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सार्वजनिक उद्यान हुए उपेक्षा का शिकार, पार्क बने असामाजिक तत्वों का अड्डा; पढ़ें यह खबर

सार्वजनिक उद्यान मनोरंजन का एकमात्र साधन है, जहां वह परिवार के साथ सुकून के कुछ पल बिता सकें. लेकिन नगरपालिका की उपेक्ष ...अधिक पढ़ें

रिपोर्ट- मोहित राठौर

शाजापुर. शाजापुर शहर में लगभग 70,000 की आबादी है और आमजन के लिए मनोरंजन का एकमात्र साधन सार्वजनिक उद्यान है. वैसे तो नगर पालिका के द्वारा शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में तीन पार्क बनाए गए हैं, लेकिन इन तीन में से दो पार्क पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है. एबी रोड स्थित शहीद पार्क ही लोगों के लिए सुकून का वक्त बिताने और बच्चों के लिए मनोरंजन का साधन है. यही वजह है कि यहां पर लोगों की भारी भीड़ रहती है. पार्को के रखरखाव के नाम पर नगर पालिका भारी राशि खर्च करती है, लेकिन इन पार्कों में झूले चकरिया जहां कबाड़ होती जा रही है और प्रबंधन की उपेक्षा के चलते महिला बच्चों की जगह यहां असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है.

शहर में है तीन पार्क
शाजापुर शहर में नगर पालिका के तीन पार्क है. शहर का सबसे महत्वपूर्ण और सुसज्जित पार्क एबी रोड़ स्थित शहीद पार्क है, जहां ओपन जीम के साथ ही शाम के समय मधुर संगीत और आकर्षक लाईट के साथ ही बच्चों के लिये झूले फिसलपट्टी ओर अन्य मनोरंजन के साधन है. नगरपालिका ने पिछले साल ही इसका जीर्णोद्धार कर सुसज्जित किया, इससे पहले यह भी उपेक्षा का शिकार था. नगरपालिका का दूसरा पार्क टंकी चौराहा स्थित नेहरू बाल उद्यान है. सबसे ज्यादा यही पार्क उपेक्षा का शिकार है. पार्क में चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है तो वही पौधों के साथ ही परिसर का सही रखरखाव ना होने से यहां लोगों ने आना लगभग बंद कर दिया है और अब शाम होते ही असामाजिक तत्व इस पार्क में बैठकर नशाखोरी करते हैं.

पिछली नगर पालिका परिषद ने चीलर नदी किनारे स्थित शंकराचार्य पार्क का निर्माण किया था. लोगों को उम्मीद थी कि यह शहर का सबसे अच्छा पार्क होगा, लेकिन नगर पालिका मैं इसकी सुध नहीं ली और अब यह भी उपेक्षा का शिकार है, स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक उद्यान मनोरंजन का एकमात्र साधन है जहां वह परिवार के साथ सुकून के कुछ पल बिता सकें, लेकिन नगरपालिका की उपेक्षा से अधिकांश पार्क शोपीस बनकर रह गए.

कबाड़ बनी टॉय ट्रेन
शहर के टंकी चौराहा स्थित नेहरू बाल उद्यान में बच्चों के लिए विशेष तौर पर छुक छुक गाड़ी याने टॉय ट्रैन लगाई गई थी, जो यहां आने वाले बच्चों को बहुत पसंद आती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से यह ट्रेन अब कबाड़ बन गई है इसकी पटरिया उखड़ने लगी है और डब्बे कबाड़ में पड़े है.

Tags: Mp news

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