सड़ गया हजारों क्विंटल धान, क्या शराब माफिया को फायदा पहुंचाने अधिकारियों ने खेला खेल?

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में बारिश से हजारों क्विंटल धान बिना कराण सड़ गई. लापरवाहों ने देखा तक नहीं. (File)

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में प्रशासनिक अमला जबरदस्त लापरवाह है. यहां लालपुर हवाई अड्डे में हजारों क्विंटल धान ओपन कैप में रखा गया. ये धान सड़ गया है. 73332 क्विंटल ये धान वर्ष 2020-21 में खरीदकर लालपुर ओपन केप में रखा गया था.

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शहडोल. शहडोल जिले के लालपुर हवाई अड्डे में ओपन कैप में रखा हजारों  क्विंटल धान सड़ गया है. 73332 क्विंटल ये धान वर्ष 2020-21 में खरीदकर लालपुर ओपन केप में रखा गया था. धान की बोरियो में अंकुरण हो  गया है. इस मामले ने अब राजनीतिक रंग लेना भी शूरू कर दिया है. कांग्रेस ने प्रशासन पर गड़बड़ियां छुपाने और सड़े धान को शराब माफिया को बेचने का आरोप लगाया है.

गौरतलब है कि मप्र हाई कोर्ट ने प्रदेश में बारिश से सड़ रहे अनाज पर सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से इस संबंध में 23 जून को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. लेकिन, शहडोल के अधिकारियों को बारिश से धान खराब होनी की खबर ही नहीं है. प्रशासन लालपुर हवाई पट्टी स्थित अस्थाई कैप में 2020-21 में रखे धान को सहेज पाने में नाकाम रहा. यहां रखा हजारों क्विंटल धान सड़ चुका है.

जिम्मेदारों ने देखा तक नहीं

बता दें, धान सड़ने के लिए नागरिक आपूर्त निगम (नान), खाद्य विभाग और वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन जिम्मेदार हैं. खरीदी के समय ही अनेक स्थानों पर धान भीग चुका था. उसे नमीवाली हालत में ही रखवा दिया गया. नान व खाद्य विभाग  ने पड़ताल तक नहीं की. अस्थाई कैप के लिए बनाए गए चबूतरे में नियमानुसार इलाहाबादी व फ्लाईऐश ईंटों का उपयोग होना चाहिए था, लेकिन  ठेकेदार  ने गुणवत्ताहीन ईंट का उपयोग किया. इस वजह से नमी बोरियों में जाती रही, धान की बोरियो में अंकुरण हो गया और काफी धान सड़ गया. बता दें, नियमानुसार 3 माह के भीतर धान को उठवा लेना चाहिए था. लेकिन नान अधिकारियों ने ओपन कैप की धान का ठीक से रख-रखाव नहीं किया और न ही समय से उठवाया.

ये कहा मप्र हाई कोर्ट ने 

मप्र हाई कोर्ट ने प्रदेश में बारिश से भीगकर सड़ रहे अनाज पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि अनाज को हर हाल में सड़ने से बचाया जाए. चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार को आदेशित किया है कि प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया जाए कि खुले में भीग रहे अनाज का सर्वे कराकर तत्काल पॉलीथिन या अन्य किसी विधि से सुरक्षित करने का इंतजाम किया जाए. डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार से इस संबंध में 23 जून को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही केन्द्र सरकार, एफसीआई, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव एवं मप्र वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया गया है.

कांग्रेस ने लगाया आरोप

इस  मामले में कांग्रेस जिला अध्यक्ष आजाद बहादुर सिंह ने जिला प्रशासन को आड़े हाथ लिया. उन्होंने कहा कि धान का समय से उठाव नहीं किया गया और प्रशासन गड़बड़ियों को छुपाने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि क्या सड़े धान को शराब माफिया को बेचना चाहते हैं अधिकारी?

ये कहते हैं अधिकारी

इस मामले में जिला आपूर्ति नियंत्रण अधिकारी कमलेश टांडेकर ने कहा कि धान भीगा है. लेकिन, कम बोरियां भीगी हैं. जबकि, खुले आसमान के नीचे रखी धान काफी मात्रा में भीगकर अंकुरित हो गई है. नागरिक आपूर्ति निगम के मैनेजर राकेश चौधरी का कहना है कि  कलेक्टर द्वारा टीम का गठन किया गया है. वह जांच कर कर बताएगी कि कितना धान खराब हुआ है. उन्होंने कहा- जहां तक बात धान उठाव की है तो मिलर से रेट तय नहीं हो पा रहा है. इसलिए समय से धान का उठाव नहीं हो पाया है. शासन ने विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर 1800 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा था. जबकि परिवहन, भंडारण, खरीदी का कमीशन एवं अन्य खर्च मिलाकर धान की कीमत 2500 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच जाती है.  इस प्रकार शहडोल में लालपुर हवाई पट्टी के ओपन केम्प में रखा करोड़ों का धान अंकुरित हो कर सड़ चुका है.

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