जांच की जा रही है. अगर कोई भी दोषी मिला तो सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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