बात ही कुछ ऐसी है कि सीएम शिवराज भी यहां आने से डर गए

प्रदेश के सात मुख्यमंत्रियों का यही अनुभव रहा है. बात शुरू होती है 1961 में मध्य प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू से और ख़त्म होती है 2003 में दिग्विजय सिंह तक.

Pradeep Singh Chouhan | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 12, 2018, 3:54 PM IST
बात ही कुछ ऐसी है कि सीएम शिवराज भी यहां आने से डर गए
शिवराज सिंह चौहान. (File Photo: PTI)
Pradeep Singh Chouhan | News18 Madhya Pradesh
Updated: October 12, 2018, 3:54 PM IST
सीहोर ज़िले का इछावर विधानसभा क्षेत्र ऐसा है जहां से सीएम शिवराज सिंह चौहान ने दूरी बनाए रखी. दरअसल इस क्षेत्र से एक अंधविश्वास जुड़ा हुआ है. कहते हैं जो भी सीएम यहां आता है, बस उसके हाथ से सत्ता फिसल जाती है.

ये अंधविश्वास सिर्फ ऐसे ही नहीं है. अगर गौर करें तो एक नहीं प्रदेश के सात मुख्यमंत्रियों का यही अनुभव रहा है. बात शुरू होती है 1961 में मध्य प्रदेश के तीसरे मुख्यमंत्री कैलाश नाथ काटजू से और ख़त्म होती है 2003 में दिग्विजय सिंह तक.

कैलाश नाथ काटजू इछावर आए और उन्हें 6 माह में पद से हटना पड़ा था. उसके बाजद 1967 में आए पं.द्वारका प्रसाद मिश्र, 1979 में वीरेंद्र सखलेचा, 1985 में अर्जुन सिंह, 1988 में मोती लाल वोरा, 1990 में पं. श्यामाचरण शुक्ल और फिर 2003 में दिग्विजय सिंह यहां आए. नतीजा सामने है. कुछ ऐसा इत्तिफाक हुआ कि सबके हाथ से बारी-बारी सत्ता जाती रही. कुल मिलाकर मध्य प्रदेश के सात मुख्यमंत्री इस श्रापित मिथक के शिक
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