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मानसून आने से बदइंतजामी की खुली पोल, खरीदी केंद्र में अंकुरित हुआ अनाज

भीगने से बोरियों में यूं अंकुरित हो रहा अनाज
भीगने से बोरियों में यूं अंकुरित हो रहा अनाज

सिवनी में पहली बारिश ने ही मंडियों और अनाज खरीदी केन्द्रों में फैली बदइंतजामी की हकीकत सामने लाकर रख दी. सिवनी के घंसौर खरीदी केंद्र में ख़रीदा गया अनाज पहली ही बारिश में भीग जाने के बाद नमी पाकर अंकुरित हो गया.

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सिवनी में पहली बारिश ने ही मंडियों और अनाज खरीदी केन्द्रों में फैली बदइंतजामी की हकीकत सामने लाकर रख दी. सिवनी के घंसौर खरीदी केंद्र में ख़रीदा गया अनाज पहली ही बारिश में भीग जाने के बाद नमी पाकर अंकुरित हो गया. कई जगह अनाज सड़ तक गया है. किसानों का कहना है कि खरीदी केंद्र प्रबन्धन और मार्केटिंग सोसायटी द्वारा खरीदी केन्द्रों में किसानों को किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं दी जाती है. इसके अलावा खरीदी के बाद ख़रीदे गए अनाज की सुरक्षा भी नहीं की जा रही है.

इसका नतीजा है कभी किसानो का अनाज चोरी हो जाता है या फिर खुले आसमान में रखे होने के कारण बारिश आने पर भीग कर सड़ जाता है.वहीं इस पूरे मामले में खरीदी केंद्र प्रभारी का रवैया गैर जिम्मेदाराना है. खरीदी केंद्र प्रभारी कहना है कि उनकी जिम्मेदारी तुले हुए अनाज की सुरक्षा करना है न ही किसानों के अनाज की. पानी प्राक्रतिक आपदा है, उसमें वह कुछ नहीं कर सकते हैं. यदि पानी से अनाज सड़ता है तो यह बात सरकार जाने या तो सोसायटी का प्रबन्धक जाने.

वहीं मंडी अधिकारी का कहना है कि मंडी में खरीदी मार्केटिंग सोसायटी द्वारा खरीदी की जा रही है.मंडी की तरफ से लाईट पानी की व्यवस्था देना तक उनकी जवाबदारी सीमित है. बाकी सारी जिम्मेदारी मार्केटिंग सोसायटी की है. अधिकारियों की इस तरह अपनी जवाबदारी से पल्ला झाड़ना किसानों की मेहनत पर पानी फेरने का काम कर रहा है. यह हाल जिले के लगभग सभी मंडियों और खरीदी केन्द्रों का है. ऐसे में मानसून शुरू होने के बाद बनने वाले हालातों का अंदाजा बखूबी लगाया जा सकता है.
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