शिवराज सरकार ने बनाई मंत्रियों की कमेटी, प्रमोशन में आरक्षण के लिए बनाएगी नए नियम
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शिवराज सरकार ने बनाई मंत्रियों की कमेटी, प्रमोशन में आरक्षण के लिए बनाएगी नए नियम
शिवराज सरकार की कैबिनेट का फाइल फोटो

मध्यप्रदेश में एससी-एसटी वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने के लिए राज्य सरकार ने नई कमेटी का गठन किया है. ये कमेटी आरक्षण के लिए नए नियम बनाकर 21 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करेगी.

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मध्यप्रदेश में एससी-एसटी वर्ग के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ देने के लिए राज्य सरकार ने नई कमेटी का गठन किया है. ये कमेटी आरक्षण के लिए नए नियम बनाकर 31 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करेगी.

प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग की ओर जारी आदेश में बताया गया कि, सरकारी पदों पर प्रमोशन में एससी-एसटी वर्ग के नौकरशाहों को आरक्षण का लाभ देने के लिए मंत्री परिषद् कमेटी गठित की जाती है.

इस समिति में वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री विजय शाह, खनिज औ जनसंपर्क मंत्री राजेंद्र शुक्ल, आदिम जाति कल्याण और अनूसूचित जाति मंत्री ज्ञान सिंह और सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य शामिल हैं.



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आदेश में बताया गया कि, इस कमेटी में सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव संयोजक की भूमिका में रहेंगे. वहीं, 31 जुलाई 2016 तक कमेटी नियमों का ड्राफ्ट पेश करेगी.

मुख्यमंत्री ने किया था ऐलान
बीते दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल के टीटीनगर दशहरा मैदान पर आयोजित अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी-कर्मचारी संघ के सम्मेलन को संबोधित करते हुए ऐलान कर दिया था कि, प्रदेश में अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारियों को पदोन्नति में दिया जाने वाला आरक्षण जारी रहेगा.

उन्होंने इस संबंध में नियमों में आवश्यक बदलाव के लिए केबिनेट की सब कमेटी बनाए जाने का भी ऐलान किया था. मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके और उन्होंने आगे कहा कि आप तय कर लें कौन सा वकील करना है. प्रमोशन में आरक्षण भी जारी रहेगा.

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हाईकोर्ट असंवैधानिक बता चुका
उधर, प्रामोशन में आरक्षण नियम को जारी रखने की घोषणा करने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित चार मंत्रियों को सामान्य जाति और पिछड़ा वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण द्विवेदी ने वकील के जरिए अवमानना का नोटिस भेज दिया है.

इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट पदोन्न्ति में आरक्षण नियम को असंवैधानिक करार दे चुका है और वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर यथास्थिति बनाए रखने को कहा है, उसे निरस्त नहीं किया है.

याचिका लगाने वाले अरुण द्विवेदी और तुलसीराम चिड़ार की ओर से भेजे नोटिस में कहा गया कि, मुख्यमंत्री ने जिस तरह से पदोन्न्ति में आरक्षण का पक्ष लिया, वो न्याय संगत नहीं है. यह कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आता है.

गौरतलब है कि जबलपुर हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है, जिस पर सिर्फ यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. 23 सिंतबर को इस मामले में सुनवाई होनी है.
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