शांति पैलेस होटल मामला: पूर्व SDM और कांग्रेस नेता समेत 12 के खिलाफ मामला दर्ज
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शांति पैलेस होटल मामला: पूर्व SDM और कांग्रेस नेता समेत 12 के खिलाफ मामला दर्ज
(सांकेतिक चित्र)

होटल को हाई कोर्ट के आदेश के बाद 7 जुलाई 2019 को विस्फोट से उड़ा दिया गया, लेकिन अब एक बार फिर ईओडब्ल्यू में इसकी शिकायत के बाद कुल 12 लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है

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उज्जैन. नानाखेड़ा स्थित होटल शांति पैलेस (Shanti Palace Hotel) के मामले में मंगलवार को आर्थिक अपराध अनुसंधान प्रकोष्ठ ने बड़ी कार्रवाई की है. होटल संचालक चंद्रशेखर श्रीवास और कांग्रेस के एक बड़े नेता के साथ ही गृह निर्माण संस्थाओं के 2 पूर्व अध्यक्ष और 8 सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया है. यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई जांच के आधार पर की गई है.

यह है मामला
उज्जैन के नानाखेड़ा स्थित एक थ्री स्टार होटल शांति पैलेस क्लार्क इन का अवैध रूप से साठगांठ करके निर्माण कर लिया गया था. इस पूरे अवैध निर्माण पर एक गोपनीय शिकायत हुई जिसके बाद जब कागजों को देखा गया तो पता चला कि पूरा होटल पूरी तरह अवैध जमीन पर खड़ा कर लिया गया जिसमें न सिर्फ गृह निर्माण मंडल के सदस्य बल्कि सरकारी अधिकारी की भी सांठगांठ भी शामिल थी.

हालांकि होटल को हाई कोर्ट के आदेश के बाद 7 जुलाई 2019 को विस्फोट से उड़ा दिया गया, लेकिन अब एक बार फिर ईओडब्ल्यू में इसकी शिकायत के बाद कुल 12 लोगों पर मामला दर्ज कर लिया है जिसमें पूर्व एसडीएम, पटवारी ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक सहित कांग्रेस नेता और सब-इंजीनियर भी शामिल है.



इनके खिलाफ मामला दर्ज


आर्थिक अपराध शाखा ने चंद्रशेखर श्रीवास निवासी सुदामा नगर, संपत्ति में भागीदार उनके परिवार की एक महिला, आदर्श विक्रम गृह निर्माण सोसायटी के अध्यक्ष और कांग्रेस नेता योगेश पिता भगवती लाल शर्मा निवासी फव्वाराचौक, नमन गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष मनोज पिता बालकृष्ण बंसल निवासी ऋषिनगर, अंजली गृह निर्माण संस्था के अध्यक्ष नंदकिशोर शर्मा निवासी विवेकानंद कॉलोनी के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है.

इस प्रकरण में तत्कालीन पटवारी आदर्श जामगढ़े, टी एंड सीपी के तत्कालीन संयुक्त संचालक राजीव कुमार पांडेय, तत्कालीन एसडीएम आर.एस. मीणा, नगर निगम रतलाम के वर्तमान एक्जिक्यूटिव इंजीनियर और उज्जैन नगर निगम में पूर्व में पदस्थ रहे जी.के. जायसवाल, सब इंजीनियर श्याम सुंदर शर्मा, नगर निगम स्टोर विभाग के लिपिक भूपेंद्र वेगड़ और नगर निवेश विभाग के सुप्रीटेंडेट इंजीनियर रामबाबू शर्मा को भी आरोपी बनाया है.

इन सभी आरोपियों ने तीन गृह निर्माण संस्थाओं की जमींन को आपसी सांठ-गांठ कर पहले आवासीय के रूप में डायवर्ट कराया और बाद में इसे कृषि उपयोग की बताकर होटल संचालक को बेच दिया. होटल संचालक चंद्रशेखर श्रीवास ने इस जमींन को नियमों के विपरीत जाकर होटल निर्माण की अनुमतियां प्राप्त की थी.
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