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शहडोल जिला अस्पताल में फिर 6 बच्चों की मौत, 3 की हालत नाजुक : CM से लेकर कमिश्नर तक ने बुलाई बैठक

शहडोल ज़िला अस्पताल में इससे पहले भी 6 बच्चों की मौत हो चुकी है. (फोटो सौ. न्यूज18 इंग्लिश)
शहडोल ज़िला अस्पताल में इससे पहले भी 6 बच्चों की मौत हो चुकी है. (फोटो सौ. न्यूज18 इंग्लिश)

जिला अस्पताल (District hospital) के एसएनसीयू में भर्ती 3 और नवजातों की हालत गंभीर बनी हुई है. बताया जा रहा है कि वॉर्ड (Ward) में पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं होने के कारण भी दिक्कत आ रही है

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 1, 2020, 9:41 AM IST
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शहडोल.शहडोल ज़िला अस्पताल के एसएनसीयू (SNCU) और पीआइसीयू (PICU) में बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. बीते 48 घंटे में पीआईसीयू और एसएनसीयू में 6 बच्चों की मौत हो चुकी है और तीन और बच्चों की हालत नाज़ुक बनी हुई है. इसमें से पीआइसीयू के तीन और एक बच्चा एसएनसीयू में दम तोड़ा.बच्चों की मौत के बाद शहडोल से लेकर राजधानी भोपाल तक हड़कंप मच गया. सीएम ने भोपाल और कमिश्नर ने शहडोल में अफसरों की बैठक ली.

24 घंटे के भीतर एक साथ 4 बच्चों की और फिर दो और बच्चों की मौत मामले में फिर जिला अस्पताल प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इसमें दो बच्चे आदिवासी समुदाय से हैं. डेढ़ साल पहले भी जिला अस्पताल शहडोल में एक साथ छह बच्चों की मौत हो गयी थी. उस मामले में अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई थी और उसके बाद तत्कालीन ज़िम्मेदार अधिकारियों को हटा भी दिया गया था लेकिन मामला शांत होते दोबारा पदस्थ कर दिया था.

कमिश्नर ने बुलाई आपात बैठक
बच्चों की फिर मौत होने के बाद राजधानी भोपाल तक हड़कंप मचा को कमिश्नर नरेश पाल ने आपात बैठक बुलाई. इस बैठक में कलेक्टर समेत मेडिकल कॉलेज की टीम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौजूद थे. इस बैठक में ज़िला अस्पताल में फिर बच्चों की मौत होने पर हालात की समीक्षा की गयी कि आखिर ये बड़ी लापरवाही कैसे हुई.
3 बच्चों की हालत नाजुक


जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती 3 और नवजातों की हालत गंभीर बनी हुई है. बताया जा रहा है कि वॉर्ड में पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं होने के कारण भी दिक्कत आ रही है.

प्रबंधन की दलील: गंभीर थे बच्चे, तीन शिफ्ट में डॉक्टर
एक साथ चार बच्चों की मौत होने पर अस्पताल प्रबंधन ने दलील दी है कि बच्चों की हालत काफी नाजुक थी. इसमें एक बच्चे को नाजुक हालत में लाया गया था. अस्पताल में मासूमों के इलाज के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है. एसएनसीयू और पीआइसीयू में तीन अलग-अलग शिफ्टों में ड्यूटी लगाई गई है.

पहले छह बच्चों की मौत हुई थी
जिला अस्पताल में एक साथ बच्चों की मौत का यह पहला मामला नहीं है. इसके पूर्व भी जिले में एसएनसीयू में छह बच्चों की मौत हो चुकी है. इसके बाद काफी हंगामा हुआ था. मामला प्रदेश स्तर तक पहुंच गया था. इसके बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने जिला अस्पताल सहित एसएनसीयू का दौरा कर स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया था. उस दौरान तत्कालीन सिविल सर्जन और सीएमएचओ को हटा दिया गया था.

तीन दिन से लेकर चार माह तक के बच्चे की मौत
1.बुढ़ार के अर्झुला निवासी पुष्पराज 4 माह की हालत खराब होने पर परिवार ने उसे 26 नवंबर को पीआईसीयू में भर्ती कराया था. इसके बाद डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया. लेकिन उपचार के बाद भी डॉक्टर उसे नहीं बचा सके और पुष्पराज ने दम तोड़ दिया.

2.इसी प्रकार सिंहपुर के बोडरी निवासी राज कोल तीन माह को बीमार होने पर परिजनों ने उसे 27 नवंबर की सुबह पीआईसीयू में भर्ती कराया था.डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

3.प्रियांश 2 माह को परिजन बेहोशी की हालत में 27 नवंबर को जिला अस्पताल लेकर आए थे. इस पर डॉक्टरों ने उसे पीआईसीयू में भर्ती कराया. इलाज के दौरान बच्चे की मौत हो गई.

4.तीन दिन की निशा को परिवार उमरिया जिला अस्पताल से डॉक्टरों द्वारा रेफर किए जाने पर 26 नवंबर को जिला अस्पताल में लेकर आया था. यहां डॉक्टरों ने उसे एसएनसीयू में भर्ती कराया। इलाज के दौरान निशा की एसएनसीयू में मौत हो गई.

5.सोहागपुर से लाए गए 3 माह के अनुराग बैगा की भी मौत हुई है. अनुराग की हालत पहले से खराब थी उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाया गया था जहाँ उपचार के दौरान उसने चार घंटे के भीतर दम तोड़ दिया.
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