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श्योपुर के किले में एक रात अकेला छोड़ने पर इंसानों की तरह बोलने लगता है तोता, जाने क्या है रहस्य?

श्योपुर के किले में एक रात अकेला छोड़ने पर इंसानों की तरह बोलने लगता है तोता, जाने क्या है रहस्य?

श्योपुर के आमेट किले को लेकर दावा किया जाता है कि यहां तोते को एक रात के लिए अकेले छोड़ने पर इंसानों की तरह बोलने लगता है. सांकेतिक फोटो.

श्योपुर के आमेट किले को लेकर दावा किया जाता है कि यहां तोते को एक रात के लिए अकेले छोड़ने पर इंसानों की तरह बोलने लगता है. सांकेतिक फोटो.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के श्योपुर (Sheopur) जिले के आमेट गांव के पास जंगल में स्थित किले को लेकर दावा किया जाता है कि यहां तोते (Parrot) को एक रात के लिए अकेला छोड़ने के बाद अगले दिन वह अपने आप इंसानी बोली बोलने लग जाता है.

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श्योपुर. आज भी दुनियां भर में कई अनसुलझे रहस्य हैं, जिन्हें लोग चमत्कार और वर्षों पहले मर चुके लोगों की आत्मा से जोड़ते हैं. खंडहर हो चुके राजा-महाराजाओं के पुराने किलों में अभी भी अजीवो-गरीब टाइप की घटनाएं होती हैं, जो चर्चाओं का विषय बनी हुई हैं. एक ऐसा ही मामला मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के श्योपुर (Sheopur) जिले के आमेट गांव के पास जंगल में स्थित किले का है. जहां दावा किया जाता है कि तोते को एक रात के लिए अकेला छोड़ने के बाद अगले दिन वह अपने आप इंसानी बोली बोलने लग जाता है. रात भर में तोते को इंसानी भाषा पहचानना और बोलना कौन सिखा देता है. यह किसी को भी नहीं पता है.

श्योपुर जिला मुख्यालय से 60 किलोमीटर दूर आमेट गांव के पास जंगल में स्थित खंडहर हो चुका राजा महाराजाओं का पुराना किला आज भी मौजूद है. इस किले का रहस्य है कि, यहां एक रात के लिए तोता (मिट्ठू) को अकेला छोड़ने पर वह अगले ही दिन बोलने लग जाता है. यह अजीब जरुर लग रही होगी लेकिन, ग्रामीण इसे हजारों साल पुराना रहस्य होना बताते हैं. ग्रामीणों का मानना है कि, हजारों साल से इस किले में मिट्ठू को पढ़ाया जा रहा है. उसे कौन पढ़ाता है यह तो कोई नहीं जानता है लेकिन, किले में कोई तो मौजूद है जो एक रात में मिट्ठू को बोलना सिखा देता है.

…तो बोलने लगा तोता
गांव के गजराज नाम के व्यक्ति जो हाल ही में मिट्ठू को किसी से खरीदकर लाए थे लेकिन, वह अभी तक बोलता नहीं था. इसलिए वह अपने मिट्ठू को कैमरे के सामने किले में छोड़ने के लिए तैयार हो गए. किले में पहुंचकर ग्रामीणों ने पिंजरे में बंद मिट्ठू को किले की दीवार पर लकड़ी लगाकर पिंजरे के सहित लटका दिया. इसके बाद सभी गांव के लिए वापस लौट आए और अगले दिन जब सुबह हुई तो देखा कि मिट्ठू न सिर्फ इंसानी भाषा समझने लग गया. बल्कि, हिंदी में बात भी करने लग गया.

बेरोजगारों को रोजगार का अवसर
श्योपुर जिले का आमेट इलाका इस प्राचीन किले की वजह से बोलने बाले मिट्ठू के लिए जाना जाता है। इस इलाके के मिट्ठू न सिर्फ श्योपुर बल्कि, शिवपुरी, ग्वालियर से लेकर दुनियां भर में प्रसिद्ध हैं. जिसका फायदा इस इलाके के बेरोजगार युवाओं को मिल रहा है. बताया जाता है कि, इस इलाके के युवा मिट्ठू के छोटे-छोटे बच्चों को लाकर उनकी देखरेख करते हैं. इसके बाद उन्हें किले की एक रात की पढ़ाई कराने के बाद 2 हजार से 5 हजार रुपये तक की कीमत लेकर बेच देते हैं. सर्दियों में यह कारोबार सबसे ज्यादा होता है.

आमेट के इस किले में हजारों साल से अब तक तोते को एक रात में कौन पढ़ाता है, जिससे वह इंसानी आवाज में बोलने लग जाता है. यह पहली अभी भी अनसुलझी है. लेकिन, एक बात लोग मानते हैं कि किले में अभी भी कोई रहस्य है, जिसकी वजह से रात भर किले में रहने के बाद तोता बोलने लग जाते हैं.

Tags: Madhya pradesh news, Sheopur news

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