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प्रशासन से मदद नहीं मिली तो पैरों के सहारे आगे बढ़ना चाहता है प्रवेश

हादसे में दोनो हाथ गंवा चुके प्रवेश को स्कूल ने एडमिशन देने से मना कर दिया.
हादसे में दोनो हाथ गंवा चुके प्रवेश को स्कूल ने एडमिशन देने से मना कर दिया.

हादसे में दोनो हाथ गंवा चुके प्रवेश को स्कूल ने एडमिशन देने से मना कर दिया.

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मध्य प्रदेश के सिवनी के बोरमारा गांव में 14 साल का छात्र प्रवेश ने कुदरत से तो जंग जीत ली, लेकिन सिस्टम से हार गया. हादसे में दोनों हाथ गंवा चुके प्रवेश को स्कूल ने एडमिशन देने से मना कर दिया है. लेकिन इसके बावजूद अपने पैरों से लिख रहे प्रवेश को उम्मीद है कि वो अपने वैज्ञानिक बनने का सपना जरूर पूरा करेगा.

साल 2013 में प्रवेश अपने दोस्तों के साथ स्कूल की छत पर खेलते-खेलते 11000 के.वी. की हाईटेंशन तार पकड़ लिया था.हादसे में उसके दोनो हाथ जख्मी हो गए जिसके बाद उसे इलाज के लिए नागपुर ले जाया गया.इलाज के बाद प्रवेश के हाथ में इन्फेक्शन फैल गया, जिसकी वजह से उसके दोनो हाथ काटने पड़े. स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से प्रवेश नेअपने दोनो हाथ गंवा दिए.वहीं बेटे की जान बचाने के लिए गरीब परिजन नेअपनी सारी जमा पूंजी खर्च कर दी.परिजन ने कई बार प्रशासन से बेटे के इलाज के लिए गुहार लगाई, लेकिन कोई मदद नहीं मिल सकी.

सीएम ने किया था मदद का वादा



सीएम शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन कलेक्टर से प्रवेश और उसके परिवार को हर सम्भव मदद दिए जाने का आदेश दिया था. जिसके बाद मदद के नाम पर छात्र को प्रशासन ने क्रत्रिम अंग लगाने के लिए नागपुर भेजा. लेकिन प्रशासन का ये कदम कारगर साबित नहीं हुआ.
मदद नहीं मिला फिर भी हार नहीं माना प्रवेश

प्रशासन से हार कर प्रवेश ने बिना हाथों के जिन्दगी जीना सिख लिया. इतना ही नहीं उसने धीरे-धीरे अपने पैरों से लिखना भी शुरू कर दिया है. आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर प्रवेश ने नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा दी और प्रवेश की महनत रंग लाई और परीक्षा में सफल रहा.

प्रवेश ने परीक्षा में सफलता हासिल कर ली.लेकिन इसके बावजूद नवोदय स्कूल उसे एडमिशन नहीं दे रहा है. स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि स्कूल में बच्चें पढ़ाई के अलावा अपने सारे काम खुद करते हैं. प्रवेश के हाथ नहीं होने से वह पढ़ाई के अलावा कुछ नहीं कर पाएगा.

स्कूल की इस बेरूखी के चलते पीड़ित पिता कलेक्टर के ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई है.

हिम्मत नहीं हारने वाले प्रवेश का कहना है कि वह बड़ा होकर वैज्ञानिक बनना चाहता है.उसका कहना है कि कलेक्टर सर उसकी पढ़ाई के लिए इंतजाम जरूर करेंगे. जिससे उसका सपना पूरा होगा.
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