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कात्यायनी देवी के इस मंदिर में मनोकामना पूरी होने पर भक्त रखते हैं ज्योति कलश

सिवनी षष्ठी देवी मां कात्यायनी देवी का मंदिर
सिवनी षष्ठी देवी मां कात्यायनी देवी का मंदिर

शादी-विवाह, संतान और कुंडली दोष दूर करने के लिए नवरात्रि की षष्ठी पर भक्त मन्नत लेकर यहां आते हैं. पूजा के बाद कात्यायनी देवी की मूर्ति का श्रृंगार कराते हैं. मनोकामना पूरी होने पर वो नवरात्रि में यहां आते हैं और मंदिर में ज्योति कलश स्थापित करते हैं.

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सिवनी.सिवनी (seoni)के बंडोल में षष्ठी कात्यायनी देवी (katyayni devitemple)का अलौकिक और प्रतापी मंदिर है. इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा जगत गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद (swaroopanand)ने की थी. इस मंदिर का अलग ही आध्यात्मिक महत्व है. श्रद्धालु नवरात्रि में इस मंदिर में कलश स्थापित करते हैं. यह सिलसिला वर्षो से चला आ रहा है.

बंडोल के इस  मंदिर में वैसे तो सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है. लेकिन नवरात्रि में तो मेला लग जाता है. भक्तों को दर्शन के लिए अपनी बारी का इंतज़ार करना पड़ता है. यहां आने वाले श्रद्धालुओं में देश-विदेश के लोग शामिल रहते हैं.

मंदिर की विशेषता- मंदिर की एक विशेषता यह भी है कि जब से मंदिर बना है तब से इसके गर्भगृह दो अखण्ड ज्योति प्रज्जवलित हैं. ऐसी आस्था है कि इन ज्योति के प्रकाश को देखने मात्र से ही मनोकामना पूरी हो जाती है. लोग यहां मन्नत पूरी होने पर ज्योति कलश स्थापित करते हैं. इस बार भी मंदिर परिसर में करीब 451 मनोकामना ज्योति कलश स्थापित कराए गए हैं. मंदिर में स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ विदेश से भी यहां आते हैं.



मनोकामना का मंदिर-शादी-विवाह, संतान और कुंडली दोष दूर करने के लिए नवरात्रि की षष्ठी पर भक्त मन्नत लेकर यहां आते हैं. पूजा के बाद कात्यायनी देवी की मूर्ति का श्रृंगार कराते हैं. मनोकामना पूरी होने पर वो नवरात्रि में यहां आते हैं और मंदिर में ज्योति कलश स्थापित करते हैं.
ये भी पढ़ें-सलकनपुर: 400 साल पुराने इस मंदिर में जोत स्वरूप में भी होती है देवी की पूजा

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