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MP में आज भी मशहूर 'मामा शकुनी' का खेल, होता है राज्‍य स्‍तरीय टूर्नामेंट

चौसर के खेल का महाभारत में है जिक्र.
चौसर के खेल का महाभारत में है जिक्र.

महाभारत (Mahabharata) में चौसर खेल का जिक्र मिलता है, जो कि मामा शकुनी (Shakuni) को खासा पसंद था. करीब 5000 साल पुराना यह खेल मध्‍य प्रदेश के सिवनी (Seoni) में आज भी खेला जाता है, जिसमें प्रदेश के तकरीबन सभी जिले भाग लेते हैं. यह प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता के तौर पर पहचाना रखता है.

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सिवनी. मध्‍य प्रदेश के सिवनी (Seoni) के कान्हीवाड़ा में चौसर की प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की गई है. जी हां, चौसर बेहद ही प्राचीन खेल है और इसका जिक्र आपने पहले पौराणिक गाथाओं (Mythological Stories) में देखा और सुना होगा. सिवनी के कान्हीवाड़ा और आस-पास के इलाकों में इस खेल की बड़े स्तर में प्रतियोगिता हर साल आयोजित की जाती है और इस खेल में किस्मत आजमाने दूर-दूर से लोग आते हैं. चौसर को बरकरार रखने की कोशिश यहां के ग्रामीण युवा करते आ रहे हैं. एक बार फिर इस खेल की बिसात बिछाई गई है और लोग यहां अपने हाथ आजमाने पहुंच रहे हैं. सच कहा जाए तो युवाओं ने महाभारत (Mahabharata) के मामा शकुनी (Shakuni) की यादों को कायम रखा है.

महाभारत में था ये खास खेल
इस खेल की झलकियां देखते ही किसी को भी महाभारत के अहम किरदार कौरवों का मामा शकुनी की याद आ जाएगी. इस खेल में शकुनी को महारत हासिल थी. वैसे यह चार खिलाड़ियों के बीच खेले जाने वाला खेल है. इसमें तीन पासे जिनमें 18 अंक तक के दाने (पॉइंट) होते हैं. चार-चार अलग-अलग रंगों की कुल 16 गोटियां होती हैं और खिलाड़ी अपनी गोटियां 64 खाने के बोर्ड में दौड़ाता है. जो खिलाड़ी चौसर बोर्ड के मुख्य घर में सबसे पहले अपनी गोटियों को ले जाता है वह विजेता बनता है.

तब हुई थी शुरुआत
मामूली से दिखने वाले इस खेल की शुरुआत राजा नल ने पांच हजार साल पहले की थी. पहले इस खेल को देवी देवता अपने मनोरंजन के लिए खेला करते थे और फिर जैसे ही युग आगे बढ़ा तो यह मनोरंजन का खेल जुए में बदल गया. महाभारत मे इस खेल का उल्लेख है और यह पांडवों का राजपाठ खोने और द्रौपदी का चीरहरण का कारण बना था. तब से यह खेल बदनाम है. यह वक्त के साथ आगे बढ़ा और फिर इस खेल को राजशाही खेल के रूप में दो देशों के राजाओं महाराजाओ के बीच खेला जाने लगा. फिलहाल यह खेल ग्रामीण इलाकों में बड़ी रुचि से खेला जाता है. कई इलाकों में इस खेल को प्रतियोगिता के तौर पर भी खेला जा रहा है, जो वाकई दिलचस्प है.



बहरहाल, सिवनी के कान्हीवाड़ा ग्राम में आयोजित इस प्रदेश स्तरीय चौसर प्रतियोगिता में मप्र के सभी जिलों से खिलाड़ियों को आमन्त्रित किया गया है. इस बार लोगों की रुचि को बढ़ाने के लिए तगड़ा इनाम भी रखा गया है और लोगों की इस आदत ने आज भी शकुनी को जिंदा रखा हुआ है.

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