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दुनिया में सबसे ज़्यादा शावकों को जन्म देने वाली बुज़ुर्ग बाघिन को ऐसे किया रेस्क्यू
Seoni News in Hindi

Azhar Khan | News18 Madhya Pradesh
Updated: December 19, 2019, 2:26 PM IST
दुनिया में सबसे ज़्यादा शावकों को जन्म देने वाली बुज़ुर्ग बाघिन को ऐसे किया रेस्क्यू
पेंच टाइगर रिजर्व में बाघिन का रेस्क्यू ऑपरेशन

कॉलर वाली बाघिन (tigress) इसलिए ख़ास है क्योंकि ये उम्र दराज है. और इसके नाम सर्वाधिक 29 शावकों (29 CUBS) को जन्म देने का विश्व रिकार्ड दर्ज है. T15 बाघिन अपनी औसतन उम्र 14 वर्ष पूरे कर चुकी है

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सिवनी. सिवनी (SEONI) के पेंच टाइगर रिजर्व (Pench Tiger Reserve) की दुनिया में सबसे ज़्यादा 29 शावकों को जन्म देने वाली  T 15 बाघिन (T 15 tigress) अब फिट है. उम्र दराज़ हो चुकी कॉलर वाली बाघिन अपने शावकों के साथ फिर जंगल में चहलकदमी करने लगी है. T 15 बाघिन एक बाघ के साथ झगड़े में बुरी तरह घायल हो गयी थी. बाघिन को बचाने के लिए उसका लंबा इलाज चला. कोशिश और दुआ काम आयी. बाघिन बच गयी.ये बाघिन वाइल्ड लाइफ (Wild life) की धरोहर है. विश्व में सबसे ज़्यादा शावकों को जन्म देने का रिकॉर्ड इसके नाम है.

T15 बाघिन की जान बची तो वाइल्ड लाइफ में दिलचस्पी रखने वाले लोगों और पेंच टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने राहत की सांस ली. पेंच टाइगर रिजर्व सहित पूरे देश की शान बाघिन T15 स्थानीय तौर पर कॉलर वाली बाघिन के नाम से मशहूर है. कुछ दिन पहले शिकार के दौरान और अन्य बाघ से मुठभेड़ में वो बुरी तरह ज़ख़्मी हो गयी थी. घाव इतने गहरे थे कि बाघिन की जान भी जा सकती थी.

रात-दिन तीमारदारी
इसके बाद इस देश की धरोहर T15 को बचाने के लिए प्रबंधन ने पूरी जान झोंक दी. उसका रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ. उसका इलाज शुरू हुआ. टीम ने रात दिन उसकी तीमारदारी की. करीब एक हफ्ते तक उसका लगातार इलाज किया गया.दुआ और तीमारदारी काम आयी. बाघिन पहले की तरह स्वस्थ हो गई.

T15 ख़ास क्यों है?
कॉलर वाली बाघिन इसलिए ख़ास है क्योंकि ये उम्र दराज है. और इसके नाम सर्वाधिक 29 शावकों को जन्म देने का विश्व रिकार्ड दर्ज है. T15 बाघिन अपनी औसतन उम्र 14 वर्ष पूरे कर चुकी है. लेकिन इसके बाद भी यह बाघिन शावकों को जन्म दे रही है और जंगल में सर्वाइव कर रही है.कॉलर वाली बाघिन को वाइल्ड लाइफ में दिलचस्पी रखने वाले देश-विदेश के लोग जानते हैं. इस बाघिन पर कई डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म तक बन चुकी हैं.

डॉटिंग से इलाजपिछले दिनों जब बाघिन के गंभीर रूप से घायल होने की खबर आयी तो सब फिक्र में पड़ गए. प्रबंधन ने उसे बचाने के लिए अभियान छेड़ दिया.प्रबंधन के मुताबिक यह रेस्क्यू ऑपरेशन आसान नहीं था. दरअसल बाघिन के साथ अभी 11 महीने के तीन शावक हैं. शावकों के साथ होने के कारण बाघिन को ट्रेंकुलाइज कर उसके घावों का इलाज करना संभव नहीं था. इसलिए डॉक्टर अखिलेश मिश्रा और उनकी टीम ने डॉटिंग के ज़रिए बाघिन को एंटिबायोटिक इंजेक्शन देकर उसका नियमित एक हफ्ते तक इलाज किया और हर घंटे निगरानी भी रखी.



जंगल में सैर पर निकली बाघिन
अब सफल रेस्क्यू ऑपरेशन और इलाज होने के बाद बाघिन T15 की सेहत पहली की तरह बेहतर है. वो पहले की तरह जंगल में घूमने लगी है. प्रबंधन ने उसके स्वस्थ होने की घोषणा आधिकारिक तौर पर कर दी है.

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First published: December 19, 2019, 1:43 PM IST
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