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बैंक मैनेजर ने दो दर्जन गांव के खातों में लगाई सेंध, एक करोड़ रुपए डकारे

लालपुर के सहकारी बैंक में मध्यप्रदेश की सीमा से लगे करीब दो दर्जन गांवों के लोगों के बचत खाते संचालित किये जा रहे हैं. करीब एक दशक से इस बैंक के मैनेजर ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर लोगों के खातों में सेंध लगाना शुरू किया और यह राशि 99,31,935 रुपये तक जा पहुंची.

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    सहकारी बैंक के कर्मचारी और बैंक मैनेजर ने दो दर्जन गांव के लोगों के लगभग एक करोड़ रुपए डकार लिए. मामले में पुलिस और प्रशासन घोटालेबाजों को पर कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रही है.

    मामला बिलासपुर जिले के आदिवासी विकासखंड गौरेला के जिला सहकारी बैंक के लालपुर शाखा का है. जहां बैंक के मैनेजर ने अपने कर्मचारियों के साथ मिलकर लोगों के 99 लाख रुपए गबन कर लिए. मामले का खुलासा ऑडिट होने पर हुआ.

    सेंध लगाकर गायब किए 99 लाख रुपए
    लालपुर के सहकारी बैंक में मध्यप्रदेश की सीमा से लगे करीब दो दर्जन गांवों के लोगों के बचत खाते संचालित किये जा रहे हैं. करीब एक दशक से इस बैंक के मैनेजर ने अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर लोगों के खातों में सेंध लगाना शुरू किया और यह राशि 99,31,935 रुपये तक जा पहुंची.

    ऑडिट करने पर हुआ खुलासा
    लोगों द्वारा खाते में पैसा कम होने की शिकायत करने पर इस बैंक के शाखा का विशेष ऑडिट कराया गया और इस ऑडिट रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ वो चौकाने वाला था. यहां के स्टॉफ ने बैंक उपभोक्ताओं के खातों से फर्जी तरीके से पैसे निकाले साथ ही जमा करने वाले रुपयों को खातों में जमा करने की बजाय खुद की जेबों में रख लिया.

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    बैंक स्टाफ के साथ शाखा प्रबंधक ने किया गबन
    ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि यहां पूर्व में पदस्थ शाखा प्रबंधक बहोरन लाल तिवारी और पर्यवेक्षक टी आर पालगे ने संयुक्त रूप से अपने कार्यकाल में 68 लाख 52 हजार 708 रुपयों का घोटाला किया जबकि इसके बाद आये मैनेजर राजकुमार नीलकंठ और लिपिक भगवान सिंह राठौर ने भी 27 लाख 43 हजार 116 रुपये डकार लिये.

    खुलासा होने के बाद तीन लोगों ने जमा कराई राशि
    बाद में आये लिपिक ऋषि कुमार दुबे और विक्रेता के पद पर पदस्थ निरंजन सिंह राठौर के द्वारा भी क्रमश: 3 लाख 32 हजार 509 और 6 लाख 62 हजार 528 रुपये लोगों के खाते से गबन कर दिये गये. अब स्पेशल आडिट में खुलासा होने के बाद हड़कंप मचा और तीन लोगों ने करीब पौने छह लाख की राशि तो जमा कर दी है, लेकिन करीब एक करोड़ रुपये के घोटाले की राशि अब भी बाकी है.

    लापता है आरोपी पूर्व प्रबंधक
    हैरत की बात तो ये है कि पूर्व में शाखा प्रबंधक रखे बहोरन लाल तिवारी को अब बैंक प्रबंधन ढूंढ रहा है पर न तो उनके घर का स्थायी पता है न ही उनका कहीं पता चल रहा है. वहीं घोटाले के खुलासा होने और पूर्व के बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों के अंडरग्राउंड होने के बाद भी अब तक एफआईआर दर्ज नहीं करायी गयी है और आगे इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो इसके लिये भी कोई एहतियातन कार्रवाई नहीं की गयी है.

    खाताधारी बैंक के चक्कर काटने पर मजबूर
    बैंक के मैनुअल रिकार्ड के चलते लोगों के खातों मे चूना लगा और अब लोग अपनी ही जमापूंजी के लिये बैंक का चक्कर काटने को मजबूर हो रहे हैं जबकि आरोपी बैंक कर्मी एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं वहीं, वर्तमान प्रबंधक खुद को पाक साफ और पूर्व के बैंक कर्मी को दोषी बताकर कर्तव्यों की खानापूर्ति कर किनारा करने में लगे हुये हैं.

    इधर, जिला कलेक्टर से भी हर मामले की तरह आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने का रटारटाया जवाब मिल रहा है जबकि सैकड़ों लोग अभी भी अपनी जमापूंजी वापस पाने के लिये बैंक और अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं.

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