VIDEO : सर्दी ने दिया न्योता तो सरहद पार से चले आए पंखवाले मेहमान
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प्रवासी पक्षी सेंट्रल एशिया के लद्दाख जम्मू-कश्मीर, चीन, तिब्बत और रूस से हर साल यहां आते हैं. इस बार रडेशियल डक (सुरखाब), बार रेडेडगीज, पिनटेल, पोचार्ड्स फ्लाई केचर्स यहां आए हैं.

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रंग-बिरंगे सुंदर पंछी हज़ारों मील का फासला तय कर मध्यप्रदेश पहुंच चुके हैं. सिवनी के पेंच अभयारण्य और चंबल नदी के किनारे हज़ारों प्रवासी पंछी डेरा डाले हुए हैं. इनका कलरव और सौंदर्य लोगों को भा रहा है.

गुलाबी सर्दी शुरू होते ही नवंबर में साइबेरियन माइग्रेट्री बर्ड्स का यहां पहुंचना शुरू हो गया था. इनके झुंड के झुंड यहां पहुंचे. प्रवासी पक्षियों के यहां आने से चंबल की सुंदरता तो बढ़ी ही है साथ ही यहां का वातावरण भी काफी मनमोहक हो गया है.

पक्षियों की चहल पहल ने चंबल के वातावरण को सुंदर बना दिया है. चंबल के रामेश्वर घाट के पास सबसे ज़्यादा पंछी डेरा डाले हैं. यहां इंडियन स्कीमर,वारह डगडीडड, सुरखाव,पिंटेर,फ्लेमिंग गो, जो चार सायवेरिया प्रजाति के पंछियों को देखा जा सकता है.



यही नज़ारा सिवनी के पेंच नेशनल पार्क और आसपास की झीलों का है. यहां भी झील-तालाबो के किनारे खूबसूरत परिंदे डालों पर बैठे हैं. हर साल की तरह बड़ी संख्या में पक्षियों ने अपनी यहां आमद दी है. पेंच के आस पास सीताघाट और महादेवघाट पेंच टाइगर रिजर्व के खूबसूरत इलाकों में शुमार हैं. इन पंछियों का कलरव सुनने और अठखेलियां देखने के लिए रोज लोग पहुंचते हैं.



ये प्रवासी पक्षी सेंट्रल एशिया के लद्दाख जम्मू-कश्मीर, चीन, तिब्बत और रूस से हर साल यहां आते हैं. इस बार पेंच और आस पास के इलाकों में ज़्यादातर रडेशियल डक (सुरखाब), बार रेडेडगीज, पिनटेल, पोचार्ड्स फ्लाई केचर्स प्रजाति के पक्षी आए हैं. लेकिन जो पक्षी सबसे खास है उसका नाम सुरखाब यानि रडेशियल डक और बार रेडेडगीज.इस वक्त करीब 325 प्रजाति के पंछी यहां है. सर्दी के रुख़सत होते ही ये भी यहां से विदा ले लेंगे. (श्योपुर से दीपक दंडोतिया के साथ सिवनी से अज़हर खान की रिपोर्ट)

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