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घरवाले करना चाह रहे थे शादी, खबर आई बेटा हो गया शहीद

घरवाले करना चाह रहे थे शादी, खबर आई बेटा हो गया शहीद

मध्य प्रदेश के शहडोल के वार्ड नम्बर 7 में रहने वाला 24 वर्षीय देवेंद्र सोनी उन सैनिकों में शामिल हैं, जिनकी बर्फीले तूफान की चपेट में आने से मौत हो गई. देवेंद्र 2010 में जबलपुर रैली में शामिल होकर सेना में भर्ती हो गया था. उसने सीमा में बहादुरी का परिचय देते हुए 6 मेडल भी अर्जित किए थे.

मध्य प्रदेश के शहडोल के वार्ड नम्बर 7 में रहने वाला 24 वर्षीय देवेंद्र सोनी उन सैनिकों में शामिल हैं, जिनकी बर्फीले तूफान की चपेट में आने से मौत हो गई. देवेंद्र 2010 में जबलपुर रैली में शामिल होकर सेना में भर्ती हो गया था. उसने सीमा में बहादुरी का परिचय देते हुए 6 मेडल भी अर्जित किए थे.

मध्य प्रदेश के शहडोल के वार्ड नम्बर 7 में रहने वाला 24 वर्षीय देवेंद्र सोनी उन सैनिकों में शामिल हैं, जिनकी बर्फीले तूफान की चपेट में आने से मौत हो गई. देवेंद्र 2010 में जबलपुर रैली में शामिल होकर सेना में भर्ती हो गया था. उसने सीमा में बहादुरी का परिचय देते हुए 6 मेडल भी अर्जित किए थे.

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"पापा मुझे किसी दूसरे डिपार्टमेंट में नौकरी नहीं करनी है. जहां भी करप्शन होगा मैं वहां नौकरी नहीं करना चाहता पापा. मुझे सेना का जवान बनना है देश के लिए सेवा करना है. 20 साल की उम्र में वह सेना में भर्ती हुआ और आज उसके पार्थिव शरीर को देखने के लिए भी दो दिन का इंतजार करना पड़ेगा. मेरा लाल देश के लिए शहीद हुआ इसका गर्व है पर मैंने अपना जिगर का टुकड़ा भी खो दिया."

यह उस पिता के शब्द है, जिसका बेटा देवेंद्र देश की सरहद पर ड्यूटी करते हुए शहीद हो गया. मध्य प्रदेश के शहडोल के वार्ड नम्बर 7 में रहने वाला 24 वर्षीय देवेंद्र सोनी उन सैनिकों में शामिल हैं, जिनकी बर्फीले तूफान की चपेट में आने से मौत हो गई.

देवेंद्र 2010 में जबलपुर रैली में शामिल होकर सेना में भर्ती हो गया था. उसने सीमा में बहादुरी का परिचय देते हुए 6 मेडल भी अर्जित किए थे.

नियंत्रण रेखा से सटे बांदीपुरा जिले के गुरेज सेक्टर में हिमस्खलन में 15 जवान बर्फ में दब गए थे, जिसमें से सिर्फ एक जवान को बचाया जा सका है. देवेंद्र भी उन सैनिकों में शामिल हैं, जिनकी मौत हो गई.

देवेंद्र अविवाहित था. परिजनों ने फैसला लिया था कि इस साल देवेंद्र की शादी कर देंगे, लेकिन उसके पहले ही बर्फीले तूफान की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई.

शहीद देवेंद्र के पिता विजय सोनी शहडोल कोर्ट में वकालत करते हैं. राइफल रेजिमेंट में पदस्थ तीन भाई और दो बहनों में सबसे छोटा था. बड़े भाई धीरेंद्र सोनी पुलिस अधीक्षक कार्यालय और वीरेंद्र सोनी पोस्ट ऑफिस शहडोल में कार्यरत हैं.

हादसे के दो दिन बाद मिली खबर

बांदीपुरा जिले में यह हादसा 25 जनवरी को हुआ था. एक दिन बाद यानी 26 जनवरी को देवेंद्र का शव मिला, जबकि परिवार को एक शुक्रवार को उसके शहीद होने की अधिकृत जानकारी मिली.

देवेंद्र अंतिम बार एक साल पहले अपने घर शहडोल आया था और 20 जनवरी को अंतिम बार उसने अपनी मां से बात की थी. दिसंबर में देवेंद्र की छुट्टी भी स्वीकृत हो गई थी, लेकिन रिलीवर नहीं आ पाने के कारण देवेंद्र घर वापस नहीं आ पाया और इस दौरान ही एक हादसे में वह हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गया.

Tags: Avalanche, Jammu and kashmir, Shahdol News

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